सोमवार, 17 जुलाई 2023

चीतों की मौत, हटाए गए पीसीसीएफ वाइल्ड लाइफ

भोपाल। कूनो अभयारण्य में लगातार हो रही चीतों की मौत के बाद वन विभाग में हड़कंप मचा हुआ है। मौतों का कारण जो भी हो, मगर चीतों की मौत के चलते प्रधान मुख्य वन संरक्षक वाइल्ड लाइफ जसबीर सिंह को हटा दिया गया है। उनके स्थान पर अब वन विभाग ने असीम श्रीवास्तव की पदस्थापना इस पद पर की है। 

कूनो नेशनल पार्क में एक के बाद एक आठ चीतों की मौत ने सवाल खड़े कर दिए हैं। इसके चलते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट कहे जाने वाले चीता प्रोजेक्ट को लेकर प्रदेश सरकार की छवि पर भी असर हो रहा है, उसके बाद से प्रदेश सरकार भी प्रधान मुख्य वन संरक्षक वाइल्ड लाइफ के काम-काज से संतुष्ट नहीं थी। कूनो में जिस तरह 8 चीतों की मौत हुई है, उससे चौहान के प्रबंधन की क्षमता पर भी सवाल खड़े होने लगे थे। इसके साथ ही चीतों की मौत के बाद नेशनल टाइगर कन्जर्वेशन अथॉरिटी (एनटीसीए) औऱ वाइल्ड लाइफ एक्सपर्ट्स ने भी चिंता जताई थी। 

चीतों की मौत को लेकर अब वन विभाग ने कड़ा कदम उठाया है। आज प्रधान मुख्य वन संरक्षक (पीसीसीएफ) वाइल्ड लाइफ जसबीर सिंह चौहान को पद से हटा दिया है। उनके स्थान पर उनसे एक बैच जूनियर असीम श्रीवास्तव को इस अहम पद पर पदस्थ किया गया है। जसबीर को अब पीसीसीएफ उत्पादन की जिम्मेदारी सौंपी गई है, जिसे अब तक असीम संभाल रहे थे। जसबीर सिंह चौहान 1987 बैच के आईएफएस अधिकारी हैं, जबकि असीम 1988 बैच के हैं।  गौरतलब है कि वन्य बल प्रमुख (हॉफ) के बाद पीसीसीएफ वाइल्ड लाइफ को वन विभाग का दूसरा सबसे महत्वपूर्ण पद माना जाता है।

प्रधानमंत्री ने बाड़े में छोड़े थे चीते

गौरतलब है कि पिछले साल 17 सितंबर 2022 को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की मौजूदगी में एक भव्य कार्यक्रम में पांच मादा और तीन नर सहित आठ नामीबियाई चीतों को केएनपी के बाड़ों में छोड़ा गया था, इस साल फरवरी में दक्षिण अफ्रीका से 12 और चीते केएनपी पहुंचे थे। चार शावकों के जन्म के बाद चीतों की कुल संख्या 24 हो गई थी लेकिन आठ मौतों के बाद यह संख्या घटकर अब 16 रह गई है।  धरती पर सबसे तेज दौड़ने वाले इस वन्यजीव को 1952 में देश में विलुप्त घोषित कर दिया गया था। 


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