मध्यप्रदेश सरकार 2 लाख करोड़ से ज्यादा के कर्ज में डूबी हुई है. वर्ष 2002-2003 के बजट में सरकार पर 29,196 रुपए का कर्ज था, जो अब बढ़कर वर्ष 2017-2018 के बजट में 206469.56 हो गया था.
वित्त मंत्री जयंत मलैया ने कांग्रेस विधायक जीतू पटवारी के प्रश्न के लिखित जवाब में राज्य विधानसभा में आज यह जानकारी दी. मंत्री ने बताया कि राज्य सरकार द्वारा समय-समय पर विकास कार्यो और विकास के लिए चलाई जाने वाली योजनाओं के लिए कर्ज लिया जाता है. उन्होंने बताया कि वर्ष 2002-2003 के बजट में 29196.37 करोड़ का कर्ज था. 2007-2008 के बजट में 43500.58 करोड़, 2012-2013 में 101423.39 करोड़, वर्ष 2017-2018 के बजट में 206469.56 करोड़ रुपए का कर्ज सरकार पर था. मंत्री ने बताया कि प्रदेश के नान प्लान खर्च में पांच वित्तीय वर्ष में कमी आई है.
5 प्रश्नों को किया विलोपित
लोक सेवा आयोग के की फरवरी 2018 में हुई प्रारंभिक परीक्षा में त्रुटि के कारण 5 प्रश्नों को विलोपित किया गया है. यह जानकारी मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने कांग्रेस विधायक रामनिवास रावत के प्रश्न के लिखित जवाब में दी. मुख्यमंत्री ने बताया कि लोक सेवा आयोग की परीक्षा की प्रावधिक रुप से जारी उत्तर कुंजी के तीन वस्तुनिष्ठ प्रश्नों में चारों उत्तर त्रुटिपूर्ण थे तथा दो प्रश्नों में दो उत्तर सही थे. विषय विशेषज्ञों से मिले अभिमत के बाद कुल पांच प्रश्नों को विलोपित किया गया है और त्रुटि रहित अंतिम उत्तर कुंजी जारी कर शेष सही 95 वस्तुनिष्ठ प्रश्नों के आधार पर मूल्यांकन किया गया है.
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