बुधवार, 12 जुलाई 2023

मध्यप्रदेश में बदलाव के कयासों पर विराम लगा गए शाह


मध्यप्रदेश में केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह का अचानक दौरा हुआ। राजधानी में बड़े नेताओं के साथ करीब चार घंटे की बैठक ली। बैठक के बाद प्रदेश संगठन में बदलाव के लगाए जा रहे कयासों पर एक तरह से विराम लग गया। शाह ने तो कुछ कहा नहीं, मगर संकेत ऐसे ही हैं कि चुनावी साल को देखते हुए भाजपा में फिलहाल बदलाव को टाला जाए। 

मध्यप्रदेश में अचानक आदिवासियों पर घटित हो रही घटनाएं और प्रदेश भाजपा में नेताओं के बीच बढ़ती दूरियां को लेकर भाजपा का केन्द्रीय नेतृत्व चिंतित हो गया है। चुनाव में वक्त कम है और नेताओं के बीच की दूरियां बढ़ रही है। यह केन्द्रीय नेताओं को समझ आ गया। यही वजह थी कि आनन-फानन में गृह मंत्री अमित शाह ने मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल का अचानक दौरा किया और बैठक कर सभी को संदेश दे गए कि एकजुट रहें और मैदानी सक्रियता बढ़ाएं। शाह के इस दौरे से यह भी साफ हो गया कि अब उन्होंने प्रदेश की कमान खुद अपने हाथ ली है। कर्नाटक में मिली हार के बाद शाह वैसे भी चिंतित थे, मगर उन्हें प्रदेश के संगठन और सरकार के बीच अच्छे तालमेल के लिए चलते यह विश्वास था कि सब कुछ ठीक हो जाएगा, मगर ऐसा होता दिखा नहीं। यही वजह है कि अब चुनावी प्रबंधन में भी केन्द्र के नेताओं के हाथ में प्रदेश की बागडौर चली गई है। इसी के चलते हाल ही में भूपेन्द्र यादव को मध्यप्रदेश के चुनाव और उनके सहयोगी अश्विनी वैष्णव को प्रदेश की कामन सौंपी गई है। 

आदिवासी वर्ग पर ज्यादा ध्यान

सूत्रों की माने तो अमित शाह ने बैठक के दौरान कहा कि राज्य में आदिवासी समुदाय के बीच पूरी ताकत के साथ काम किया जाना चाहिए। साथ ही आदिवासी समुदाय के मामले सामने आने पर भी सवाल उठाया। बैठक के दौरान शाह ने कहा कि मध्यप्रदेश में आदिवासी वोट पर पूरी ताकत से काम किया जाना चाहिए। फीडबैक के मुताबिक आरक्षित 47 सीटों के साथ यह 80 से ज्यादा सीटों पर प्रभावी हैं। शाह ने बैठक बाद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से 10 मिनट अलग से बात की। यादव और वैष्णव भी इस दौरान थे। शाह ने पूछा कि आदिवासियों को लेकर मप्र में लगातार मामले क्यों सामने आ रहे हैं? यह ठीक नहीं है। शाह की बैठक में तालमेल और आक्रामकता की कमी, वर्कर की नाराजगी, नेताओं के अनबन और जमीन तक संगठन की जमावट जैसे मामलों पर चर्चा की बात सामने आई।

नेताओं को मिलेगी अलग-अलग जिम्मेदारी 


अमित शाह के बैठक के बाद अब इस बात के कयास लगाए जा रहे हैं कि प्रदेश के वरिष्ठ नेताओं को भी वे अलग-अलग जिम्मेदारी सौंपेंगे। इसके चलते अंचलवार जिम्मेदारी सौंपी जा सकती हे। माना जा रहा है कि मालवांचल में प्रभाव को ध्यान में रख केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया को विधानसभा चुनाव के लिए इस क्षेत्र की जिम्मेदारी दी जा सकती है। वहीं केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर को महाकौशल और बघेलखंड में सामंजस्य बैठाने की जिम्मेदारी दी जा सकती है।  ग्वालियर-चंबल अंचल में कैलाश विजयवर्गीय को और महाकौशल में आदिवासी फग्गन सिंह कुलस्ते को सक्रिय किया जा सकता है। राजधानी भोपाल में रहकर पूरे प्रदेश पर नजर रखने का काम प्रदेश प्रभारी मुरलीधर राव, चुनाव प्रभारी भूपेंद्र यादव, मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा को सौंपा जा सकता है। 

भूपेन्द्र, अश्विनी के चलेंगे निर्देश

शाह की इस बैठक में साफ हो गया है कि प्रदेश में विधासभा चुनाव को लेकर जो भी रणनीति होगी उसमें फैसले भूपेन्द्र यादव और अश्विनी वैष्णव के ही होंगे। प्रदेश संगठन को उनके मार्गदर्शन में काम करना होगा। एक तरह से चुनावी प्रबंधन की कमान अब प्रदेश से अलग होकर भाजपा के केन्द्रीय नेतृत्व ने अपने पास रख ली है। इससे कितना फायदा होगा यह तो समय बताएगा। अगर प्रदेश में भी केन्द्रीय नेतृत्व हावी रहता है और प्रदेश के नेताओं की उपेक्षा होती है तो इसका असर चुनाव परिणाम पर भी पढ़ सकता है।  


कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें