प्याज और गेहूं खरीदी के बाद प्रदेश सरकार द्वारा राजस्व का नुकसान करते हुए चुनिंदा लोगों को फायदा पहुचंाने के लिए टेंडर की शर्तों में मनमाफिक फेरबदल करने का बड़ा भ्रष्टाचार सामने आया है. मप्र नागरिक आपूर्ति निगम द्वारा नमक की सप्लाई के मापदण्डों में मनमाफिक फेरबदल किया गया है, जिसके परिणामस्वरूप विगत वर्ष में जो निविदा 3950 रू. प्रति मेट्रिक टन में हुई थी, वह इस वर्ष 5683 रू. प्रति मीट्रिक टन में हुई है. जिसके चलते इस वर्ष की निविदाओं में 1733 रू. प्रति मेट्रिक टन का अंतर आया है और इस कारण सरकार को लगभग 21 से 22 करोड़ रूपये का आर्थिक नुकसान होगा.
प्रदेश कांग्रेस मीडिया विभाग के अध्यक्ष मानक अग्रवाल ने कहा है कि नमक आपूर्ति के टेंडर की शर्ते सभी राज्यों में लगभग समानांतर रहती हैैं, किंतु मप्र सिविल सप्लाई कार्पोरेशन लिमिटेड ने अभी नई निविदा जारी की है, जिसमें एक अनुचित शर्त के कारण सभी नमक उत्पादक इस निविदा में भाग नहीं ले पाये. निविदा की शर्त अनुसार विगत 3 वित्तीय वर्ष में से किसी भी एक वित्तीय वर्ष में 10000 मेट्रिक टन के प्रदान अनुभव की अनिवार्यता मांगी गई है जो आज तक किसी भी राज्य सरकारों की निविदाओं में नहीं मांगी गई. इससे पहले भी मप्र सिविल सप्लाई कार्पोरेशन लिमिटेड द्वारा किसी भी निविदा में नहीं मांगी गई थी. उक्त शर्त सरकार द्वारा प्राप्त राजनैतिक संरक्षण के चलते कुछ प्रभावी उत्पादकों द्वारा डलवाई गई है, ताकि अन्य कोई नमक उत्पादक निविदा प्रक्रिया में भाग न ले सके और मनचाही दर उसे मिल सके. अग्रवाल ने सरकार से सवाल पूछा है कि पहले से राज्य की खस्ता हाल वित्तीय स्थिति के बावजूद शासन द्वारा इतना बड़ा भ्रष्टाचार किया जा रहा है. प्रदेश सरकार बतायें कि भाजपा ने कौन से नेताओं को इस निर्णय से फायदा होने वाला है. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गुजरात से आये भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के चहेतों को फायदा पहुंचाने एवं आगामी चुनाव में धन एकत्र करने के लिए यह किस तरह का खुलेआम भ्रष्टाचार किया जा रहा है. अग्रवाल ने राज्य सरकार से मांग की है कि निविदा की शर्तों पर पुर्नविचार किया जाये और उचित संशोधन कर निविदा प्रक्रिया को सरल बनाया जाये ताकि ज्यादा से ज्यादा नमक उत्पादक इस टेंडर प्रक्रिया में प्रतिस्पर्धा की दर से सरकार को उचित दर पर नमक की सप्लाई कर सके.
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें