गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने कहा कबीरदास की उल्टी वाणी, बरसे कंबल भीजे पानी
राम मंदिर निर्माण को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह द्वारा किए गए टवीट पर राज्य के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि कुछ लोगों की आदत है, आलोचना करने की। इसलिए वे जब भी बोलते हैं, उल्टा ही बोलते हैं। आलोचना ही सही, मगर उन्होंने राम का नाम तो लिया। दिग्विजय सिंह के लिए मैं इतना ही कहूंगा कि कबीरदास की उल्टी वाणी, बरसे कंबल भीजे पानी।
पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह को लेकर गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा इन दिनों लगातार हमलावर हैं। आज फिर उन्होंने दिग्विजय सिंह के राम मंदिर केा लेकर किए गए टवीट पर तंज कसा है। उन्होंने कहा कि कुछ लोगों की आदत होती है, आलोचना करने की। वे जब भी बोलते हैं, उल्टा ही बोलते है। राममंदिर को लेकर दिग्विजय सिंह ने आलोचना ही सही पर कम से कम उन्होंने राम का नाम तो लिया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के कारण ही राम मंदिर निर्माण में देरी हुई है। उन्होंने कहा दिग्विजय सिंह के लिए इतना ही कहंूगा कि कबीरदास की उल्टी वाणी, बरसे कंबल भीजे पानी।
कमलनाथ पर भी बोला हमला
गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने दिग्विजय सिंह के अलावा पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ पर भी हमला बोला है। उन्होंने डीजल पेट्रोल के दामों को कम करने के पूर्व मुख्यमंत्री द्वारा कही बात को लेकर कहा कि कमलनाथ को कुछ भी कहने का अधिकार नहीं है। ष्षीषे के घरों मंे रहने वाले यदि दूसरों के घरों पर पत्थर फेंकेंगे तो कैसे काम चलेगा। कांग्रेस यह पहले देख ले कि विधानसभा चुनाव में वचन पत्र मंे उसने जो वादा किया था और सरकार ने क्या किया।
क्या कहा था दिग्विजय ने
पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने आज राम मंदिर को लेकर टवीट कर कहा था कि राजीव गांधी का जिक्र करते हुए लिखा कि हमारी आस्था के केंद्र भगवान राम ही हैं, और आज समूचा देश भी राम भरोसे ही चल रहा है। इसीलिए हम सबकी आकांक्षा है कि जल्द से जल्द एक भव्य मंदिर अयोध्या राम जन्म भूमि पर बने और राम लला वहां विराजें। स्वर्गीय राजीव गांधी भी यही चाहते थे। इसके अलावा एक दूसरे ट्वीट में मुहूर्त को लेकर उन्होंने लिखा कि रही बात मुहूर्त की, तो इस देश में 90 प्रतिशत से भी ज्यादा हिन्दू ऐसे होंगे जो मुहूर्त, ग्रह दशा, ज्योतिष, चैघड़िया आदि धार्मिक विज्ञान को मानते हैं। मैं तटस्थ हूं इस बात पर कि 5 अगस्त को शिलान्यास का कोई मुहूर्त नहीं है, ये सीधे-सीधे धार्मिक भावनाओं और मान्यताओं से खिलवाड़ है।
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