रविवार, 23 जुलाई 2023

मध्यप्रदेश में संविदा कर्मचारी हुए नाराज, नई सेवा नीति का किया विरोध

मुख्यमंत्री से करेंगे मुलाकात, घोषणा के अनुसार शर्तें लागू करने की करेंगे मांग

भोपाल। प्रदेश के संविदा कर्मचारियों ने शासन द्वारा जारी की नई सेवा नीति का विरोध शुरू कर दिया है। कर्मचारियों का कहना है कि मुख्यमंत्री की घोषणा के अनुसार सेवा शर्तें नहीं है। संविदा कर्मचारी इसे लेकर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से मुलाकात करेंगे और घोषणा के अनुरूप सेवा शर्तें लागू करने की मांग करेंगे। संविदा कर्मचारियों के समर्थन में कांग्रेस भी उतर आई है। कांग्रेस ने कहा कि सरकार ने कर्मचारियों के साथ धोखा किया है। 

सामान्य प्रशासन विभाग की तरफ से 32 विभागों में कार्यरत कर्मचारियों का अनुबंध की जगह नवीनीकरण किया जाएगा। सामान्य प्रशासन विभाग की तरफ से जारी सेवा शर्तों के अनुसार संविदा कर्मचारियों को नियमित पद के लिए निर्धारित अधिकतम आयुसीमा में छूट मिलेगी। यह छूट कर्मचारी को उसकी संविदा पद पर कार्यरत वर्ष के अनुसार दी जाएगी। आयु संबंध छूट 55 वर्ष से अधिक नहीं होगी। 1 अप्रैल 2018 से पहले नियुक्त संविदा कर्मचारी को नियमित पद के बराबर वेतन का निर्धारण 7वें वेतनमान के अंतर्ग संबंधित पे-मेट्रिक्स स्तर के न्यूनतम वेतन के बराकबर काल्पनिक आधार पर तय किया जाएगा।

कहा था अनुबंध समाप्त करने का, कर दिया नवीनीकरण

कर्मचारियों का कहना है इसमें सिर्फ नाम बदला है। यानी अनुबंध की तरह ही वार्षिक मूल्यांकन के आधार पर सेवा आगे बढ़ाएंगे। मध्य प्रदेश संविदा कर्मचारी अधिकारी महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष रमेश राठौर ने कहा कि जबकि मुख्यमंत्री ने अनुबंध समाप्त करने को कहा था, यहां पर सिर्फ नवीनीकरण कर दिया गया। अवकाश भी नियमित कर्मचारियों से आधे है। महंगाई भत्ता की जगह उपभोक्ता मूल्य सूचकांक देने का प्रावधान किया गया है। सीधी भर्ती में परीक्षा देना पड़ेगा। राठौर ने कहा कि वह इन मुद्दों पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से मिलकर उनकी घोषणा के अनुसार आदेश जारी करने की मांग करेंगे।

इन बिन्दुओं पर किया जा रहा विरोध

नियमित कर्मचारियों को 13 सीएल, 30 अर्जित अवकाश, 20 मेडिकल अवकाश, 3 एच्छिक अवकाश यानी 66 अवकाश मिलते है। जबकि संविदा कर्मचारियों को 13 सीएल, तीन एक्च्छिक, 15 विशेष अवकाश यानी 31 अवकाश दिए गए। जो नियमित कर्मचारियों से आधे भी नहीं है। 

संविदा कर्मचारियों को पद के न्यूनतम वेतन में महंगाई भत्ते की बजाए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक का प्रावधान किया गया है। नियमित कर्मचारियों का महंगाई भत्ता साल में दो बार बढ़ता है, लेकिन संविदा कर्मचारियों का साल में एक बार एक अप्रैल को बढ़ेगा। कई विभागों में संविदा कर्मचारियों को पहले से नियमित कर्मचारियों के समान महंगाई भत्ता मिल रहा है, लेकिन नई संविदा नीति में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक का प्रावधान किया गया है। 

सीधी भर्ती के 50 प्रतिशत पद संविदा कर्मचारियों के लिए आरक्षित होंगे। संविदा कर्मचारी पहले से ही व्यापम समेत अन्य विधिवत चयन परीक्षा देकर संविदा में भर्ती होकर 15 से 20 साल की नौकरी कर चुके है। उनको नए अभ्यार्थियों के साथ परीक्षा देनी होगी। सीधी भर्ती में 50 प्रतिशत आरक्षण होरिजेंटल रखा गया है। इसका मतलब यदि संविदा कर्मचारी क्वालीफाई नहीं कर पाए तो पद पर नए अभ्यार्थी की भर्ती की जाएगी।

कांग्रेस ने उठाए सवाल

संविदा कर्मचारियों को लेकर जारी की नई सेवा शर्तों पर कांग्रेस ने सवाल उठाए हैं। कांग्रेस नेता सैयद जफर ने कहा कि प्रदेश सरकार ने एक बार फिर संविदा कर्मचारियों को धोखा दिया है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह द्वारा की गई घोषणा संविदा कर्मचारियों को परमानेंट करने की मांग आज भी अधूरी है। कर्मचारी शिवराज सरकार में अब हमेशा संविदा पर ही परमानेंट रहेगा। अधिकारियों को कभी भी संविदा कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त करने के अधिकार आज भी बरकरार है।  कांग्रेस नेता सैयद जफर ने कहा कि संविदा कर्मचारी का भविष्य सुरक्षित कैसे होगा। 2018 में बनाई गई संविदा नीति के तहत संविदा कर्मचारियों को नियमित पद के समकक्ष 90 प्रतिशत मानदेय देना था, लेकिन आज दिनांक तक नहीं दिया गया। संविदा नीति 2018 के अंतर्गत 20 प्रतिशत संविदा कर्मचारियों को नियमित करना था आज तक कोई संविदा नियमित नहीं हुआ।



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