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संसार में दो प्रकार के लोग पाए जाते हैं. प्रथम अच्छे भले लोग दूसरे होते हैं स्वार्थी लोग. स्वार्थी लोगों की मित्रता युवाओं को मजबूर बनाती है. जैसे थोड़ी चाय थोड़ी सी शराब थोड़ा उधार ले लो यही थोड़ी थोड़ी आदतें आगे चलकर लतो मैं बदलकर युवाओं को परेशान कर बर्बाद कर देती है अर्थात सोचने का मौका भी नहीं देती है. उक्त विचार योग गुरु कृष्णकांत सोनी ने युवाओं के समक्ष कहे. उन्होंने आगे बताया कि अच्छे भले लोग इन थोड़ी-थोड़ी बुरी आदतों से बचा कर मित्रता को मजबूत बनाते हैं. युवाओं को स्वयं को मजबूत बनाने के लिए अच्छे भले व्यक्तियों से मित्रता को गहरी व टिकाऊ बनाना होगी. वर्तमान समय में 99ः युवा बाहरी नाश्ता भोजन करते हैं इस कारण वे अल्सर, पेट में जलन, शीघ्रपतन, गैस आदि रोगों से घिर जाते हैं.साथ ही युवा भारतीय संस्कृति की सुख -दुख में समान व्यवहार करने की कला भूलने के कारण आत्महत्या कर रहे हैं. इसी कारण माता- पिता दुखी व मजबूर जीवन जीते हैं. युवा यदि स्वस्थ, सुंदर, सफल, मजबूत जीवन जीना चाहते हैं तो उन्हें कृत्रिम वस्तुओं से दूर रहना होगा व योग प्राणायाम व घरेलू भोजन का सहयोग लेना होगा.अभी हम स्वार्थी लोगों से शरीर व पैसों को बचा सकते हैं. निशुल्क योग शिविर में योग गुरु ने आसान, प्राणायाम, जलनेति, सूत्र नेति, वस्त्र धोती, आई वास आदि का प्रशिक्षण दिया.
संसार में दो प्रकार के लोग पाए जाते हैं. प्रथम अच्छे भले लोग दूसरे होते हैं स्वार्थी लोग. स्वार्थी लोगों की मित्रता युवाओं को मजबूर बनाती है. जैसे थोड़ी चाय थोड़ी सी शराब थोड़ा उधार ले लो यही थोड़ी थोड़ी आदतें आगे चलकर लतो मैं बदलकर युवाओं को परेशान कर बर्बाद कर देती है अर्थात सोचने का मौका भी नहीं देती है. उक्त विचार योग गुरु कृष्णकांत सोनी ने युवाओं के समक्ष कहे. उन्होंने आगे बताया कि अच्छे भले लोग इन थोड़ी-थोड़ी बुरी आदतों से बचा कर मित्रता को मजबूत बनाते हैं. युवाओं को स्वयं को मजबूत बनाने के लिए अच्छे भले व्यक्तियों से मित्रता को गहरी व टिकाऊ बनाना होगी. वर्तमान समय में 99ः युवा बाहरी नाश्ता भोजन करते हैं इस कारण वे अल्सर, पेट में जलन, शीघ्रपतन, गैस आदि रोगों से घिर जाते हैं.साथ ही युवा भारतीय संस्कृति की सुख -दुख में समान व्यवहार करने की कला भूलने के कारण आत्महत्या कर रहे हैं. इसी कारण माता- पिता दुखी व मजबूर जीवन जीते हैं. युवा यदि स्वस्थ, सुंदर, सफल, मजबूत जीवन जीना चाहते हैं तो उन्हें कृत्रिम वस्तुओं से दूर रहना होगा व योग प्राणायाम व घरेलू भोजन का सहयोग लेना होगा.अभी हम स्वार्थी लोगों से शरीर व पैसों को बचा सकते हैं. निशुल्क योग शिविर में योग गुरु ने आसान, प्राणायाम, जलनेति, सूत्र नेति, वस्त्र धोती, आई वास आदि का प्रशिक्षण दिया.
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