शुक्रवार, 22 दिसंबर 2017

राहुल गांधी के कार्यालय के सामने धरने पर बैठेंगी भाजपा की पारुल साहू

पारुल साहू
कांग्रेस के पूर्व विधायक की टिप्पणी से खफा हैं भाजपा विधायक
भाजपा की विधायक पर कांग्रेस के पूर्व विधायक द्वारा की गई टिप्पणी से खफा भाजपा विधायक अब कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी के कार्यालय के सामने धरना देंगे. वे राहुल गांधी से पूछेंगी कि क्या कांग्रेस के पूर्व विधायक गोविंद राजपूत ने उनको लेकर जो टिप्पणी की है, वह उचित है ? साहू ने दिल्ली जाकर धरना देने की तारीख तय नहीं की है.
मध्यप्रदेश के सागर जिले की सुरखी विधानसभा क्षेत्र की विधायक पारुल साहू को लेकर कांग्रेस के पूर्व विधायक गोविंद राजपूत ने टिप्पणी कर ‘दारुवाली विधायक’ संबोधित किया. उनकी इस टिप्पणी को लेकर अब बवाल मच गया. खुद पूर्व विधायक इस टिप्पणी को लेकर घिरते नजर आ रहे हैं. भाजपा की विधायक पारुल साहू अब उनसे खफा है. उन्होंने पूर्व विधायक की इस टिप्पणी के विरोध में अब कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी के कार्यालय के सामने दिल्ली में धरना देने की घोषणा कर दी है. पारुल साहू ने कहा कि वे कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष के कार्यालय पर धरना देकर यह पूछेंगी कि क्या गोविंद राजपूत की टिप्पणी से वे सहमत हैं ? पारुल साहू ने कहा कि उन्होंने यह तय किया है कि वे दिल्ली जाकर कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष को यह बताएंगी कि उनकी पार्टी में ऐसे भी नेता हैं, जो महिलाओं का सम्मान नहीं करना जानते.
उल्लेखनीय है कि पारुल साहू को लेकर गोविंद राजपूत ने सेमाढ़ाना गांव में एक सभा के दौरान उन्हें दारुवाली विधायक संबोधित करते हुए कहा था कि वे पुरानी शराब की तरह हैं. इसके अलावा कई भद्दे कमेंट भी वे कर गए थे. इसका वीडियो जब वायरल हुआ था.
गोविंद राजपूत 
सफाई देने लगे गोविंद राजपूत
भाजपा विधायक द्वारा जब इस मामले को लेकर गंभीर होते हुए राहुल गांधी तक पहुंचने की बात कही गई तो गोविंद राजपूत इस मामले में ठंडे पड़ते हुए वीडियो में मिग्सिंग होने की बात कह रहे हैं. राजपूत ने इस मामले में अपनी सफाई दी कि सुरखी विधानसभा क्षेत्र में एक सड़क सात साल से नहीं बनी है, सड़क बनाने की मांग को लेकर सभा की गई थी. सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने विधायक को दारु बनाने वाले परिवार से आना बताया था. शराब पर बनने की तारीख तो लिखी होती है, लेकिन इस पर एक्सपायरी डेट नहीं लिखी होती है. उनके इन शब्दों को तोड़-मरोड़ इस्तेमाल कर दिया गया.
अजय सिंह 
विधायक को फंसाने का मामला बनेगा चुनावी मुद्दा


कांग्रेस विधायक को फर्जी मामले में फंसाने के मुद्दे पर विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह  ने सरकार पर जमकर हमला बोला. उन्होंने  कहा है कि सूबे में दो तरह का कानून है. किसी को फर्जी मुकदमे में फंसाया जाता है तो किसी पर हत्या का मुकदमा होने के बावजूद वह सुरक्षित रहता है. उन्होंने मुख्यमंत्री से पूछा कि सरकार आम आदमी के लिए है या सिर्फ भाजपा के रसूखदार लोगों के लिए? उन्होंने कहा कि यह मुद्दा अब चुनावी मुद्दा बनेगा.   नेता प्रतिपक्ष ने विधायक हेमंत कटारे के मामले में आश्चर्य जताते हुए कहा कि जब पुलिस द्वारा बिना जांच-विवेचना के एक विधायक को फंसाया जा रहा है तो आम लोगेों के साथ क्या सलूक किया जाता होगा ? उन्होंने कहा कि निलंबन के बाद भी ये प्रकरण समाप्त नहीं होगा. विपक्षी दल होने के नाते निर्दोष को फंसाने और आरोपी को बचाने का मामला भी चुनावी मुद्दा बनेगा सरकार ये न समझे कि ये सब सिर्फ बयानबाजी तक सीमित होकर रह जाएगा.
ओमप्रकाश धुर्वे 



आदिवासियों ने किया मंत्री का बहिष्कार
प्रदेश के खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के मंत्री ओमप्रकाश धुर्वे द्वारा दिए गए एक बयान को लेकर मंडला जिले में बवाल मच गया है. कुछ आदिवासी संगठनों ने मंत्री का सामाजिक बहिष्कार करने का फैसला लिया है. संगठनों का आरोप है कि उन्होंने दो दिन पहले ग्राम घुघरी में शहीद वीरनारायण सिंह के बलिदान दिवस पर आयोजित एक कार्यक्रम में बोल दिया कि संविधान की पांचवीं अनुसूची डिंडोरी जिले में नक्सल और अलगाववाद का प्रारंभिक रूप है. आदिवासियों ने परम्परानुसार मिट्टी का तवा तोड़कर बहिष्कार की घोषणा की है. सामाजिक बहिष्कार की अगुवाई कांग्रेस के पूर्व विधायक नारायण पट्टा, पूर्व जनपद अध्यक्ष कमल सिंह मरावी व सरपंच हम्मीलाल मरावी कर रहे हैं. पट्टा के नेतृत्व में 24 दिसंबर को एक ज्ञापन कलेक्टर को दिए जाने का निर्णय लिया गया है.

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