प्रदेश के अस्तित्व में आने के बाद बढ़ गए 11 जिले
मध्यप्रदेश 1956 में देश में हुए राज्यों के पुनर्गठन के फलस्वरूप अस्तित्व में आया था। पुनर्गठन के पहले मध्यप्रदेश के घटक के रूप में मध्यप्रदेश, मध्यभारत, विंध्य प्रदेश एवं भोपाल थे, जिनकी अपनी विधान सभाएं थीं। पुनर्गठन के बाद इन सभी चारों विधानसभाओं को एक विधानसभा में परिवर्तित कर दिया गया। 1956 के बाद केवल एक विधानसभा मध्यप्रदेश विधानसभा के रूप में अस्तित्व में आई। 1 नवंबर, 1956 को पहली मध्यप्रदेश विधान सभा अस्तित्व में आई थी। इसके साथ ही प्रदेश की नई राजधानी भोपाल बना। इस वक्त प्रदेश में 43 जिले हुआ करते थे। 1972 में राजनांदगांव और भोपाल दो नए जिले बनाए गए। इसके साथ जिलों की संख्या बढ़कर 45 हो गई थी। इस वक्त छत्तीसगढ़ राज्य भी मध्यप्रदेश में ही समाहित था। इसके बाद लगातार प्रदेश में जिलों की संख्या बढ़ती गई। 1998 के आते-आते प्रदेश में जिलों की संख्या बढ़कर 61 हो चुकी थी। इसके बाद साल 2000 में मध्यप्रदेश विभाजन के चलते पृथक छत्तीसगढ़ राज्य बना तो मध्यप्रदेश में जिलों की संख्या घटकर 45 रह गई थी। वहीं पृथक छत्तीसगढ़ राज्य में 16 जिले समाहित किए गए थे। इसके बाद चुनाव-दर-चुनाव मध्यप्रदेश में जिलों की संख्या फिर बढ़ती गई है।
2003 में बुरहानपुर, अनूपपुर और अशोकनगर तीन नए जिले बने। इनके साथ यह संख्या बढ़कर 48 हुई। 2008 में विधानसभा चुनाव के दौरान अलीराजपुर और सिंगरौली को नया जिला बनाया गया। साथ ही मध्यप्रदेश में जिलों की संख्या बढ़कर 50 हो गई। 2013 का चुनाव आया तो एक बार फिर जिलों की संख्या में वृद्धि हुई। इस साल केवल एक जिला आगर मालवा नया बनाया गया। इसके बाद 2018 में निवाड़ी जिला बनाया गया। इस तरह प्रदेश में जिलों की संख्या बढ़कर 52 हो गई थी। अब जबकि 2023 का विधानसभा चुनाव होना है, इसके पहले प्रदेश के मुखिया ने दो नए जिले बनाने की घोषणा कर दी है। इनमें विंध्य में मउगंज को जिला बनाने की घोषणा वे पहले कर चुके थे। अब हाल ही में मुख्यमंत्री ने मालवा अंचल में एक और नए जिले नागदा को जिला बनाए जाने की घोशणा की है। इन दो जिलों के बनते ही प्रदेश में जिलों की संख्या बढ़कर अब 54 हो जाएगी।
तीन स्थानों पर उठ रही नए जिले बनाए जाने की मांग
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा मउगंज और नागदा जिले बनाए जाने की घोषणा
के बाद एक बार फिर तीन नए जिलों के बनाए जाने की मांग उठाई जा रही है। ये मांगे भी लंबे समय से की जा रही है। इनमें विंध्य में मैहर, महाकौशल में छिंदवाड़ा जिले के पांढुर्ना और ग्वालियर-चंबल अंचल में गुना जिले के चाचौड़ा को जिला बनाने की मांग उठाई जा रही है। तीनों ही अंचलों में उठ रही मांग को देखते हुए यह माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री इनमें से कुछ को जिला बनाने की मांग को पूरा कर सकते हैं। खासकर छिंदवाड़ा से पृथक कर पाढुर्णा को जिला बनाया जा सकता है। इसके पीछे मूल कारण यह माना जा रहा है भाजपा इन दिनों छिंदवाड़ा संसदीय सीट पर ज्यादा फोकस किए हुए है। अगर पांढुर्णा को जिला बनाया गया तो इसका फायदा विधानसभा के साथ-साथ 2024 के लोकसभा चुनाव में भी उठाया जा सकता है।

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें