प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने विदिशा जिले की लटेरी मंडी में अपनी फसल बेचने का इंतजार कर रहे एक किसान की मौत को दिल झकझोरने वाली घटना बताया है. उन्होंने कहा कि किसानों की मौतों का सिलसिला लगातार जारी है लेकिन लाशों के ढेर पर बैठी सरकार बेफिक्र है. यह तो पराकाष्ठा है. अब तो किसानों को जागना ही चाहिए.
नाथ ने कहा कि किसान मूलचंद पिछले चार दिनों से अपना चना बेचने के लिए लाइन में लगा था. भीषण गर्मी में वह अपनी बैलगाड़ी के पास चक्कर खाकर गिर गया और वहीं उसकी इहलीला समाप्त हो गई. मूलचंद व्यापारियों और हम्मालों से कई दफा गुहार लगा रहे थे कि उनकी उपज की तुलाई कर लंे. उसके बेटों का रो-रो कर बुरा हाल है. किसानों का कहना है कि घटना की सूचना मिलने के बाद भी प्रशासन ने मंडी में चल रही अव्यवस्थाऐं सुधारने के लिए कोई कदम नहीं उठाये.
कमलनाथ ने कहा है कि मुझे विश्वास ही नहीं पूरा भरोसा है कि इस घटना के बाद भी मुख्यमंत्री संवेदन शून्य बने रहेंगे, क्यांेकि अब यह उनकी फितरत सी हो गई है. किसानों पर बरेली और मंदसौर में गोली चलवाने वाले शिवराज ंिसंह पर किसानों के दर्द का कोई असर नहीं होता है.
कमलनाथ ने कहा कि शिवराज सरकार के असंवेदनशील रवैये के कारण उनसे कोई अपेक्षा करना भी बेकार है. उन्होंने प्रदेश के किसानों सेे आव्हान किया है कि आपके साथी लगातार मर रहे हैं. एक ओर फसलों का बराबर मूल्य नहीं मिल रहा है वहीं दूसरी ओर समय पर अनाज भी नहीं बिक रहा है. अब आपको खुद ही सोचना है कि मध्यप्रदेश में यह सरकार रहने दी जाए या इसे उखाड़ फेंकंे.
नाथ ने कहा कि किसान मूलचंद पिछले चार दिनों से अपना चना बेचने के लिए लाइन में लगा था. भीषण गर्मी में वह अपनी बैलगाड़ी के पास चक्कर खाकर गिर गया और वहीं उसकी इहलीला समाप्त हो गई. मूलचंद व्यापारियों और हम्मालों से कई दफा गुहार लगा रहे थे कि उनकी उपज की तुलाई कर लंे. उसके बेटों का रो-रो कर बुरा हाल है. किसानों का कहना है कि घटना की सूचना मिलने के बाद भी प्रशासन ने मंडी में चल रही अव्यवस्थाऐं सुधारने के लिए कोई कदम नहीं उठाये.
कमलनाथ ने कहा है कि मुझे विश्वास ही नहीं पूरा भरोसा है कि इस घटना के बाद भी मुख्यमंत्री संवेदन शून्य बने रहेंगे, क्यांेकि अब यह उनकी फितरत सी हो गई है. किसानों पर बरेली और मंदसौर में गोली चलवाने वाले शिवराज ंिसंह पर किसानों के दर्द का कोई असर नहीं होता है.
कमलनाथ ने कहा कि शिवराज सरकार के असंवेदनशील रवैये के कारण उनसे कोई अपेक्षा करना भी बेकार है. उन्होंने प्रदेश के किसानों सेे आव्हान किया है कि आपके साथी लगातार मर रहे हैं. एक ओर फसलों का बराबर मूल्य नहीं मिल रहा है वहीं दूसरी ओर समय पर अनाज भी नहीं बिक रहा है. अब आपको खुद ही सोचना है कि मध्यप्रदेश में यह सरकार रहने दी जाए या इसे उखाड़ फेंकंे.
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