गुरुवार, 3 मई 2018

खुश होकर काम करने से मिलेगी खुशी



वेद मर्मज्ञ एवं प्रखर आध्यात्मिक गुरू स्वामी सुखबोधानन्द ने कहा है कि खुशी के लिये काम करने से खुशी नहीं मिलेगी, बल्कि खुश होकर काम करने से खुशी मिलेगी.यंत्रवत जीवन और प्रतिक्रिया करने की प्रवृत्ति से मुक्ति पाना जरूरी है.उन्होंने कहा कि परेशानियों और समस्याओं को सकारात्मक दृष्टि से देखने पर वे भी गुरू बन जाती हैं.स्वामी सुखबोधानन्द ने आज यहां प्रशासन अकादमी में आनन्द विभाग के अंतर्गत राज्य आनन्द संस्थान द्वारा आयोजित 'आनन्द व्याख्यान' में यह विचार व्यक्त किय.स्वामी सुखबोधानंद ने आनन्द की चारित्रिक विशेषताओं और जीवन में उसकी उपस्थिति पर विस्तार से चर्चा की.उन्होंने कहा कि आनन्द को भविष्य में देखने की प्रवृत्ति और आदत बना लेने से निराशा और दुख ही हाथ आयेगा.उन्होंने कहा कि वर्तमान ही सब कुछ है, इसलिए आनन्द भी वर्तमान में ही उपस्थित है.यह मन के भीतर है.उन्होंने कहा कि जब सब दरवाजे बंद हो जाते हैं, तब ईश्वर नया द्वार खोल देता है.इसलिए प्रत्येक क्षण में आनन्द है.प्रत्येक पल में जीवन है.प्रत्येक पल ऊजार्वान है।
स्वामीजी ने कहा कि राग और द्वेष का रूपांतरण प्रेम में करने के लिए भक्ति की जरूरत पड़ती है.इसलिए भक्ति प्रमुख तत्व है.स्वामी ने कहा कि भविष्य माया है.सिर्फ वर्तमान ही सच है और वर्तमान में ही आनन्द व्याप्त है.उसकी अनुभूति करने की आवश्यकता है.आश्चर्य तत्व की प्रधानता होना चाहिए.उन्होने कहा कि वर्तमान में भूतकाल का हस्तक्षेप नहीं होने दें, इसके प्रति भी सचेत रहें.आनंद का दूसरा स्वरूप ऊर्जा है.

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