गुरुवार, 27 जुलाई 2023

मध्यप्रदेश में नए चेहरों पर दांव खेल सकती है भाजपा

भोपाल। मध्यप्रदेश में होने वाले विधानसभा के चुनाव में भाजपा के सामने सबसे बड़ी चिंता इस बार प्रत्याशी चयन प्रक्रिया को लेकर है। वर्तमान विधायकों के विरोध और कांग्रेस के आए नेताओं की दावेदारी के चलते अपने नेताओं की नाराजगी भाजपा के लिए संकट खड़ा कर रही है। भाजपा इससे निपटने के लिए नई तैयारी के साथ मैदान में उतरना चाह रही है। नगरीय निकाय चुनाव में भाजपा ने जिस तरह से टिकट वितरण का नए चेहरों पर दांव खेला था, ठीक उसी तर्ज पर भाजपा इस बार भी प्रत्याशी चयन को लेकर फैसले ले सकते है। 

मध्यप्रदेश का विधानसभा चुनाव में भाजपा जीत के लिए पूरी ताकत के साथ मैदान में उतरने की रणनीति बना चुकी है। चुनावी की कमान पूरी तरह से केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह
 ने अपने पास रही है। जबकि चुनाव का प्रभार भी उन्होंने अपने विश्वसीय केन्द्रीय मंत्रियों को सौंपा है। भाजपा में मध्यप्रदेश के चुनाव की कमान को पूरी तरह से दिल्ली के नेता ही संभाले हुए हैं और उन्हीं की रणनीति पर ही भाजपा इस बार चुनाव मैदान में उतरने की तैयारी भी कर रही है। इसके चलते केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह लगातार प्रदेश का दौरा कर रहे हैं। इसी माह जुलाई में वे दो दौरे राजधानी भोपाल के कर चुके हैं। दोनों ही बार उन्होंने प्रदेश की कोर कमेटी के नेताओं के साथ बैठक की है। इस बैठक में उनका पूरा फोकस चुनाव में जीत को लेकर है। वे हर कमजोरी को चुनाव के पहले दूर करने की कवायद कर रहे हैं। 

रूठों को मनाने की रणनीति 

भाजपा में इस बार सबसे ज्यादा चिंता अपने नाराज नेताओ की है। हर अंचल में भाजपा के लिए नाराज चल रहे नेता परेशानी खड़ी कर रहे हैं। नाराज इन नेताओं को लेकर अमित ष्शाह सहित दिल्ली के पदाधिकारी भी चिंतित है। खुद अमित ष्शाह भी यह मान चुके हैं कि अगर इन नेताओं को नहीं मनाया तो कार्यकर्ता एकजुट नहीं होंगे। इस कार्य में सफलता मिल गई तो एकजुटता के साथ मिलकर जीत हासिल की जा सकती है। यही वजह है कि उन्होंने प्रदेश के सभी बड़े नेताओं को जिम्मेदारी दी है कि वे सबसे पहले नाराज नेताओं को मनाएं और उन्हें संगठन में सक्रिय करें और चुनाव कार्य में जिम्मेदारी भी सौंपे। 

नए चेहरों पर दांव

भाजपा इस बार चुनाव में प्रत्याशी चयन को लेकर जिस तरह दावेदारों की संख्या बढ़ रही है, उसे लेकर िंचतित है। हर केई चुनाव लड़ने को लेकर उत्सुक है और दावेदारी भी कर रहा है। वहीं अधिकांश वर्तमान विधायकों को लेकर भी नाराजगी दिखाई दे रही है। इन सबसे से निपटने के लिए भी ष्शाह ने प्रदेश के वरिश्ठ नेताओं के साथ मंथन किया है। इस मंथन में फिलहाल कोई फैसला तो नहीं लिया, मगर संदेश यह दिया जा रहा है कि पार्टी इस बार सबसे पहले तो परिवारवाद से दूरी बनाएगा। याने नेता पुत्रों की दावेदारी को भाजपा खारिज कर सकती है। वहीं सर्वे को आधार रखते हुए जीतने वाले को टिकट दिया जाएगा। सूत्रों की माने तो पार्टी ने तय किया है ि कइस बार अधिक से अधिक नए चेहरों पर दाव खेला जाए। साथ ही कुछ वर्तमान सांसदों को भी चुनाव मैदान में उतारा जाए। इसके चलते पार्टी 2024 में लोकसभा चुनाव में कमजोर स्थिति वाले सांसदों के टिकट काटने में परेशानी का सामना न करना पड़ा। पार्टी एक तरह से लोकसभा और विधानसभा चुनाव में नए चेहरों पर दांव लगाना चाह रही है। नेताओं का मानना है कि इसके चलते कांग्रेस से भाजपा में आए सिंधिया समर्थकों को लेकर संगठन में बढ़ी नाराजगी को भी दूर किया जा सकता है साथ ही कार्यकर्ता फिर से एकजुट होकर मैदान में उतर सकता है। 


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