विंध्य से ज्यादा दावेदार, मालवा, महाकौषल से एक एक विधायक की दावेदारी
मध्यप्रदेष विधानसभा के सत्र की तारीख तय होने के साथ ही विधानसभा अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद के लिए दावेदारों भी सक्रिय हो गए हैं। अध्यक्ष पद के लिए इस बार विंध्य अंचल से दावेदारों की ज्यादा सक्रियता नजर आ रही है। वहीं विंध्य और महाकौषल से एक एक विधायक भी इस पद के लिए सक्रिय बताए जा रहे हैं।
मध्यप्रदेष विधानसभा के सितंबर माह में होने वाले सत्र में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद के लिए चुनाव होना है। भाजपा में इसके लिए मंथन का दौर भी षुरू हो गया साथ ही दावेदार भी सक्रिय नजर आने लगे हैं। वैसे अध्यक्ष पद के लिए पूर्व विधानसभा अध्यक्ष डा सीताषरण षर्मा का नाम आगे बताया जा रहा हैं, उनके नाम पर मुख्यमंत्री षिवराज सिंह चैहान की सहमति भी हो सकती है। इसके पीछे तर्क यह है कि वे पिछली बार सदन का संचालन कर चुके हैं, मगर इस बार उनकी राह में विंध्य के नेता रोड़ बनते नजर आ रहे हैं। विंध्य अंचल के नेता वैसे तो मंत्रिमंडल में पर्याप्त स्थान न मिलने से पहले से ही नाराज चल रहे हैं, अब अगर इस बार भी उन्हें मौका नहीं मिला तो नाराजगी बढ़ सकती है। विध्य अंचल से केदार शुक्ला, नागेंद्र सिंह नागौरी और गिरीश गौतम शामिल है। नागौरी 5 बार से विधायक हैं। जबकि गौतम और ष्षुक्ला 4 बार के विधायक हैं। इनके अलावा पूर्व मंत्री और मुख्यमंत्री के समर्थक माने जाने वाले राजेन्द्र ष्षुक्ला भी इस पद के लिए सक्रियता दिखा रहे हैं। वहीं महाकौषल से पूर्व मंत्री अजय विष्नोई का नाम सामने आ रहा है। वे भी लंबे समय से मंत्री नहीं बनाए जाने को लेकर असंतुश्ट नेताओं में ष्षामिल हैं, जबकि मालवा से यशपाल सिंह सिसोदिया के नाम की भी चर्चा है।
उपाध्यक्ष के लिए कम हैं दावेदार
भाजपा में विधानसभा अध्यक्ष के लिए ज्यादा दावेदार है, जबकि उपाध्यक्ष पद के लिए दावेदारों की संख्या कम है। इसके पीछे तर्क यह दिया जा रहा है कि अगर परंपरा का निर्वाह करते हुए उपाध्यक्ष पद भाजपा विपक्ष को देती है तो इस पद पर विपक्ष के किसी नेता का नाम होगा। मगर इसकी संभावना कम है। बताया जाता है कि भाजपा असंतुश्ट नेताओं को साधने के लिए इस बार ऐसा नहीं करेगी। अगर यह फैसला हुआ तो भाजपा इस पद पर आरक्षित वर्ग से अनुसूचित जनजाति के विधायक को मौका दे सकती है। इनमें प्रदीप लारिया, देवेन्द्र वर्मा, हरीषंकर खटीक में से किसी का नाम सामने आ सकता है।
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