प्रदेश में सौ सीटों पर प्रत्याशी उतारेगा जनता दल यू
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की नजर भी मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव पर टिक गई है. शरद यादव से अलग होने के बाद वे मध्यप्रदेश में अपनी जमीन बनाना चाहते हैं. नीतीश ने प्रदेश में 100 विधानसभा सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारने का मन बनाया है. उनके अधिकांश प्रत्याशी भाजपा और कांग्रेस के बागी नेता होंगे.
मध्यप्रदेश में छोटे दल जहां अब तक गठबंधन को लेकर प्रयासरत हैं, वहीं जनता दल यू की नजर राज्य के मुख्य राजनीतिक दलों भाजपा और कांग्रेस के बगावत करने वालों पर टिकी है. जनता दल यू ने मध्यप्रदेश में चुनाव मैदान में उतरने की तैयारी तो पूरी कर ली है. मगर शरद यादव से अलग होने के बाद वर्तमान में मैदान में दल की उपस्थिति नजर आ रही है, मगर दल की नजर इस बार जिताऊ उम्मीदवारों पर टिकी है. जद यू इस बार मैदान में पिछले तीन विधानसभा चुनावों की अपेक्षा ज्यादा प्रत्याशी मैदान में उतारना चाहता है. इसके लिए फिलहाल चयन प्रक्रिया चल रही है. पार्टी के खुद के कितने प्रत्याशी मैदान में होंगे, इस बात से ज्यादा दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष का पूरा जोर प्रदेश में भाजपा और कांग्रेस के टिकट वितरण पर है. नीतीश कुमार ने प्रदेश संगठन को इन दलों के ऐसे नेताओं पर नजर रखने को कहा है, जो अपने क्षेत्र में मजबूत हैं, मगर भाजपा, कांग्रेस द्वारा इन्हें टिकट नहीं दिए जाएंगे. ऐसे नेताओं को जनता दल यू अपना उम्मीदवार बनाकर मैदान में उतारेगा. इससे दल का वोट प्रतिशत तो बढ़ेगा साथ ही वह विधानसभा में अपना प्रत्याशी भी भेजने में सफल होगी. जद यू की यह रणनीति कितनी सफल होगी, यह तो टिकट वितरण के बाद दोनों दलों भाजपा, कांग्रेस के कितने बागी उम्मीदवार उसकी झोली में जाते हैं, इस पर निर्भर हैं, मगर फिलहाल प्रदेश संगठन दोनों दलों के बागी होने वाले उम्मीदवारों पर निगाहें जमाए हुए हैं.
राज्य विभाजन के बाद कमजोर हुआ है दल
मध्यप्रदेश के चुनावी इतिहास को देखा जाए तो जनता दल यू की स्थिति मध्यप्रदेश विभाजन के बाद बिगड़ी है. वर्ष 1985 के चुनाव में जनता दल यू ने 174 प्रत्याशी मैदान में उतारे थे, जिनमें से 5 को जीत हासिल हुई थी, जबकि 149 प्रत्याशियों की जमानत जब्त हो गई थी. इसके बाद 1990 के चुनाव में 115 प्रत्याशी मैदान में थे, इनमें से 28 प्रत्याशियों को जीत हासिल हुई थी. इसके बाद प्र्रदेश में दल का वजूद कम होता गया. 1993 के चुनाव में 4, 1998 में 1, 2003 में 1 प्रत्याशी को जीत हासिल हुई थी. 2003 के चुनाव के बाद जद यू को 2008, 2013 के चुनाव में एक भी स्थान पर जीत हासिल नहीं हुई, मगर इस बार 2018 में दल बागियों के भरोसे विधानसभा चुनाव में अपना खाता खोलना चाह रहा है.
