गुरुवार, 20 जुलाई 2023

कवि, साहित्यकारों की मदद लेगी भाजपा

मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव में सामाजिक संगठन और एनजीओ भी होंगे सक्रिय


मध्यप्रदेश में होने वा
ले विधानसभा चुनाव के पहले भाजपा हर उस कमजोरी को दूर करना चाह रही है, जो उसे स्पष्ट बहुमत से दूर ले जा सकती है। भाजपा ने हर वर्ग को साधने को कोशिशें तेज कर दी है, मगर राष्ट्रवाद के मुद्दे को वह फिर से एक बार इस चुनाव में भुनाने की तैयारी कर रही है। इसके लिए पार्टी ने साहित्यकारों, कवियों की मदद लेने की भी तैयारी की है। भाजपा ने विधानसभा में की आंकाक्षी सीटों पर इनके सहारे राष्ट्रवाद की अलग जगाने की रणनीति पर काम करना शुरू किया है। 

मध्यप्रदेश में कुछ ही माह बाद विधानसभा के चुनाव होने हैं। भाजपा संगठन और सरकार दोनों ही ने इस मामले में सक्रियता बढ़ा दी है। संगठन में लगातार बैठकें हो रही है। दिल्ली के नेताओं के दौरे भी तेज हो चले हैं। भाजपा संगठन का पूरा फोकस इस बार चुनाव में 51 फीसदी वोट पाते हुए दो पार के नारे पर जीत हासिल करने पर है। इसके लिए सरकार और संगठन पूरी तरह से मैदान में उतर चुका है। भाजपा की लगातार चल रही बैठकों में अब चुनावी रणनीति भी तेजी से बनाई जा रही हैं। इन रणनीतियों के तहत भाजपा ने फिर से प्रदेश में होने वाले चुनाव में राष्ट्रवाद की अलख को जगाने का फैसला लिया है। इस बार भाजपा राष्ट्रवाद को जगाने के लिए कार्यकर्ताओं और संघ के बजाय यह काम कवियों और साहित्यकारों को सौंपने जा रही है। बताया जा  रहा है कि भाजपा से जुड़े और हिन्दुत्व और देशभक्ति से ओत-प्रोत कवियां की सूची तैयारी की जा रही है। इस सूची के आधार पर भाजपा पर्दे के पीछे रहते हुए कवि सम्मेलनों का आयोजन करने जा रही है। कवि सम्मेलनों के आयोजन का कार्य भाजपा सामाजिक संगठनों और एनजीओ को सौंपेगी। आयोजनों के लिए इन संगठनों को ह रवह चीज उपलब्ध कराई जाएगी जिसकी उन्हें जरूरत होगी। भाजपा संगठन इन आयोजनों में पर्दे के पीछे रहकर जनता के बीच राष्ट्रवाद की अलख जगाना चाह रहा है। 

आकांक्षी सीटों पर फोकस

भाजपा द्वारा पूर्व में लगातार हार और कमजोर सीटों को लेकर मंथन किया गया था। इसके बाद इन सीटों को आंकाक्षी सीट मानकारी जीत की रणनीति तय की थी। इन 103 आकांक्षी 
 सीटों पर भाजपा राष्ट्रवाद की अलख जगाकर चुनाव मैदान में उतरना चाह रही है। इन सीटों पर सामाजिक संगठनों को भी सक्रिय किया जाए। भाजपा ने इसके लिए सामाजिक संस्थाओं की जानकारी भी हर विधानसभा सीट से संग्रहित करने की तैयारी की है। सामाजिक संस्थाओं और संगठनों के द्वारा भाजपा समाज के लोगों को जोड़ने का काम करेगी। 

अनुभवी नेताओं की होगी पूछपरख

भाजपा ने तय किया है कि नाराज कार्यकर्ताओं को मनाने के लिए वह पहले अनुभवी नेताओं को मनाकर उन्हें चुनाव की जिम्मेदारी सौंपेंगी। भाजपा को यह जानकारी है कि इस बार कार्यकर्ता और नाराज चल रहे नेताओं को नाराजगी को चुनाव के पहले दूर करना जरूरी है। इस नाराजगी को दूर करने के लिए संगठन ने यह तय किया है कि अनुभवी और पुराने नेताओं को जिम्मेदारी सौंपकर मैदान में उतारा जाए। माना जा रहा है कि पार्टी क राष्ट्रीय अध्यक्ष जे पी नड्डा और केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह के भोपाल दौरे के बाद पार्टी इस रणनीति पर काम कर अनुभवी नेताओं को जिम्मेदारी सौंपना शुरू करेगी। 


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