चुनाव समितियों में कई दिग्गजों के कट गए नाम
मध्यप्रदेश में विधानसभा चुनाव को लेकर भाजपा का प्रयास यह था कि चुनाव के पहले नाराज नेताओं की नाराजगी को दूर कर दिया जाए। मगर भाजपा ने चुनाव के लिए घोषित की समितियों में कई नेताओं से एक बार फिर दूरी बना ली। इनमें पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती, वरिष्ठ नेता रघुनंदन शर्मा , विक्रम वर्मा जैसे दिग्गजों के नाम भी शामिल है। इसके अलावा लोकसभा की अध्यक्ष रही सुमित्रा महाजन ताई से भी भाजपा ने दूरी सी बना ली है।
मध्यप्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव में भाजपा को अपने नेताओं की नाराजगी के चलते ज्यादा मुसीबतों का सामना करना पड़ रहा है। इसे देखते हुए केन्द्रीय मंत्री अमित शाह जिनके हाथों में मध्यप्रदेश में भाजपा की चुनावी कमान है, उन्होंने साफ कहा था कि नाराज नेताओं की नाराजगी को अनदेखा नहीं किया जाए। उसके बाद यह लग रहा था कि संगठन प्रदेश में चुनाव के लिए बनाई जाने वाली समितियों में नाराज नेताओं को शामिल करके बहुत कुछ हद तक रूठों को मना लेगा। मगर ष्शनिवार की रात को जब समितियों की घोषणा हुई तो कई नेताओं के नाम सूची में नजर नहीं आए। हालांकि कुछ नाराज नेताओं को समितियों में शामिल किया गया, मगर उनकी संख्या न के बराबर है। अब माना जा रहा है कि भाजपा के लिए ये नेता एक बार फिर परेशानी बढ़ा सकते हैं।
इन नेताओं से बनाई दूरी
भाजपा ने चुनाव के लिए जो समितियां बनाई है उनमें पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती, लोकसभा की पूर्व अध्यक्ष रही सुमित्रा महाजन ताई, इंदौर के ही वरिष्ठ नेता सत्यनारायण संतन, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सत्यनारायण जटिया, वरिष्ठ नेता रघुनंदन शर्मा, पूर्व मंत्री अनूप मिश्रा, पूर्व मंत्री गोपाल भार्गव, पूर्व मंत्री कुसुम महदेले, वरिष्ठ नेता विक्रम वर्मा, कृश्ण मुरानी मोघे, पूर्व मंत्री जयभान सिंह पवैया, केन्द्रीय मंत्री वीरेन्द्र खटीक, पूर्व मंत्री चंद्रभान सिंह आदि है। इन नेताओं की संगठन ने एक बार फिर किनारे कर दिया है। इन नेताओं के अलावा भाजपा ने कई पूर्व विधायकां से भी समितियों में स्थान देने से दूरी बनाई है। इसके चलते इन पूर्व विधायकों की नाराजगी फिर सामने आ सकती है। कहा तो यह जा रहा था कि भाजपा समितियों में नाराज नेताओं को ष्शामिल कर उनकी नाराजगी को दूर कर चुनाव के पहले कार्यकर्ताओं को संगठित करने का काम करेगी। केन्द्र से आए मंत्रियों ने भी बार-बार इसी बात के संकेत दिए थे, मगर जब समितियों का गठन हुआ तो यह सब नजर नहीं आया।
सिंधिया समर्थकों की भी संख्या कम
चुनाव के लिए बनाई गई समितियों में केन्द्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के समर्थकों की संख्या भी कम ही नजर आ रही है। सिंधिया समर्थक दो मंत्रियों को तो चुनाव प्रबंधन समिति में स्थान मिला है, मगर उनके अन्य समर्थक नेताओं से पार्टी ने दूरी सी बनाई है। इसके चलते अब पार्टी में सिंधिया के साथ आए कई नेता अपने को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं। सिंधिया समर्थकों को लेकर पहले से ही यह माना जा रहा था कि चुनाव को लेकर इन पर भाजपा संगठन पूरी तरह से भरोसा नहीं कर पाएगा। सूचियों के जारी होने के बाद यह बात सामने भी आई है। इसके पीछे कारण यह भी बताया जा रहा है कि सिंधिया समर्थकों को लेकर प्रदेश के हर अंचल में खासकर ग्वालियर-चंबल अंचल में भाजपा के कार्यकर्ता और वरिष्ठ नेताओं में खासी नाराजगी को देखते हुए संगठन ने यह कदम उठाया है।

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