चार दिन में दूसरी घटना
भोपाल। देश के चीता प्रोजेक्ट को एक बार फिर बड़ा झटका आज शुक्रवार को उस वक्त लगा, जब मध्यप्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में एक और चीते की मौत हो गई। चार दिन में चीते की मौत की यह दूसरी खबर है। वैसे नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका से लाए गए चीतों में से अब आठ चीतों की मौत हो चुकी है।
प्रदेश के शिवपुर जिले में स्थित कूनो नेशनल पार्क में चीतों की मौत का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। हाल ही में एक और दुःखी कर देने वाली खबर सामने आई है। मिली जानकारी के अनुसार कूनो नेशनल पार्क में एक और चीते की मौत हो गई है। यह खबर सामने आने के बाद से ही कुनो नेशनल पार्क एक बार फिर चर्चाओं का विषय बन गया है। बता दें कि कूनो नेशनल पार्क में चीतों के मौत का मामला थमने का नाम नहीं ले रहा है। मिली जानकारी के अनुसार कूनो नेशनल पार्क में एक और चीते की शुक्रवार को मौत हो गई है। जानकारी के लिए बता दें कि, कूनो में अब तक 3 शावकों मर चुके हैं, जबकि 5 चीते दम तोड़ चुके हैं। कुल मिलाकर 8 चीतों की मौत हुई है। इससे पहले सोमवार को चीता ‘दक्ष’ ने दम तोड़ दिया था। वहीं पहली मौत नामीबियाई चीते की हुई थी। इतना ही नहीं हाल ही में तेजस नाम के चीते की भी मौत हो गई थी, जिसकी गर्दन पर गंभीर निशान होने की बात सामने आ रही है। बताया जाता है कि सुबह गश्ती के वक्त पेटोलिंग करने वाली टीम को चीता सूरज मृत मिला था। अधिकारियों का कहना है कि चीते की मौत का कारण तो पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही पता चलेगा। चार दिन में दो चीतों की मौत से नेशनल पार्क के अधिकारी भी सदमे में है।
24 चीतों में से अब बचे 16
मध्यप्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में 17 सितंबर 1922 को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने चीता प्रोजेक्ट के तहत चीते छोड़े थे। इनमें पांच मादा और तीन नर चीते ष्शामिल थे। ये चीते नामीबिया से लाए गए थे। इसके बाद दक्षिण अफ्रीका से 18 फरवरी 2023 को 12 और चीते लाए गए थे। इनमें 7 नर और 5 मादा ष्शामिल थे। इसके बाद चीता ज्वाला ने मार्च माह में कूनो पार्क में चार ष्शावकों को जन्म दिया था। इस तरह से कूनो नेशनल पार्क में चीतों की संख्या कुल 24 हो गई थी। इनमें से अब तक 8 चीतों की मौत हो चुकी है। अब पार्क में कुल 16 चीते बचे हैं।
वर्चस्व की लड़ाई होती रहती है : शाह
कूना नेशनल पार्क में लगातार चीतों की हो रही मौत को लेकर मध्यप्रदेश के वन मंत्री विजय शाह ने बताया कि भोजन, मैटिंग और अपनी टेरिटरी को लेकर जानवरों में आपसी वर्चस्व की लड़ाई चलती रहती है। उन्होंने कहा कि बिना विशेषज्ञों स्वीकृति के न तो चीतों को खाना दिया जाता है न उनको छोड़ा जाता है। जानवर के व्यवहार में क्या परिवर्तन आ रहा है या नहीं आ रहा है, पूरी टीम उसकी जांच करके फिर निर्णय लेती है। जो 4 बच्चे हुए थे वह बहुत तंदुरूस्त नहीं थे। उनको इसमें नहीं गिना जाना चाहिए।
अधिकारी हैं मौन
चीते की मौत को लेकर वन विभाग के अधिकारी कुछ भी बोलने से इंकार कर रहे हैं। हर बार प्रबंधन पर लापरवाही के आरोप भी लगते रहे हैं, लेकिन उन्हें नजरअंदाज कर दिया जाता है। हाल ही में ही मंगलवार को कूनो अभ्यारण में तेजस नामक नर चीता की मौत हुई है। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में पता चला है कि तेजस एक मादा चीते के साथ हिंसक लड़ाई के बाद सदमे में आ गया था और इससे उबरने में समर्थ नहीं था। चीतों की मौत क्यों हो रही है अभी तक यह सच्चाई सामने नहीं आई है कि आखिरकार इतनी जल्दी इन चीजों की मौत क्यों हो रही है?

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