बुधवार, 3 अक्टूबर 2018

सूचना आयुक्तों की नियुक्ति का विरोध



मध्यप्रदेश में सरकार द्वारा संघ और भाजपा से जुड़े सेवानिवृत्त अधिकारियों और पत्रकार की सूचना आयुक्त के पद पर की गई नियुक्ति को सवाल उठ रहे हैं. इस नियुक्ति को लेकर विरोध तेज हो गया है.नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने इन नियुक्तियों को लेकर राज्यपाल से मांग की है कि सरकार द्वारा गठित चयन समिति की इस अनुशंसा को खारिज करें. 
मध्यप्रदेश सरकार द्वारा मंगलवार को पांच सूचना आयुक्तों की नियुक्ति की गई. संघ और भाजपा से जुड़े सेवानिवृत्त आईएएस, आईपीएस और एक पत्रकार की नियुक्ति को विरोध तेज हो गया है. आरटीआई एक्टिविस्ट अजय दुबे और नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने इन नियुक्तियों को लेकर विरोध जताया है. आरटीआई एक्टिविस्ट अजय दूबे ने कहा कि सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 की 15 (3) के अनुसार चयन समिति द्वारा उपयुक्त लोगों के लिए राज्यपाल को अनुशंसा करेगी. इस समिति में मुख्यमंत्री, कैबिनेट मंत्री और नेता प्रतिपक्ष सदस्य हैं और निर्णय के समय 1 अक्तूबर  को नेता प्रतिपक्ष अनुपस्थित थे. अधिनियम की उक्त धारा में सर्वसम्मति से निर्णय लेने की बात कहती है न कि बहुमत और न ही कोरम की बात करती है. चयन समिति ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश 3 सितंबर 2012 का उल्लंघन भी किया जिसमें उमीदवारों का पैनल बनाने हेतु सर्च कमेटी के गठन कर पारदर्शी प्रक्रिया अपनाने की व्यवस्था कायम की थी. उन्होंने कहा कि भारत सरकार ने इसी व्यवस्था, कानून का सम्मान करते हुए केंद्रीय सूचना आयुक्तों की नियुक्ति हेतु कैबिनेट सेक्रेटरी की अध्यक्षता में सर्च कमेटी बनाई, लेकिन  सरकार ने नही बनाई. मध्यप्रदेश सरकार द्वारा सर्च कमेटी न बनाने से ही विवादित चेहरे मेरिट को दरकिनार कर सूचना आयुक्त बनाए जा रहे हैं. दुबे ने कहा कि उदहारण अरुण पांडेय रिटायर्ड आईएएस की पेंशन मध्यप्रदेश सरकार के मुख्य सचिव के निर्देश से 4 महीने से रुकी हुई है. ऐसे ही अन्य चयनित चेहरों की भी जांच होनी चाहिए.
अदालत में देंगे चुनौती
नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने नियमों को दरकिनार कर संघ से जुड़े लोगों, मंत्रियों के रिश्तेदारों, दागियों को सरकार ने सूचना आयुक्त बनाया है. उन्होंने कहा कि मैंने इस संबंध में मुख्यमंत्री सहित राज्य सरकार को 6 बार पत्र लिखे गए. इन पत्रों में उन्होंने लगातार चयन प्रक्रिया के तरीके पर सवाल उठाए और उसे सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देश अनुसार करने को कहा, लेकिन सरकार का अड़ियल रवैया यह बताता है कि उनकी दिलचस्पी सिर्फ इस बात पर थी कि अपने लोगों को किस प्रकार उपकृत किया जाए. अंतिम पत्र में मैंने यह सुझाव भी दिया था कि सूचना आयुक्त की नियुक्तियां चुनाव के बाद की जाएं.  सिंह ने कहा कि मेरे पत्रों का समाधान किए ही बगैर मुख्यमंत्री द्वारा पहले से ही तय किए गए नामों पर मोहर लगा दी. सिंह ने राज्यपाल  आनंदीबेन पटेल से मांग की है कि सूचना आयुक्तों की नियुक्ति पर रोक लगाई जाए. उन्होंने कहा कि  सूचना आयुक्तों की नियुक्ति पर रोक न लगी तो वे अदालत में इन नियुक्तियों को चुनौती देंगे.
इनकी हुई नियुक्ति
राज्य सरकार ने जिन पांच लोगों को सूचना आयुक्त नियुक्त किया है उनमें सेवानिवृा आईएएस अरुण पांडेय (उद्योग मंत्री राजेन्द्र शुक्त के रिश्तेदार), मुख्यमंत्री सचिवालय में पदस्थ आर.के.माथुर, सेवानिवृत्त आईपीएस सुरेन्द्र सिंह,सेवानिवृत्त आईएएस डी.पी. अहिरवार और संघ के करीबी पत्रकार विजय मनोहर तिवारी हैं. उल्लेनीय है आठ खाली पदों में से 5 पदों के लिए ये नियुक्तियां की गई है. 

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