जनआशीर्वाद यात्रा को लेकर असमंजस बरकरार
मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की आशीर्वाद यात्रा को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। शिवराज चुनाव के पहले अपनी यह यात्रा निकालना चाहते हैं, वहीं पार्टी के नेता इसमें बाधा खड़ी कर रहे हैं। मामला कोर कमेटी में भी तय नहीं हुआ, लेकिन मुख्यमंत्री इस यात्रा को निकालने के लिए तैयारी कर चुके है। वे अब दिल्ली केष्शीर्श नेताओं से यात्रा निकालने के लिए सहमति बनवा सकते हैं।
प्रदेश में विधानसभा चुनाव को देखते हुए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पहले ही जनआशीर्वाद यात्रा निकालने को लेकर तैयारी कर चुके थे। वे संगठन को इस यात्रा के लिए बारे में बता भी चुके थे, मगर इस बार संगठन ने यात्रा को लेकर गंभीरता नहीं दिखाई और मामला हाल ही में हुई भाजपा की कोर कमेटी में उठा। पहली बार ऐसा हुआ है, जब कोर कमेटी में मुख्यमंत्री की उपस्थिति में इस यात्रा पर अपनी ही पार्टी के नेताओं ने अडंगा लगाया। इतना ही नहीं नेताओं ने यात्रा को लेकर एक नया फार्मूला पेश कर दिया। इसके चलते कहा गया कि यात्रा को इस बार अलग-अलग नेता के नेतृत्व में अलग-अलग अंचल से निकाला जाए। यह बात मुख्यमंत्री के गले नहीं उतरी और यात्रा को लेकर सहमति अटक गई।
यात्रा को लेकर नेताओं की राय
जनआशीर्वाद यात्रा को लेकर संगठन ने तर्क दिया है कि केन्द्रीय मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर-ज्योरादित्य सिंधिया ग्वालियर-चंबल में यात्रा निकालें। इसमें वहां के बाकी नेता शामिल हों। कैलाश विजयवर्गीय मालवा में रहें। और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष वीडी शर्मा बुंदेलखंड में जाएं। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह मध्य भारत संभालने के साथ पूरे प्रदेश में बड़ी सभाओं को संबोधित करें.इसमें केंद्रीय लीडरशिप भी शामिल हो जाए। इस फार्मूले के बाद यह सवाल उठाए जा रहे हैं कि क्या संगठन मुख्यमंत्री के नेतृत्व में इस बार यात्रा निकालने से बच रहा है। खुलकर तो कोई नेता सामने नहीं आ रहा है, मगर अदंरूनी तौर पर नेताओं की मंशा तो कुछ इसी तरह दिखाई दे रही है।
पहली बार 2008 में निकाली थी यात्रा
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 2008 के विधानसभा चुनाव के पहले इस तरह की यात्रा निकाली थी और सभी विधानसभा सीटों पर पहुंचकर जनता का आशीर्वाद लिया था। इसके बाद चुनाव में उनकी सरकार बनी। बाद में 2013 में भी उन्होंने यह यात्रा निकाली और जनता का आशीर्वाद पाया भी। जब 2018 का चुनाव आया तो मुख्यमंत्री की इस यात्रा को अमित ष्शाह ने हरी झंडी निकालकर रवाना किया। इस बार यह यात्रा सभी विधानसभा सीटों पर नहीं पहुंची थी और बीच में ही इसे रोकना पड़ गया था। परिणाम भी यह हुआ कि पार्टी को स्पश्ट बहुमत नहीं मिला। इसके बाद से ही संगठन में यात्रा को लेकर सवाल उठाए जाते रहे।
चेहरे का लेकर है लड़ाई
नेताओं का अड़ंगा इस बात को लेकर है कि यात्रा में चेहरा कौन होगा? वैसे अब तक निकाली जाने वाली यात्रा में हमेशा ही मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ही चेहरा रहे हैं। इसके चलते इस बार संगठन के नेता यह चाह रहे हैं कि अलग-अलग नेताओं के नेतृत्व में अलग-अलग अंचल से यात्रा निकाली जाए। याने साफ है कि नेता इस मामले में मुख्यमंत्री को पूरी क्रेडिट मिले यह नहीं चाहते हैं। हर बार यात्रा में वे ही चेहरा होते हैं और चुनाव के बार सरकार बनाने की बारी आती है तो मुख्यमंत्री के रूप में उनके चेहरे पर ही मोहर लग जाती है। यही वजह है कि नेता इस बार यात्रा को लेकर अडं़गा लगा रहे है।
दिल्ली तक पहुंच सकता है मामला
जनआशीर्वाद यात्रा को लेकर संगठन और नेता भले ही अड़ंगा लगा रहे हैं, मगर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान यात्रा को लेकर तैयार हैं। वे चाहते हैं कि चुनाव के पहले यात्रा निकले और इसे लेकर वे दिल्ली में वरिश्ठ नेताओं के साथ बैठक सहमति बनवा सकते हैं। सूत्रों की माने तो मुख्यमंत्री अपने हाथ से यह अवसर जाने नहीं देना चाहते हैं। वहीं नेताओं के अड़ंगे के चलते यात्रा पर फिलहाल असमंजस बना हुआ है।
कांग्रेस का भी है भय
पिछले चुनाव में भाजपा की इस जनआशीर्वाद यात्रा के विरोध में कांग्रेस ने भी पोल-खोल यात्रा निकाल दी थी। इसके चलते यात्रा पर असर पड़ा था, लेकिन अभी कांग्रेस में इस बार इस तरह की कोई यात्रा निकालने को लेकर किसी तरह की हलचल नजर नहीं आ रही है। कांग्रेस नेता फिलहाल भाजपा के फैसले पर ही नजर टिकाए हुए हैं।

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