रविवार, 16 अगस्त 2020

’शिवराज बड़बोले, झूठे भाषणों से आत्मनिर्भर नहीं होगा प्रदेशः कमलनाथ


उपचुनाव के बाद पराधीनता की बेड़ियों से जकड़ा प्रदेष होगा मुक्त
प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने स्वतंत्रता दिवस पर अपने संबोधन में प्रदेष के मुख्यमंत्री षिवराज सिंह चैहान पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि षिवराज सिंह बड़बोले और झूठे भाषण देने में माहिर है। उनके इन भाषणों  से मध्यप्रदेष आत्मनिर्भर नहीं होगा।
प्रदेष कांग्रेस कार्यालय में झंडावंदन के बाद पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने अपने संबोधन में यह बात कही। उन्होंने कहा कि  मुझे पूरी उम्मीद है कि  जिस तरह जनमत को नकार कर हथियाई हुई सरकार की पराधीनता की बेड़ियों में प्रदेश जकड़ा हुआ है, जल्द उपचुनावों के बाद स्वाधीन होगा और पुनः अवरुद्ध विकास की विपन्नता से प्रगति के प्रशस्त मार्ग पर लौट आएगा। मुख्यमंत्री का स्वाधीनता दिवस के अवसर पर उद्बोधन सुना। हमेशा की तरह उनका भाषण झूठ की बुनियाद पर आधारित था तथा जमीनी सच्चाई से कोसों दूर था। नेतृत्व हमेशा प्रतिकूल परिस्थिति में परखा जाता है। ये हमेशा याद रखा जाएगा कि  जब मध्यप्रदेश महामारी की विभीषिका से जूझ रहा था तब भारतीय जनता पार्टी की सरकार प्रदेश के नागरिकों की मदद करने की अपेक्षा राजनैतिक रैलियों और प्रचार में व्यस्त थी और प्रदेश को महामारी की आग में झोंक दिया था। विडंबना देखिए, शिवराज सिंह चैहान वर्षों से अपने  भाषणों में स्वर्णिम मध्यप्रदेश , समृद्ध  मध्यप्रदेश की बात करते हैं और खुद को बेटियों का मामा , आदिवासियों का भाई कहते हैं ,मगर जिस बात और वर्ग के लिए जितनी जोर से भाषण दिया वो वर्ग उतना ही गर्त में चला गया। समृद्ध और स्वर्णिम मध्यप्रदेश का हाल देखिए।
उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में भाजपा के 15 वर्षों के शासन की उपलब्धियां यह थीं  कि 80 लाख परिवार अर्थात् लगभग आधी आबादी के पास गरीबी रेखा के कार्ड थे। 68.25 लाख लोग मनरेगा की मजदूरी के लिए पंजीकृत थे। प्रतिव्यक्ति आय में मध्यप्रदेश 27 वें स्थान पर था । खुद को मामा प्रचारित करने वाले मुख्यमंत्री के समय में  48 लाख बच्चे कुपोषण का शिकार थे। नवजात शिशु  की मृत्यु सबसे ज्यादा मध्यप्रदेश में होती थी । 72 प्रतिशत स्कूलों में बिजली के कनेक्शन तक नहीं थे ।
हमारी क्रियांवित या स्वीकृत योजनाओं को बताया उपलब्धि
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि  बेटियों के साथ बलात्कार सबसे ज्यादा मध्यप्रदेश में हुए थे। आदिवासी भाइयों  के हाल ये थे कि   वनाअधिकार के पट्टे सबसे ज्यादा शिवराज सरकार में निरस्त हुए और आज मध्यप्रदेश के आत्ममुग्ध मुख्यमंत्री झूठ की भरमार से भरा  आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश का  नया स्वप्न परोस रहे। अपने  उद्बोधन में मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री ने जो ज्यादातर उपलब्धियां बताई हैं , उन्हें सैद्धान्तिक रूप से कांग्रेस की 15 माह की सरकार में क्रियान्वित या स्वीकृत किया गया है। मैं सिर्फ इतना आग्रह करना चाहता हूं,मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री से कि सच बराबर तप नहीं और झूठ बराबर पाप।’

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