संघ प्रमुख मोहन भागवत के राजधानी प्रवास पर आते ही कांग्रेस ने संघ को लेकर हमले तेज कर दिए हैं। वहीं कांगे्रस के वरिष्ठ नेता के के मिश्रा ने संघ प्रमुख को पत्र लिखकर कहा है कि आप नैतिकता के पक्षधर रहे हैं, फिर क्या प्रदेष में चल रही अनैतिक सरकार को आपका समर्थन है।
संघ प्रमुख दो दिवसीय प्रवास पर भोपाल पहुंचे हैं, वे यहां पर वरिष्ठ कार्यकर्ताओं से सीधा संवाद कर रहे है। संघ प्रमुख के राजधानी पहुंचते ही कांग्रेस पूर्व की तरह फिर संघ पर हमलावर हो गई है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता के के मिश्रा ने संघ प्रमुख को पत्र लिखकर कहा है कि ऐसा कहा जाता है कि संघ, सदैव नैतिकता का पक्षधर रहता है और मध्यप्रदेष में इन दिनों विधायकों की खरीद-फरोख्त, चोरी के जनादेश से निर्मित एक अनैतिक व जबरिया सरकार कार्य कर रही है, क्या नैतिकता की दुहाई देने वाले संघ व संघ परिवार के मुखिया के नाते इस अनैतिक सरकार को आपका समर्थन है। आपकी विचारधारा को निरंतर कोसने वाली विचारधारा के स्वार्थों के कारण आपकी शरण में आए घुसपैठिए, क्या आपके विचारों में अब सच्चे राष्ट्रवादी हो गए हैं? क्या आप इसे उचित मानते हैं, यदि हां तो आप इसे अपना समर्थन सार्वजनिक कीजिएगा और यदि नहीं, तो अपनी चुप्पी तोड़कर इसका प्रतिकार कीजिए ताकि नैतिकता को लेकर संघ कबीले का वास्तविक चाल, चरित्र व चेहरा स्पष्ट हो सके?
मिश्रा ने पत्र में लिखा कि आपकी इस विषयक चुप्पी तोड़ने से जहां भारतीय लोकतंत्र में यह एक अच्छा संदेश जाएगा कि जनादेश की चोरी, सौदेबाजी से बनाई गई सरकार को लेकर देश प्रदेश का आमजन नैतिकता का पूजन करे या अनैतिकता का ? जब देश के सम्मुख मध्यप्रदेष एक अनैतिक जनादेश से सरकार बनाकर एक गंदी परंपरा का नेतृत्व कर रहा हो, उस सरजमीं पर आपका यह तीन दिवसीय महत्वपूर्ण प्रवास यदि संघ के ध्येय वाक्य नैतिकता, सादगी व राजनैतिक सुचिता को लेकर मुंह छुपाएगा, मूकसमर्थन देगा तो इसका भी गलत संदेश जाएगा। मिश्रा ने संघ प्रमुख से मांग की कि आप एक घिनौने राजनैतिक झंझावात से गुजर रहे प्रदेश में उपर्युक्त सामयिक विषय पर अपने प्रेरक विचार स्पष्ट करेंगे तो बेहतर होगा।
असत्य के आधार पर हुई संघ की स्थापना
पूर्व मंत्री डॉक्टर गोविंद सिंह ने जमकर हमला बोला है. पूर्व मंत्री गोविंद सिंह ने कहा कि संघ की स्थापना केवल असत्य के आधार पर हुई है, संघ जर्मनी की हिटलर शाही पद्धति पर चलता है। उन्होंने कहा कि संघ ने कहा था कि यह सिर्फ एक सांस्कृतिक संगठन है, लेकिन संघ प्रमुख मंत्रियों की क्लास भी लेते हैं और उन्हें निर्देश भी देते हैं, सरकार की चाबी मोहन भागवत के हाथों में है. पूरी तरह से इस देश में प्रजातंत्र को समाप्त करने की संघ और भारतीय जनता पार्टी की है.
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