मध्यप्रदेश के बुरहानपुर में चल रही प्रो.बृजमोहन मिश्र स्मृति न्यास द्वारा आयोजित वैचारिक मंथन ताप्ती श्रवणमाला के समापन सत्र मेंअंत्योदय से भारत उदय विषय पर अपने संबोधन में डॉ.मिलिंद कांबले ने कहा कि संघर्षशील समाज ही प्रगति करते हैं. उन्होंने अमेरिका का उदाहरण देते हुए बताया कि, संघर्ष, एकजुटता और नवाचार करने की नवाचार करने की अदम्य इच्छा के परिणाम स्वरूप ही अमेरिका आज विष्व शक्ति हैं. कांबले ने कहा कि भीम एप, जनधन खाता, मुद्रा योजना से वित्तीय समावेशन की प्रक्रिया बढ़ी हैं और बड़े पैमाने पर वंचित वर्ग देष की वित्तीय प्रणाली से जुड़ा हैं. कांबले ने कहा कि दलित समाज के जीवन स्तर में आरक्षण से सकारात्मक बदलाव आया हैं. इससे शासकीय सेवा तथा राजनैतिक पदों पर दलित वर्ग के लोग आगे आये हैं. अब उद्यमिता के क्षेत्र में भी वंचित वर्ग के लोग बेहतर प्रदर्शन कर सकें इसके लिए आवश्यक प्रशिक्षण तथा वातावरण उपलब्ध कराने के लिए व्यवस्थित प्रयास किए जा रहे हैं. पद्मश्री डॉ. मिलिंब कांबले ने अंत्योदय से भारत उदय पर कहा स्टैंडअप में अनुसूचित जाति और जनजाति के युवाओं के लिए मास्टर प्लान तैयार हो रहा है. जिले के 709 जिलो में से 500 जिले में योजना में चुने गए है. बुरहानपुर में 300 युवाओं को चुनेंगे ट्रेनिंग देंगे, 100 को प्रोजेक्टर खड़ा करके स्वरोजगार शुरू करवाएंगे. उन्होंने समाज के संघर्ष से अवगत कराया. कहा अंतिम व्यक्ति का विकास नहीं होने तक भारत का उदय नहीं हो सकता. बाबा साहेब अंबेडकर ने व्यक्ति के उत्थान के लिए अधिकार दिए. समाज को आगे बढ़ने के लिए संघर्ष करना पड़ता है. संघर्ष से डरो मत आने वाला समय हमारा है. समन्वय के रास्ते से आगे बढ़ें. पहले समाज के युवा के पास दो विकल्प थे एक सरकार नौकरी में और दूसरा राजनीति लेकिन अब तीसरा विकल्प है उद्यमिता. अंत में राष्ट्रगान से कार्यक्रम का समापन हुआ.

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