100 से ज्यादा उम्मीदवार उतारेंगे: सूरज जायसवाल
जनता दल यू के प्रदेश अध्यक्ष सूरज जायसवाल का कहना है कि मध्यप्रदेश में हम ताकत के साथ मैदान में होंगे. हमने तय किया है कि हम अधिक उम्मीदवार उतारने के बजाय कम उम्मीदवार मैदान में उतारें और जीत का लक्ष्य तय करें. जायसवाल का कहना है कि हम 100 से ज्यादा उम्मीदवारों को मैदान में उतारेंगे. उन्होंने बताया कि भाजपा और कांग्रेस में टिकट वितरण के बाद भगदड़ मचना स्वाभाविक है, हम ऐसे व्यक्तियों को अपना बनाकर मैदान में उतारेंगे और उन्हें टिकट देकर जीत दिलाने का पूरा काम करेंगे. जायसवाल ने बताया कि हमारे संगठन का जहां पर प्रभाव है, वहां पर तो हम प्रत्याशी मैदान में उतारेंगे. गठबंधन को लेकर उन्होंने कहा कि हमारे साथ सामाजिक संगठन जुड़े हैं, फिलहाल हमने किसी संगठन से गठबंधन करके चुनाव मैदान में उतरने का मन नहीं बनाया है.
भाजपा, कांग्रेस के 45 नेता हमारे संपर्क में: मालवीय
जनता दल यू के प्रदेश महासचिव विनोद मालवीय का कहना है कि हमारा लक्ष्य है कि विधानसभा चुनाव में हमारे प्रत्याशी को जीत मिले. हम अधिक से अधिक 120 स्थानों पर प्रत्याशी मैदान में उतारेंगे, जो अपने क्षेत्र में मजबूत पकड़ वाले होंगे. उन्होंने कहा कि संगठन और दल से जुड़े व्यक्तियों को टिकट दिए जाएंगे, इस पर मंथन चल रहा है. पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार और प्रदेश अध्यक्ष सूरज जायसवाल के बीच चर्चा हो चुकी है. मालवीय ने बताया कि अभी हमारे संपर्क में भाजपा और कांग्रेस के 45 नेता हैं, इन नेताओं को आशंका है कि टिकट वितरण में उनकी उपेक्षा होगी. हम इन्हें टिकट देंगे.
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की नजर भी मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव पर टिक गई है. शरद यादव से अलग होने के बाद वे मध्यप्रदेश में अपनी जमीन बनाना चाहते हैं. नीतीश ने प्रदेश में 100 विधानसभा सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारने का मन बनाया है. उनके अधिकांश प्रत्याशी भाजपा और कांग्रेस के बागी नेता होंगे.
मध्यप्रदेश में छोटे दल जहां अब तक गठबंधन को लेकर प्रयासरत हैं, वहीं जनता दल यू की नजर राज्य के मुख्य राजनीतिक दलों भाजपा और कांग्रेस के बगावत करने वालों पर टिकी है. जनता दल यू ने मध्यप्रदेश में चुनाव मैदान में उतरने की तैयारी तो पूरी कर ली है. मगर शरद यादव से अलग होने के बाद वर्तमान में मैदान में दल की उपस्थिति नजर आ रही है, मगर दल की नजर इस बार जिताऊ उम्मीदवारों पर टिकी है. जद यू इस बार मैदान में पिछले तीन विधानसभा चुनावों की अपेक्षा ज्यादा प्रत्याशी मैदान में उतारना चाहता है. इसके लिए फिलहाल चयन प्रक्रिया चल रही है. पार्टी के खुद के कितने प्रत्याशी मैदान में होंगे, इस बात से ज्यादा दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष का पूरा जोर प्रदेश में भाजपा और कांग्रेस के टिकट वितरण पर है. नीतीश कुमार ने प्रदेश संगठन को इन दलों के ऐसे नेताओं पर नजर रखने को कहा है, जो अपने क्षेत्र में मजबूत हैं, मगर भाजपा, कांग्रेस द्वारा इन्हें टिकट नहीं दिए जाएंगे. ऐसे नेताओं को जनता दल यू अपना उम्मीदवार बनाकर मैदान में उतारेगा. इससे दल का वोट प्रतिशत तो बढ़ेगा साथ ही वह विधानसभा में अपना प्रत्याशी भी भेजने में सफल होगी. जद यू की यह रणनीति कितनी सफल होगी, यह तो टिकट वितरण के बाद दोनों दलों भाजपा, कांग्रेस के कितने बागी उम्मीदवार उसकी झोली में जाते हैं, इस पर निर्भर हैं, मगर फिलहाल प्रदेश संगठन दोनों दलों के बागी होने वाले उम्मीदवारों पर निगाहें जमाए हुए हैं.
