रविवार, 24 दिसंबर 2017

वसुधैव कुटुंबकम की भावना पर आधारित है हमारी विदेश नीति : एम.जे. अकबर

एम.जे. अकबर
केन्द्रीय विदश राज्यमंत्री एम.जे. अकबर ने कहा है कि हमारे देश की विदेश नीति वसुधैव कुटुंबकम नीति पर आधारित है. भारतीय विदेश  नीति का मुख्य आधार राष्ट्रीयता व मानवता है. गत साढ़े तीन वर्षों में देश का जो सम्मान विश्व में बढ़ा है वह उल्लेखनीय है. आतंकवाद का जवाब सिर्फ राष्ट्रवाद से ही दिया जा सकता है. 
अकबर मध्यप्रदेश के बुरहानपुर में प्रो. बृजमोहन मिश्र स्मृति न्यास द्वारा आयोजित ताप्ती श्रवणमाला 2017 में वक्ता के रूप में संबोधित कर रहे थे. इस दौरान देश की जानी मानी पर्वतारोही  अरूणिमा सिन्हा, जिन्होंने रेल दुघर्टना में अपना एक पैर गंवाने के बावजूद दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट पर राष्ट्रध्वज तिरंगा फहराया, ने भी संबोधित किया. विदेश राज्यमंत्री अकबर ने अपने संबोधन में कहा कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के कार्यकाल में अमेरिका जैसा देश भी भारत को विश्व में एक बड़ी शक्ति मानने लगा है. गत साढ़े तीन वर्षों में अफगानिस्तान व बांगलादेश सहित सभी पड़ोसी देशों से भारत के संबंधों में उल्लेखनीय सुधार आया है. उन्होंने कहा कि दुनिया में आतंक के खिलाफ लड़ाई सिर्फ राष्ट्रीयता के बल पर ही जीती जा सकती है. विदेश राज्यमंत्री एम.जे. अकबर ने कहा कि आज के युग में अंतर्राष्ट्रीय समस्याओं का हल युद्ध से नहीं बल्कि बातचीत से ही संभव है. उन्होंने कहा कि देश में हिन्दू व मुस्लिमों को आपस में लड़ने के स्थान पर दोनों को मिलकर गरीबी से लड़ने की आवश्यकता है. 
लक्ष्य के लिए पागल कहने लगे तो समझों आपकों रोकने वाला कोई नहीं

अरूणिमा सिन्हा

 अरूणिमा सिन्हा ने बताया कि वर्ष 2011 में रेल दुघर्टना में अपना एक पैर गंवाने के बावजूद उन्होंने कभी हिम्मत नहीं हारी तथा ऐसी विपरित परिस्थिति में माउंट एवरेस्ट पर चढ़ने का निर्णय उन्होंने अपने खोये हुए आत्म विश्वास को वापस पाने के लिए लिया था.  उन्होंने कहा कि जब व्यक्ति का लक्ष्य एक जुनून का रूप ले ले तो उसके लिए कुछ भी असंभव नहीं हैं. अरूणिमा सिन्हा ने कहा कि जब संकंट सामने हो तो रिस्क नहीं लेना ही सबसे बड़ी रिस्क है. उन्होंने बताया कि माउंट एवरेस्ट पर चढ़ने के बाद जब उनका साथी शेरपा उनसे जल्दी वापस उतरने के लिए कह रहा था कि आक्सिजन समाप्त होने वाली है, ऐसी परिस्थिति में उन्होंने तिरंगा फहराकर वीडियोग्राफी कर अपना संदेश रिकार्ड कराने जैसे दुस्साहसिक कदम उठाया, क्योंकि वे इस वीडियो के माध्यम से दुनिया को संदेश देना चाहती थी कि अगर युवा कुछ करने की ठान लें तो कुछ भी असंभव नहीं. उन्होंने कहा कि जीवन में सोच, लक्ष्य और फोकस से सब कुछ पाना संभव है. अरूणिमा सिन्हा ने कहा कि जीवन में आने वाली परेशानियों से व्यक्ति को अपने आपको निखारना चाहिए. उन्होंने कहा कि जब लक्ष्य के लिए लोग आपको पागल कहने लगे तो समझ लो, लक्ष्य पाने से आपको कोई नहीं रोक सकता. 



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