रविवार, 16 जुलाई 2023

मध्यप्रदेश के मालवा में कांग्रेस-भाजपा की मुश्किलें बढ़ा रहा जयस

आदिवासी सीटों को लेकर चिंतित हैं दोनों दल

भोपाल। मध्यप्रदेश में सत्ता का रास्ता खोलने वाला मालवा अंचल एक बार फिर भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दलां के लिए परेशानी खड़ी कर रहा है। जय आदिवासी युवा शक्ति संगठन दोनों ही दलों के लिए चुनौती बन गया है। जयस इस बार आदिवासी वर्ग के लिए आरक्षित सभी सीटों पर प्रत्याशी मैदान में उतारने की बात कह चुका है, इसके चलते दोनों ही दलों के समीकरण बिगड़ रहे हैं। 

मध्यप्रदेश के मालवा अंचल में 66 विधानसभा सीटें हैं। इनमें आदिवासी वर्ग के लिए आरक्षित 22 सीटें है। बात अगर 2018 के विधानसभा चुनाव परिणाम को लेकर करें तो इस चुनाव में भाजपा को मात्र छह सीटें और कांग्रेस को 15 एवं एक सीट पर निर्दलीय प्रत्याशी को जीत मिली थी। इस तरह से भाजपा के लिए यह चुनाव आदिवासी वर्ग के उसके लक्ष्य 51 फीसदी मत हासिल करना और 2 सौ से ज्यादा सीटों को हासिल करना मुश्किल नजर आ रहा है। वैसे भाजपा आदिवासी वर्ग को साधने के लिए करीब दो साल पहले से सक्रियता दिखा रही है। खुद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान आदिवासियों के पर्व पर उनके बीच पहुंचते रहे हैं। साथ ही आदिवासी वर्ग के लिए कई घोशणाएं की है, खासकर पेसा कानून बनाने की घोशणा के बाद तो वे कई बड़े कार्यक्रम कर चुके हैं। वहीं केन्द्र सरकार भी आदिवासी वर्ग को साधने के लिए कई घोशणाएं कर चुकी है। भाजपा संगठन का भी पूरा फोकस इस अंचल पर है। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष वी डी ष्शर्मा के अलावा संगठन पदाधिकारियों के हर माह दौरे भी इस अंचल में हो रहे हैं, मगर दौरा का प्रभाव भाजपा में पक्ष में जाता नजर नहीं आ रहा है। यह भाजपा की िंचता का विशय है। 

भाजपा के पक्ष में चुनाव मैदान में उतरे संघ के पदाधिकारी खुद वर्तमान माहौल को इस अंचल की आदिवासी सीटों पर मुफीद नहीं मान रहे हैं। वे बार-बार संगठन को इसे लेकर आगाह भी कर चुके हैं। वैसे संघ ने यहां मोर्चा संभाला हुआ है। साथ ही एक बार फिर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने विकास पर्व की ष्शुरूआत इस अंचल से कर यह साबित करने का प्रयास किया है कि भाजपा आदिवासी वर्ग के हित में काम कर रही है। 

सीधी की घटना ने चिंता को बढ़ाया

भाजपा के लिए हाल ही में सीधी में आदिवासी युवक के साथ घटित घटना परेशानी का कारण बन गई है। इस अंचल में सक्रिय जय युवा आदिवासी ष्शक्ति संगठन ने इस मुद्दे को गंभीरता से लिया और आदिवासियों के बीच इसे हवा दी है। जयस पहले से ही इस बार चुनाव को लेकर मुखर है। वे प्रदेश की 80 सीटों पर प्रत्याशी मैदान में उतारने की बात पहले ही कर चुका है। अब उसे यह मुद्दा हाथ लग गया है, वह इसे पूरी तरह से भूनाने का प्रयास कर रहा है। भाजपा ने जरूर इस मुद्दे पर सदभावना दिखाते हुए मामले को ष्शांत करने का प्रयास किया, मगर ऐसा लग नहीं रहा कि आदिवासी वर्ग इस मुद्दे को भूल रहा है। खासकर जयस इसे बार-बार आदिवासी वर्ग को याद दिला रहा है। 

भाजपा के साथ कांग्रेस भी है परेशान

मालवा अंचल की 22 आदिवासी सीटों को लेकर केवल भाजपा ही नहीं, बल्कि कांग्रेस भी परेशान है। कांग्रेस को पहले पिछले चुनाव की तरह यह लग रहा था कि जयस उसके पक्ष में खड़ा रहेगा, कांग्रेस को समर्थन करेगा, मगर वर्तमान में ऐसी स्थिति नजर नहीं आ रही है। कांग्रेस की ओर से पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह फिलहाल मौन साधे हुए हैं, मगर दोनों ही नेता जयस को लेकर चिंतित जरूर दिख रहे हैं। उधर जयस के संरक्षक और कांग्रेस विधायक डा हीरालाल अलावा ने दोनों ही नेताओं के सामने अपने पत्ते नहीं खोले हैं, वे भी जयस की ओर से यही कह रहे हैं कि जयस आदिवासी वर्ग की आरक्षित सीटों के साथ आदिवासियों के प्रभाव वाली सभी 80 सीटों पर प्रत्याशी मैदान में उतारेगा। 


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