राज्य विभाजन के बाद कमजोर हुआ है दल
मध्यप्रदेश के चुनावी इतिहास को देखा जाए तो जनता दल यू की स्थिति मध्यप्रदेश विभाजन के बाद बिगड़ी है. वर्ष 1985 के चुनाव में जनता दल यू ने 174 प्रत्याशी मैदान में उतारे थे, जिनमें से 5 को जीत हासिल हुई थी, जबकि 149 प्रत्याशियों की जमानत जब्त हो गई थी. इसके बाद 1990 के चुनाव में 115 प्रत्याशी मैदान में थे, इनमें से 28 प्रत्याशियों को जीत हासिल हुई थी. इसके बाद प्र्रदेश में दल का वजूद कम होता गया. 1993 के चुनाव में 4, 1998 में 1, 2003 में 1 प्रत्याशी को जीत हासिल हुई थी. 2003 के चुनाव के बाद जद यू को 2008, 2013 के चुनाव में एक भी स्थान पर जीत हासिल नहीं हुई, मगर इस बार 2018 में दल बागियों के भरोसे विधानसभा चुनाव में अपना खाता खोलना चाह रहा है.
100 से ज्यादा उम्मीदवार उतारेंगे: सूरज जायसवाल
जनता दल यू के प्रदेश अध्यक्ष सूरज जायसवाल का कहना है कि मध्यप्रदेश में हम ताकत के साथ मैदान में होंगे. हमने तय किया है कि हम अधिक उम्मीदवार उतारने के बजाय कम उम्मीदवार मैदान में उतारें और जीत का लक्ष्य तय करें. जायसवाल का कहना है कि हम 100 से ज्यादा उम्मीदवारों को मैदान में उतारेंगे. उन्होंने बताया कि भाजपा और कांग्रेस में टिकट वितरण के बाद भगदड़ मचना स्वाभाविक है, हम ऐसे व्यक्तियों को अपना बनाकर मैदान में उतारेंगे और उन्हें टिकट देकर जीत दिलाने का पूरा काम करेंगे. जायसवाल ने बताया कि हमारे संगठन का जहां पर प्रभाव है, वहां पर तो हम प्रत्याशी मैदान में उतारेंगे. गठबंधन को लेकर उन्होंने कहा कि हमारे साथ सामाजिक संगठन जुड़े हैं, फिलहाल हमने किसी संगठन से गठबंधन करके चुनाव मैदान में उतरने का मन नहीं बनाया है.
भाजपा, कांग्रेस के 45 नेता हमारे संपर्क में: मालवीय
जनता दल यू के प्रदेश महासचिव विनोद मालवीय का कहना है कि हमारा लक्ष्य है कि विधानसभा चुनाव में हमारे प्रत्याशी को जीत मिले. हम अधिक से अधिक 120 स्थानों पर प्रत्याशी मैदान में उतारेंगे, जो अपने क्षेत्र में मजबूत पकड़ वाले होंगे. उन्होंने कहा कि संगठन और दल से जुड़े व्यक्तियों को टिकट दिए जाएंगे, इस पर मंथन चल रहा है. पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार और प्रदेश अध्यक्ष सूरज जायसवाल के बीच चर्चा हो चुकी है. मालवीय ने बताया कि अभी हमारे संपर्क में भाजपा और कांग्रेस के 45 नेता हैं, इन नेताओं को आशंका है कि टिकट वितरण में उनकी उपेक्षा होगी. हम इन्हें टिकट देंगे.

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