सोमवार, 25 दिसंबर 2017

सरकार की एकात्म यात्रा पर शंकराचार्य स्वरुपानंद ने उठाए सवाल

स्वामी स्वरुपानंद सरस्वती 
शंकराचार्य ने  सरकार पर लगाया झूठा प्रचार करने का आरोप  
ज्योतिष मठ और शारदा पीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरुपानंद सरस्वती ने शिवराज सरकार द्वारा बहुप्रचारित एकात्म यात्रा पर सवाल उठाये हैं. उन्होंने सरकार पर झूठी जानकारी देने और दुष्प्रचार करने की बात भी कही है. एकात्म यात्रा पर आपत्ति जताते हुए इसके आयोजकों को उन्होंने शास्त्रार्थ की चुनौती दी है. 
शंकराचार्य का कहना है कि आदि शंकराचार्य के जन्म के बारे में जो जानकारी सरकार द्वारा प्रचारित की जा रही है, वह सर्वथा गलत है. उन्होंने कहा मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को नरसिंहपुर स्थित नर्मदा किनारे सांकल घाट में वह गुफा भी दिखलाई थी, जिसमें आदि शंकराचार्य का संन्यास हुआ था सांकल घाट में आदि शंकराचार्य ने अपने गुरु गोविंद भगवत्पाद से दीक्षा ग्रहण की थी. शंकराचार्य ने कहा नरसिंहपुर जिले में नर्मदा नदी के उत्तर तट, सांकल घाट में आदि शंकराचार्य  के संन्यास दीक्षा का उल्लेख नरसिंहपुर के गजेटियर में भी है. उन्होंने कहा की नर्मदा के सांकल घाट पर मध्य प्रदेश के दो गौरव हैं. एक, यहां पर आदि शंकराचार्य की सन्यास दीक्षा हुई है. दूसरा, स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती की यह जन्मस्थली भी है, जो वर्तमान में 2 पीठों के शंकराचार्य हैं.
सांकल घाट में स्थापित करें मूर्ति
उन्होंने कहा कि आदि शंकराचार्य की मूर्ति यदि लगना थी, तो वह सांकल घाट में लगनी चाहिए थी, न कि ओंकारेश्वर में. उन्होंने कहा मध्य प्रदेश सरकार के प्रयास तब सराहनीय हो सकते थे, जब वह तथ्यों की अनदेखी नहीं करते. मध्य प्रदेश सरकार आदि शंकराचार्य का जन्म 650 ईसवीं के बाद का बता रही है. यह भी कह रही है कि उन्होंने ओंकारेश्वर में संन्यास धारण किया था, जो सर्वथा गलत है. यह प्रमाणिक तथ्यों से छेड़छाड़ करने का मामला है. शंकराचार्य ने कहा ब्रिटिश लेखक जिन्होंने इतिहास के साथ छेड़छाड़ की है. मध्यप्रदेश सरकार उसको सत्य मान रही है. वस्तुस्थिति यह है कि न्यायालय ने भी राजा सुधन्वा का ताम्र लेख प्रमाणिक माना है. आदि शंकराचार्य का आर्विभाव काल युधिष्ठिर संवत 2663 माना गया है, जो ईसा पूर्व 478 वर्ष होगा. स्वामी स्वरूपानंद ने कहा द्वारका, शारदा पीठ,पुरी शंकराचार्य पीठ एवं काची की आचार्य परंपरा जो ईसा पूर्व से ही निरंतर चली आ रही है. उसकी अनदेखी कैसे की जा सकती है. शास्त्रों में इसके प्रमाण मौजूद हैं.
ओंकारेश्वर में शंकराचार्य का जिक्र नहीं
स्वरूपानंद ने कहा ओंकारेश्वर हमारे यहां का एक महत्वपूर्ण धार्मिक स्थान है द्वादश ज्योतिर्लिंग में अन्यतम अमलेश्वर यहां पूजित होते हैं. यहां शंकराचार्य  का संन्यास स्थल होता, तो इसका उल्लेख शास्त्रों में और ओंकारेश्वर में भी होता. इस प्रसिद्ध स्थान का उल्लेख कहीं पर भी उपलब्ध नहीं है. आदि शंकराचार्य यदि ओंकारेश्वर कभी गए होते, तो उसका उल्लेख शंकराचार्य चारित्र्य में होता,जो कहीं पर भी देखने में नहीं मिलता है. शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद  का कहना है एकात्म यात्रा यदि आदि शंकराचार्य को ध्यान में रखकर शुरू की जा रही है तो इसका शुभारंभ उनके जन्म स्थली से शुरू होकर चारों पीठ के दर्शन करते हुए इसे केदारनाथ ले जाना चाहिए था. 
अजय सिंह 

चुनावी वर्ष में वोट के लिए यात्रा
नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने शिवराज सरकार पर आरोप लगाया है कि आदिगुरु शंकराचार्य की प्रतिमा स्थापित करने के लिए यात्रा की क्या जरूरत पड़ गई. उन्होंने कहा कि यह प्रतिमा बगैर यात्रा के भी स्थापित की जा सकती थी, लेकिन मुख्यमंत्री धर्म के बहाने अपने राजनीतिक उद्देश्यों के लिए यात्रा का आयोजन सरकारी खर्च पर करके भाजपा का चुनाव प्रचार कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि नमामि देवी नर्मदे यात्रा भी फिजूलखर्ची का अनुपम उदाहरण बना. एक आरती 58 हजार में और फर्जी बिल इस यात्रा के नाम पर लगाएं गए. यात्रा पर करोड़ों खर्च हुए लेकिन आज तक नर्मदा का सरंक्षण नहीं हुआ है.

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