सभी ने कहा 230 सीटों पर उतारेंगे प्रत्याशी
भोपाल। मध्यप्रदेश में जैसे-जैसे विधानसभा चुनाव नजदीक आते जा रहे हैं, वैसे-वैसे छोटे दलों के तेवर भी तीखे नजर आ रहे हैं। भाजपा और कांग्रेस दोनों प्रदेश में सरकार बनाने के लिए एड़ी से चोटी तक का जोर लगा रहे हैं, तो सपा, बसपा और आम आदमी पार्टी इनके लिए मुसीबत भी खड़ी करते नजर आ रहे है। खासकर कांग्रेस के लिए ये दल ज्यादा परेशानी खड़ी करने वाले साबित हो सकते हैं।
मध्यप्रदेश में अब तक ष्शांत रहकर काम कर रही समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी और आम आदमी पार्टी के नेताओं ने अब तीखे तेवर अपनाने ष्शुरू कर दिए हैं। तीनों ही दलों ने साफ कर दिया है कि मध्यप्रदेश में वे इस बार बिना किसी दल के सहारे अपने दम पर सभी 230 सीटों पर चुनाव लड़ेंगे। सपा ने प्रदेश में पिछला चुनाव गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के साथ गठबंधन करके लड़ा था, मगर यह गठबंधन प्रभावशाली नजर नहीं आया। इस बार सपा अपने दम पर प्रत्याशी मैदान में उतारने की तैयारी कर चुकी है। सपा के राश्टीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी साफ कर दिया है कि मध्य प्रदेश सपा का दूसरा सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाला राज्य रहा है। वह इस साल के अंत में होने वाले चुनावों की तैयारी कर रही है। अखिलेश ने कहा कि 2003 में, हमने मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में सात सीटें जीती थीं और इस बार हम उस नतीजे से आगे निकल जाएंगे। अगर हम एकता और समन्वय के साथ चुनाव लड़ते हैं, तो हमें चुनाव में वांछित परिणाम मिलेंगे। गौरतलब है कि सपा ने प्रदेश में 1998 में चार विधानसभा सीटें, 2003 में सात, 2008 और 2018 में एक-एक सीट जीती थीं। इस बार सपा अकेले अपने दम पर चुनाव मैदान में उतरने की तैयारी कर रही है।
दूसरी और आम आदमी पार्टी ने भी साफ कर दिया है कि पार्टी मध्यप्रदेश की सभी सीटों पर प्रत्याशी मैदान में उतारेगी। आप का संगठन भी अब प्रदेश में सक्रियता बढ़ा रहा है। आम आदमी पार्टी के मध्यप्रदेश प्रभार बीएस जून ने भी साफ कर दिया है कि प्रदेश में पार्टी किसी दल से गठबंधन नहीं करेगी। सभी 230 सीटों पर प्रत्याशी मैदान में उतारेगी।
समर्थन नहीं करेंगे, बल्कि हिस्सेदारी भी लेंगे
बसपा प्रमुख मायावती ने आज दिल्ली में मध्यप्रदेश के पदाधिकारियों के साथ बैठक की। इस बैठक में बसपा के प्रदेश प्रभारी रामजी गौतम, प्रदेश अध्यक्ष रमाकांत पिप्पल सहित अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे। मायावती ने बैठक में साफ कर दिया कि पार्टी सभी सीटों पर चुनाव लड़ेगी। वहीं उन्होंने यह बात भी स्पश्ट कर दी कि इस बार पार्टी किसी दल को सरकार बनाने का समर्थन इसी बात पर देगी कि उसकी हिस्सेदारी सरकार में हो। यानि पार्टी के विधायक केवल सरकार को समर्थन नहीं करेंगे, बल्कि सरकार में हिस्सेदारी भी लेंगे। अगर ऐसा होता है तो बसपा पहली बार मध्य प्रदेश में सत्ता सुख हासिल कर सकती है।
कांग्रेस के लिए मुसीबत बढ़ा रहे तीनों दल
प्रदेश में कांग्रेस जहां एक बार फिर सरकार बनाने की तैयारियां में जुटी है, वहीं तीनां दलों सपा, बसपा और आम आदमी पार्टी ने उसके लिए मुसीबत बढ़ा दी है। ये तीनों दल कांग्रेस के परिणाम पर खासा असर डालेंगे। पूर्व में भी यह बात सामने आई है कि इन दलों के कारण ही कांग्रेस को ज्यादा नुकसान हुआ है। इन दलों के अलावा आदिवासी वर्ग के मतदाताओं के बीच गोंडवाना गणतंत्र पार्टी और जयस के प्रभाव के चलते भी कांग्रेस का मत विभाजन होता रहा है। अगर ऐसा हुआ तो इस बार फिर कांग्रेस के लिए बड़ी ये दल बड़ी चुनौती खड़ी कर सकते हैं।


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