इस्तीफा नहीं हुआ मंजूर, कर रही चुनाव लड़ने की तैयारी
मध्यप्रदेश के छतरपुर जिले में डिप्टी कलेक्टर पद पर पदस्थ रही निशा बांगरे ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। सरकार ने अब तक इस्तीफा को लेकर कोई फैसला नहीं लिया है, बल्कि उन्हें नोटिस और आरोप पत्रों में उलझा दिया है। यहां तक की निशा बांगरे को जून माह का वेतन तक नहीं दिया है। साथ ही राजधानी भोपाल स्थित उनके सरकारी आवास का किराया पेनल्टी सहित वसूले जाने को लेकर उन्हें नोटिस दिया गया है।
मध्यप्रदेश में आईएएस निशा बांगरे और सरकार के बीच तल्खीयां बढ़ती नजर आ रही है। वैसे वे इस्तीफा देने के बाद से पूरी तरह से मैदान में उतर गई है। प्रदेश के बैतूल जिले के आमला विधानसभा क्षेत्र में वे इन दिनों सामाजिक क्षेत्र में सक्रिय हैं। उनकी यह सक्रियता विधानसभा चुनाव लड़ने को लेकर मानी जा रही है। हाल ही में उन्होंने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ से भी भोपाल स्थित उनके आवास पर मुलाकात की है। इस मुलाकात के बाद यह करीब-करीब तय माना जा रहा है कि निशा बांगरे को कांग्रेस मैदान में उतार सकती है। हालांकि न तो कांग्रेस की ओर से और न ही निशा बांगरे की ओर से इसे लेकर अधिकृत बयान आया है। बयान न आने के पीछे मूल वजह यह भी है कि अब सरकार ने निशा बांगरे को इस्तीफा मंजूर नहीं किया है। माना जा रहा है कि सरकार उन्हें इस मामले को लेकर उलझा कर रख सकती है।
सिर्फ मिल रहे नोटिस, अधिकारी नहीं कर रहे संपर्क
निशा बांगरे ने जब से इस्तीफा दिया है, उसके बाद से किसी अधिकारी से उन्होंने संपर्क नहीं किया और न ही सरकार की ओर से उन्हें किसी अधिकारी ने बातचीत के लिए बुलाया है। इसके अलावा उन्हें कभी नोटिस मिलता है तो कभी आरोप पत्र, वे भी इनका जवाब दे देती है। खुद निशा बांगरे ने भी इस मामले में वरिष्ठ अधिकारियों से बातचीत नहीं की है और न ही वे ऐसा करना चाहती है। बांगरे ने पूरी तरह से सरकारी सेवा से हटने का मन बना लिया है। साथ ही वे अभी इस बात का भी खुलासा नहीं कर रही है कि उनका अगला कदम राजनीतिक होगा। वे चुनाव लड़ेंगी या नहीं। फिलहाल वे इस्तीफा मंजूर होने का इंतजार कर रही हैं।
नहीं मिला जून माह का वेतन
निशा बांगरे खुद इस बात को कह चुकी है कि उन्होंने इस्तीफा दिया उसके बाद शासन ने भोपाल स्थित सरकारी आवास का किराया वसूली का नोटिस भेज दिया। नवंबर 2022 से जून 2023 तक का 9000 रुपए प्रतिमाह पेनल्टी सहित किराया मांगा जा रहा है, जबकि आवास का किराया उनके वेतन से हर माह 900 रुपए मकान किराए के नाम पर काटा गया है। शासन ने अब तक उन्हें जून माह का वेतन भी नहीं दिया। यह वेतन भी रोक दिया है, जो कि अब तक नहीं मिला है। निशा बांगरे का नवंबर 2022 में मेरा तबादला भोपाल से किया गया था और वहां अप्रैल 2022 में उन्हें सरकारी मकान मिला। इस वजह से मैंने भोपाल का मकान खाली नहीं किया। इसके बावजूद भी शासन आवास किराया जुर्माना सहित वसूल करने का नोटिस दे रहा है।
वर्रिश्ठ पुलिस अधिकारी को भी नहीं दिया वीआरएस
लंबे समय से अपने को उपेक्षित मान रहे वरिष्ठ पुलिस अधिकारी पुरूषोत्तम शर्मा ने भी सरकार को आवेदन देकर वीआरएस देने की मांग की थी। वे लंबे समय से उन्हें कार्य आवंटन नहीं किए जाने से परेशान है। बताया जा रहा है कि शर्मा ने भी कांग्रेस की ओर से हरी झंडी मिलने पर चुनाव मैदान में उतरने का फैसला कर लिया था। इस बात की जानकारी सरकार तक पहुंच गई थी। परिणाम यह हुआ कि ष्शर्मा को वीआरएस देने से सरकार ने मना कर दिया। गृह विभाग ने इसके आदेश भी जारी कर दिए।

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