रविवार, 1 दिसंबर 2019

16 शिक्षकों की अनिवार्य सेवानिवृत्ति का किया विरोध, मंत्री हुए खफा

  मंत्री ने कहा कार्य में लापरवाही करने वालों को दी जाएगी सेवानिवृत्ति

मध्यप्रदेश के स्कूल शिक्षा विभाग ने 16 शिक्षकों को अयोग्य बताते हुए सेवानिवृत्ति दे दी. ये शिक्षक दक्षता परखने के लिए हुई परीक्षा में फेल हो गए थे. शिक्षकों की अनिवार्य सेवानिवृत्ति का यह मामला देश में पहली बार मध्यप्रदेश में हुआ है. स्कूल शिक्षा विभाग की इस कार्रवाई का शिक्षक संगठनों ने विरोध भी तेज कर दिया है. शिक्षक संघ के विरोध के बाद स्कूल शिक्षा मंत्री डा. प्रभुराम चौधरी खफा हो गए और उन्होंने शिक्षकों से साफ कह दिया कि लापरवाही बरतने वाले और जहां कमी दिखाई देगी उन अधिकारियों को भी  सेवानिवृत्ति दी जाएगी.
मध्यप्रदेश के स्कूल शिक्षा विभाग ने आदेश जारी कर राज्य के 16 शिक्षकों को अनिवार्य सेवानिवृत्ति दे दी है. ये शिक्षक स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा शिक्षकों की दक्षता परखने के लिए जून माह में ली गई दक्षता परीक्षा में फेल हो गए थे. इस परीक्षा में राज्य के कुल 5891 शिक्षक शामिल हुए थे. परीक्षा में फेल हुए शिक्षकों को विभाग की ओर से प्रशिक्षण देकर दोबारा परीक्षा ली गई. फेल हुए 1351 शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया गया और फिर 14 अक्तूबर को दूसरी बार यह परीक्षा ली गई थी, लेकिन इस बार भी ये शिक्षक फेल हो गए थे.
विभाग द्वारा मध्यप्रदेश सिविल सर्विसेज (पेंशन) रूल्स के तहत 20/50 के फामूर्ले पर सेवानिवृत्ति दी गई है, जिसमें प्रावधान है कि 20 साल की सेवा या 50 वर्ष की आयु पूरी होने पर अनिवार्य सेवानिवृत्त किया जा सकता है. राज्य के शिक्षा मंत्री डा. प्रभुराम चौधरी का कहना है कि बच्चों का भविष्य सरकार के लिए सर्वोपरि है. इस 20-50 के फार्मूले के दायरे में आने वाले कुल 18 शिक्षक अपात्र पाए गए इनमें से दो के दस्तावेज की जांच जारी है.चौधरी ने कहा कि ऐसा देश में पहली बार हुआ है जब खराब प्रदर्शन के कारण शिक्षकों को अनिवार्य सेवानिवृत्ति दी गई है.
उल्लेखनीय है कि स्कूल शिक्षा विभाग ने जिन 16 शिक्षकों को सेनानिवृत्ति दी है उनमें से अधिकांश विंध्य क्षेत्र के हैं. रीवा संभाग से कुल 8 शिक्षकों को सेनानिवृत्ति दी गई है. यह निर्णय 20-50 फार्मूले के तहत लिया गया है, जिसका मतलब है कि 20 साल की नौकरी और 50 की उम्र.
शिक्षक संगठनों ने शुरु किया विरोध
शिक्षकों पर अनिवार्य सेवानिवृत्ति की कार्रवाई का शिक्षक संगठनों ने विरोध शुरू कर दिया है.  शिक्षक संगठनों के नेतृत्व में आज स्कूल शिक्षा मंत्री डाक्टर प्रभुराम चौधरी के बंगले पर पहुंचे शिक्षकों ने सेवानिवृत्ति का जमकर विरोध किया और शिक्षकों को दोबारा मौका देने की मांग की है. शिक्षकों का कहना है कि पहले शिक्षा की दुर्गति करने वाले अधिकारियों की परीक्षा ली जाए और जिम्मेदारी तय की जाए. उसके बाद फिर शिक्षकों पर कार्रवाई की जाए. सरकार द्वारा शिक्षकों का अनिवार्य सेवानिवृत्ति देना सरकार का अव्यहवारिक फैसला है और बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है. उनका कहना है कि मध्यप्रदेश में पिछले सात सालों से शिक्षकों की भर्ती नहीं हुई है. एक लाख से अधिक विद्यालय में शिक्षकों के पद रिक्त हैं. 5 हजार स्कूल शिक्षक विहीन हैं और 10 हजार शिक्षकों को अन्यत्र कामों में लगा रखा है. 
मंत्री ने कहा हमें जहां कमी लगेगी हम उठाएंगे सख्त कदम
अनिवार्य सेवानिवृत्ति का विरोध करने आए शिक्षक संघ के पदाधिकारियों को स्कूल शिक्षा मंत्री डाक्टर प्रभु राम चौधरी ने दो टूक जवाब दे दिया. उन्होंने कहा है कि शिक्षकों का काम, पढ़ाना है विरोध प्रदर्शन करना नहीं. हमें जहां कमी लगेगी वहां हम सख्त कदम उठाएंगे. मंत्री ने कहा कि स्कूल शिक्षा विभाग बच्चों की पढ़ाई के लिए बना है. उन्होंने कहा कि हम सब को मिलकर बच्चों की शिक्षा पर ध्यान देना चाहिए. मंत्री ने कहा शिक्षकों को एक बार नहीं बल्कि बार-बार मौके दिए गए. 100 नंबर के प्रश्न पत्र को 50 का किया गया तब भी फैल हो गए फिर 33 नंबर का प्रश्नपत्र दिया गया, उसमें भी अगर वो पास नहीं हो पाए तो वो इस नौकरी के ही योग्य नहीं हैं.

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