राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन में कार्यरत 19 हजार संविदा कर्मचारियों को नौकरी बचाने के लिए मार्च-अप्रैल 2018 में फिर परीक्षा देनी होगी. मिशन ने नए हेल्थ मैन्युअल से इस शर्त को नहीं हटाया है, जबकि फरवरी 2017 में स्वास्थ्य मंत्री रुस्तम सिंह ने अगले साल से अप्रेजल नहीं कराने का लिखित आश्वासन दिया था. दो साल पहले तक इन कर्मचारियों के कार्य का मूल्यांकन उनके अधिकारी करते थे. वर्ष 2016 से स्वास्थ्य विभाग ने नई व्यवस्था बनाई. इसके तहत हर साल संविदा अवधि बढ़ाने से पहले संबंधित कर्मचारियों की लिखित परीक्षा एवं साक्षात्कार अनिवार्य कर दिया गया. इसमें 64 फीसदी से कम अंक लाने वाले कर्मचारी को नौकरी से निकालने का प्रावधान था. दो साल से ये परीक्षा हो रही है और कुछ कर्मचारियों को नौकरी से भी निकाला गया था. तब कर्मचारियों ने आंदोलन किया और फिर विभाग के मंत्री ने भरोसा दिलाया कि ये प्रावधान खत्म कर दिया जाएगा. फिर भी एनएचएम ने अक्तूबर 2017 में जारी नए हेल्थ मैन्युअल में इसे शामिल कर लिया है.
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