सोमवार, 10 अगस्त 2020

एमआरपी से ऊँचे दामों पर बेची जा रही शराब


ऊपर का पैसा कहां जा रहा है, जनता की लूट बर्दाश्त नहीं करेगी कांग्रेस

मध्य प्रदेश सरकार और शराब ठेकेदारों की मिली भगत से एमआरपी से अधिक दामों पर शराब बेची जा रही है। मध्यप्रदेश में जब कांग्रेस की सरकार थी उस समय ठेकेदारों को शराब की जो दुकानें आवंटित की गई थी, उनमें से 70 प्रतिशत ठेकेदार दुकानों को छोड़ चुके हैं।
यह आरोप आज पूर्व मंत्री बृजेन्द्र सिंह ठाकुर ने मीडिया से चर्चा करते हुए लगाए। उन्होंने कहा कि  प्रदेश के अधिकतर जिलों में आज शराब की बिक्री प्रिंट रेट से अधिक दाम पर की जा रही है। लिखित जानकारी प्रदेश के वाणिज्य कर मंत्री जगदीश देवड़ा  सहित आबकारी विभाग के आला अधिकारियों को भी दी गई है।
उन्होंने कहा कि मदिरा का निर्धारित विक्रय मूल्य निर्धारित न्यूनतम विक्रय मूल्य, सेलिंग प्राइस इसे मैं मिनिमम सपोर्टिंग प्राइस मानता हूं इसी में मैक्सिमम रिटेल प्राइस  भी है। निर्धारित से कम और अधिकतर विक्रय मूल्य के बीच की विक्रय दरों पर मदिरा के विक्रय किए जाने का संबंधी प्रावधान आबकारी नियमों में है। इन प्रावधानों के उल्लंघन पर इसे गंभीर प्रकृति की अनियमितता मानते हुए पहली और दूसरी बार की शिकायत मिलने पर 1 से लेकर 5 दिन की अवधि तक के लिए मदिरा दुकान की अनुज्ञप्ति निलंबित की जाती है और 2 बार से अधिक उल्लंघन होने पर वर्ष की शेष अवधि के लिए लाइसेंस निरस्त किए जाने का प्रावधान है।
उन्होंने कहा कि संपूर्ण प्रदेश में मदिरा दुकानों पर उपरोक्त नियमों का उल्लंघन किया जा रहा है। इसके प्रमाण मेरे पास उपलब्ध हैं, परंतु आबकारी विभाग कोई कार्यवाही नहीं कर रहा है। एक तरह से जनता की जेब काटी जा रही है और शासन को चूना लगाया जा रहा है इसका क्या कारण है इसे सरकार को स्पष्ट करना चाहिए? वहीं सेनेटाईजर की कर चोरी में एक व्यापारी को तो आपने जेल में डाल दिया लेकिन इसमें किसी अधिकारी की कोई जबावदेही तय क्यों नहीं की गई और उन कार्यवाही क्यों नहीं की गई? राठौर ने मांग की कि सरकार बताए, आज तक इस संबंध में कितने प्रकरण कायम किए गए हैं? और इन प्रकरणों पर क्या कार्रवाई की गई है? क्या यह गंभीर आर्थिक अपराध नहीं है?

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