पूर्व मंत्री ने कहा 90 करोड़ की परियोजना में लगे कीड़े
भोपाल। मध्यप्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में लगातार हो रही चीतों की मौत को लेकर सवाल उठ रहे हैं, साथ ही सियासत भी तेज हो गई है। मध्यप्रदेश के लेकर देशभर में सरकार की इस महत्वपूर्ण योजना को लेकर सवाल उठ रहे हैं। वहीं अब मध्यप्रदेश के पूर्व वन मंत्री रहे उमंग सिंघार ने सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार की 90 करोड़ की इस परियोजना पर कीड़े लग गए है। सरकार केवल सरकारी खजाना लुटाकर अपने शौक क्यों पूरा कर रही है?
मध्यप्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में एक के बाद एक लगातार पांच चीतों और तीन ष्शावकों की मौत हो गई। इसके बाद तीन और चीतों के गले में घाव दिखाई दिया। इसके बाद जांच की तो पचा चला ि कइस घाव पर कीड़े लग रहे हैं। इसके बाद उपचार किया जा रहा है। वहीं दक्षिण अफ्रीका से विशेशज्ञ भी आकर इलाज कर रहे हैं। चीतों की मौत ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। इस पर अब सियासत भी तेज हो चली है। लगातार मौत होने के बाद मध्यप्रदेश में मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस सरकार पर हमलावर है। वहीं आज कांग्रेस नेता और पूर्व वन मंत्री उमंग सिंघार ने इस मुद्दे पर सरकार को घेरा है। पूर्व वन मंत्री ने आज बयान जारी किया कि देश में 70 साल के बाद चीता परियोजना का क्रियांवयन हुआ, लेकिन 90 करोड़ के इस प्रोजेक्ट में बड़ी लापरवाही के बाद अब मुख्यमंत्री से लेकर प्रधानमंत्री के स्तर तक बैठक लेकर परियोजना को मॉनिटर करना पड़ रहा है। लापरवाही कहां हुई और चीतों में कीड़े कैसे लगे यह जांच का विषय है। सिंगार ने सरकार और वन विभाग पर सवाल उठाते हुए कहा कि 90 करोड़ की परियोजना में कीड़े लग गए है। सिंगार ने कहा अगर सरकार किसी योजना को क्रियांवित करने में सक्षम नहीं तो सरकारी खजाना लुटा कर अपना शौक क्यों पूरा कर रही है।
गौरतलब है कि 17 सितंबर 2022 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने जन्मदिन पर नामीबिया से आए 8 चीतों को कूनो नेशनल पार्क में छोड़ा था। इसके बाद 18 फरवरी 2023 को साउथ अफ्रीका से 12 और चीतों को कूनो में छोड़ा गया था। यानी कुल 20 चीते लाए गए थे। यहां मादा चीता ने 4 शावकों को जन्म दिया था। कुल 24 चीतों में से 8 की मौत हो गई। अब कूनो में 16 चीते मौजूद हैं। कूनो नेशनल पार्क में पिछले चार महीने में आठ चीतों की मौत हो चुकी है। इसमें पांच चीते और तीन शावक शामिल है। अब कूनो नेशनल पार्क में 15 चीते और एक शावक बचा है। इससे पहले केंद्रीय वन मंत्री भूपेंद्र यादव ने चीते की मौत पर कहा था कि इंटरनेशनल विशेषज्ञों की टीम कूनो में जांच करेंगी। चीतों को कूनो से दूसरी जगह शिफ्ट नहीं किया जाएगा।
मुख्यमंत्री जता चुके हैं चिंता
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि चीता पुनर्वास प्रोजेक्ट में कूनो राष्ट्रीय उद्यान में लाए गए चीतों में से कुछ चीतों की मृत्यु, चिंता का विषय है। उनके स्वास्थ्य और देखभाल के लिए केन्द्र सरकार द्वारा गठित चीता टास्क फोर्स को राज्य शासन की ओर से हरसंभव सहयोग प्रदान किया जाए। क्षेत्र में पर्याप्त वन्य-प्राणी चिकित्सकों सहित सभी आवश्यक दवाओं और उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। साथ ही चीतों की स्थिति की नियमित समीक्षा की व्यवस्था हो। आवश्यकता होने पर फॉरेस्ट गार्ड की संख्या और पुनर्वास प्रोजेक्ट के लिए उपलब्ध क्षेत्र में वृद्धि की जाए।
विशेषज्ञ का क्या है मानना
राज्य वन्य प्राणी सलाहकार बोर्ड के सदस्य रह चुके देश के वन्यजीव विशेषज्ञ वाल्मीकि थापर का कहना है कि मैं चीता प्रोजेक्ट का शुरू में ही विरोध करता रहा हूं पर मेरी सुनी नहीं गई। उन्होंने बताया कि दक्षिण अफ्रीका और नामीबिया में बड़े-बड़े घास के मैदान हैं, जोकि कूनो में नहीं है। थापर का कहना यह भी था कि कूनो में पथरीले और ऊपर-नीचे टीले हैं। उनका दावा है कि पथरीली और पत्थरों के टीले की वजह से एक चीता के पैर फैक्चर हो गया है. इस घटना को भी छिपाया जा रहा है। चीता के लिए रेडियो कॉलर भी बड़ी समस्या बनी हुई है। ओबान नाम के चीते के गर्दन में कॉलर आईडी के कारण इंजर्ड है। मेरी जानकारी के अनुसार 2 फीमेल चीता भी इसकी चपेट में आ गई हैं। थापर का सुझाव है कि विश्व भर के एक्सपर्ट के साथ बैठकर चीता प्रोजेक्ट पर रिव्यू किए जाने की आवश्यकता है।

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें