प्रदेश भाजपा अध्यक्ष ने नेता पुत्रों नहीं, जीतने वाले को मिलेगा टिकट
भोपाल। मध्यप्रदेश भाजपा में एक बार फिर परिवारवाद को लेकर सियासत गर्माती नजर आ रही है। इसे लेकर आज भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष वी डी शर्मा ने साफ कर दिया कि भाजपा में नेता पुत्रों को नहीं, बल्कि जीतने वाले को टिकट दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि परिवारवाद की गारंटी कांग्रेस में मिलती है, भाजपा में नहीं।
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष वी डी शर्मा ने आज मीडिया से चर्चा करते हुए कहा कि भाजपा में प्रत्याशी चयन का एक तरीका है, उसी के अनुरूप टिकट वितरण होता है। कांग्रेस और भाजपा में यही अंतर है। उन्होंने साफ संकेत दिए कि भाजपा में परिवारवाद के तहत नेता पुत्रों को टिकट नहीं दिया जाएगा, बल्कि जीतने वाले दावेदार को टिकट दिया जाएगा। भाजपा में अगर कोई यह सोच कर चल रहा है तो उसे समझना चाहिए कि पार्टी में परिवारवाद के आधार पर टिकट नहीं मिलेगा। कांग्रेस में यह सब चलता है, भाजपा में नहीं चलता। उन्होंने कहा कि कांग्रेस में होती है परिवारवाद की गारंटी, भाजपा में इस तरह की कोई गारंटी नहीं है। उन्होंने कहा कि कमलनाथ और दिग्विजय दोनों परिवारवाद की गारंटी हैं। मध्यप्रदेश का बंटाधार करने वाले दिग्विजय सिंह और वल्लभ भवन को दलालों का अड्डा बनाने वाले कमलनाथ का इतिहास मध्यप्रदेश की जनता अच्छे से जानती है।
उन्होंने कहा कि 15 महीने की सरकार में कमलनाथ ने मध्य प्रदेश की आम जनता के साथ धोखा छल किया। आज कमलनाथ कृषि न्याय योजना की बात कर रहे हैं। मैं गंभीरता के साथ पूछना चाहता हूँ, जो वादे अपने 2018 से पहले किए थे वो कौन से पूरे हुए। कमलनाथ और दिग्विजय सिंह दोनों ही चलती फिरती झूठ की मशीन है।
सिफारिश नहीं चलेगी
मध्यप्रदेश में चुनाव की कमान सीधे तौर पर गृह मंत्री अमित शाह के पास है। उन्होंने प्रदेश में अपनी टीम को सक्रिय भी कर दिया है। शाह की टीम की ओर से चुनावी दावेदारों को साफ संकेत दिए गए हैं कि सिफारिश से कोई टिकट नहीं मिलेगा। सभी विधानसभा सीटों पर क्षेत्रीय नेताओं के परफार्मेंस के आधार पर टिकट का वितरण होगा और इसके लिए पार्टी प्रदेश में पूर्व मंत्रियों और विधायकों के अलावा नए चेहरों के कामों पर भी रिपोर्ट तैयार करा रही है।
असंतुष्टों का मनाना पहला काम
चुनावी कमान संभालने के बाद मध्यप्रदेश में असंतुष्टों और नाराज नेताओं को समझाईश देकर पार्टी लाइन में वापस लाना शाह ने अपनी पहली चुनौती तय की है। इसलिए इसकी रणनीति के साथ इस पर एक्शन भी शुरू हो चुका है। शाह पार्टी की शीर्ष बैठक में यह संदेश भी दे चुके हैं कि जब स्थानीय नेता एकजुट होकर लड़ेंगे तो ही जीतेंगे और जीतेंगे तभी पद और सम्मान पाएंगे। यह संदेश नाराज नेताओं के बीच पहुंचना है कि आपस में लड़ने की बजाए जीत के लिए लड़ें। वरिष्ठ नेताओं को जमीन पर उतरकर कार्यकर्ताओं की नाराजगी दूर करने पर लगाया जाएगा। संगठन का काम चुनाव जीतना होता है। कोई भी नेता खुद को बड़ा न माने और कार्यकर्ता से डिस्कनेक्ट न हो, यह ध्यान रखना होगा।

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