मध्यप्रदेष में एक बार फिर ओबीसी आरक्षण को लेकर सियासत तेज हो गई है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चैहान ने पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के पत्र का जवाब देते हुए कहा कि हमारी सरकार अदालत में मजबूती से पक्ष रखेगी। उन्होंने पत्र में लिखा है कि कांग्रेस सरकार ने इसे लेकर एक साल में कोई ठोस कदम नहीं उठाया, जिससे की स्टे खत्म हो सके।
ओबीसी आरक्षण को लेकर करीब 15 दिन पहले राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चैहान को एक पत्र लिखकर कहा था कि 27 प्रतिशत आरक्षण को लेकर सरकार अदालत में मजबूत पक्ष रखे। पूर्व मुख्यमंत्री के पत्र का जवाब अब मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चैहान ने दिया है। उन्होंने पत्र में लिखा है कि पिछड़े वर्ग के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण को लेकर कोर्ट में चुनौती दी गई थी। 14 मार्च से 19 मार्च 2019 तक याचिका में आपकी सरकार ने कोर्ट में कोई जवाब प्रस्तुत नहीं किया था, जिस वजह से ये निर्णय स्थगित कर दिया गया था। 19 मार्च की सुनवाई के दौरान भी सरकार के महाधिवक्ता कोर्ट में उपस्थित नहीं हुए। यहां तक की करीब 8 महीने तक न्यायालय के सामने सरकार ने कोई जवाब प्रस्तुत नहीं किया और न ही स्टे को भी खत्म कराने का कोई प्रयास किया गया।
मुख्यमंत्री ने अपने पत्र में लिखा है कि कांग्रेस सरकार ने एक साल तक इस मामले में ऐसी कोई कोशिश नहीं की जिससे स्टेट खत्म हो और आरक्षण के निर्णय को क्रियांवित किया जा सके। सरकार को इस मामले में जो गंभीरता दिखानी चाहिए थी, वह नहीं दिखाई गई। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चैहान ने कहा है कि भाजपा की सरकार इस मामले को लेकर गंभीर है और इस याचिका में प्रभावी रूप से अपना पक्ष रखेंगे।
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