स्कूल शिक्षा विभाग ने राज्य के सभी स्कूलों में जनवरी 2020 से शिक्षकों को ई-अटेंडेंस के माध्यम से उपस्थिति दर्ज कराना अनिवार्य कर दिया है. इसके लए विभाग ने साफ्टवेयर अपडेट कर लिया है. भाजपा सरकार में लागू हुई ई-अटेंडेंस प्रणाली का शिक्षकों ने विरोध किया था, जिसके चलते सरकार ने उस वक्त इसे रोक दिया था. इसके बाद विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने ई-अटेंडेंस को समाप्त करने का शिक्षकों को वचन दिया था, जिसे सरकार अब तोड़ रही है.स्कूल शिक्षा विभाग ने विरोध के बाद भी अब स्कूलों में शिक्षकों और बच्चों की उपस्थिति ई-अटेंडेंस के माध्यम से लगवाने की अनिवार्यता कर दी है. जनवरी 2020 से सभी स्कूलों में शिक्षकों को अपनी और बच्चों को उपस्थिति ई-अटेंडेंस के माध्यम से दर्ज करानी होगी. विभाग ने ऐप के माध्यम से बच्चों की उपस्थिति दर्ज करने के लिए सॉफ्टवेयर अपडेट कर लिया है. साथ ही शिक्षकों को अपनी उपस्थिति भी ऐप के माध्यम से लगानी होगी. दरअसल विभाग ने पाया था कि प्रदेश के करीब 55 फीसदी शिक्षक नियमित रूप से स्कूल नहीं जा रहे हैं. अधिकांश शिक्षक स्कूल में देरी से पहुंच रहे हैं. वहीं बच्चों की उपस्थिति भी 40 फीसदी पाई गई. दूसरी ओर हाल ही में स्कूल शिक्षा विभाग की बैठक में सरकारी स्कूलों में स्तरहीन पढ़ाई को लेकर कमलनाथ ने नाराजगी जाहिर की थी. हालांकि विभाग ने इस संबंध में पूरी तैयारी कर ली है, बस शासन से आदेश का इंतजार है.
इस कारण विभाग ने यह निर्णय लिया कि अब बच्चों की उपस्थिति भी ई-अटेंडेंस से लगाई जाएगी. प्रक्रिया के तहत हर शिक्षक के पास लाग इन व पासवर्ड होता है. वे स्कूल पहुंचकर अपनी उपस्थिति ई-अटेंडेंस में लगाएंगे. साथ ही कक्षा में उपस्थित बच्चों की संख्या भी प्रतिदिन दर्ज करेंगे.
इस मामले में स्कूल शिक्षा मंत्री प्रभुराम चौधरी कहना है कि स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था सुधारने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं. इसके लिए अब शीघ्र ही बच्चों व शिक्षकों की उपस्थिति शिक्षा मित्र ऐप के माध्यम से लगाई जाएगी. इसके लिए ई-अटेंडेंस को अनिवार्य किया जाएगा.
यहां उल्लेखनीय है कि शिवराज सरकार ने 2018 में ई-अटेंडेंस सिस्टम लागू किया था. इस पर शिक्षकों ने प्रदेश भर में आंदोलन कर विरोध दर्ज कराया था. विधानसभा चुनाव को देखते हुए इसके अमल में ढ़ील दी गई थी. शिक्षकों के विरोध के चलते कांग्रेस ने अपने घोषणा पत्र में ई-अटेंडेंस सिस्टम को बंद करने का वादा किया था, लेकिन अब कमलनाथ सरकार इसे तोड़ने जा रही है.
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