रविवार, 9 जुलाई 2023

थम नहीं रही आदिवासियों पर अत्याचार की घटनाएं

आदिवासी विधायक और जयस संगठन हुआ खफा

मध्यप्रदेश में सीधी में घटित आदिवासी युवक के साथ घटना के बाद से लगातार आदिवासी वर्ग को लेकर अत्याचार की घटनाएं हो रही है। इन घटनाओं ने सरकार और भाजपा की िंचता को बढ़ा दिया है। वहीं कांग्रेस इसे लेकर हमलवार हो गई है। अब कांग्रेस विधायक और जय युवा आदिवासी संगठन के संरक्षक डा हीरालाल अलावा ने मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने राष्ट्रपति और राज्यपाल से ही इस्तीफा देने की मांग कर डाली हैं। 

मध्यप्रदेश में आदिवासी वर्ग के लोगों पर अचानक से अत्याचार की घटनाओं का सिलसिला तेज हुआ है। सीधी के बाद इंदौर में एक घटना घटी है। इस घटना का वीडिया वायरल हुआ है, जिसमें आदिवासी युवकों के साथ बेरहमी से पिटाई करते हुए दिखया गया है। वायरल वीडियो के आधार पर पुलिस बदमाशों की तलाश में जुटी हुई है तो वहीं घायलों का इलाज इंदौर के  एम वाई हॉस्पिटल में किया जा रहा है। बताया जा रहा है कि घटना इंदौर के राऊ थाना क्षेत्र के ट्रेजर फेंटेसी की है। बिजलपुर के रहने वाले सुमित चौधरी व अन्य लोगों ने आदिवासी युवकों के साथ जमकर मारपीट कर उसका वीडियो बनाया। घायल हुए दोनों ही आदिवासी युवक का कहना है कि वे बाइक से जा रहे थे तभी बाइक फिसल गई। वहां मौजूद गार्ड सुमित चौधरी ने गाड़ी खड़ी करने के लिए बोला। उसी दौरान उसने अपशब्द कहे और डंडे से वार कर दिया। उसके बाद गाड़ी में बैठा कर पीड़ित युवकों को गोदाम में ले गया। फिर वहां मारपीट की जाने लगी। तभी पीछे से उसका बड़ा भाई भी आ गया। दोनों ने अन्य के साथ मिलकर जमकर मारपीट की। सुबह तड़के 4 बजे दोनों वहां से भागे और समाज के लोगों को बताया जिसके बाद उन्हें इलाज के लिए एमवाई हॉस्पिटल ले जाया गया। सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल हुआ तो पुलिस सक्रिय हुई। पुलिस ने मामले में सुमित चौधरी, जयपाल सिंह बघेल और प्रेम सिंह परमार पर कार्रवाई की है। सुमित चौधरी को गिरफ्तार कर लिया गया है और अन्य लोगों की तलाश की जा रही है।

आदिवासी विधायक ने खोला मोर्चा 

घटना को लेकर कांग्रेस के आदिवासी विधायक और जय युवा शक्ति संगठन जयस के संरक्षक डा हीरालाल अलावा ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। इतना ही नहीं उन्होंने राज्यपाल और राश्टपति से भी इस तरह की घटनाओं को लेकर इस्तीफे की मांग कर डाली है। डा अलावा ने कहा कि मध्य प्रदेश में आदिवासियों के प्रति अपराधियों के हौंसले बढ़ रहे हैं। इसमें सरकार के आदिवासियों के हितों का संरक्षण देने में असफल रहने की वजह से यह स्थिति बनी है। पेसा कानून, संविधान की पांचवीं और छठवीं अनुसूची के प्रावधानों को धरातल पर अमल नहीं किए जाने से आदिवासियों पर हमले की घटनाएं बढ़ रही हैं। उन्होंने कहा कि नेमावर में आदिवासियों को दस-दस फीट गहरे गड्ढे में गाड़ दिया गया था। नीमच बरादा में कन्हैया आदिवासी को गाड़ी में बांधकर घसीटकर मारा गया था। बमौरी में आदिवासी महिला को जिंदा जला दिया गया था। खरगोन के भाभरा में भी पुलिस हिरासत में आदिवासी युवकों की हत्या की गई है। विधायक डॉ. अलावा ने कहा कि मध्य प्रदेश की शिवराज सरकार आदिवासियों पर अत्याचार रोकने में असफल रही है। डा अलावा ने आदिवासी समाज से आने वाली राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और राज्यपाल मंगूभाई पटेल से इस्तीफा मांगा है। अलावा का कहना है कि वे राष्ट्रपति व राज्यपाल आदिवासी समाज के होने के बाद भी देश के असली मालिक आदिवासियों के हितों के संरक्षण में नाकाम हैं और इसलिए उन्हें इस्तीफा दे देना चाहिए।


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