मध्यप्रदेश विधानसभा का मानसून सत्र दो दिन भी नहीं चला और आज दोपहर को ही समाप्त हो गया. सत्र के दौरान शासकीय काम काज तो सरकार ने हंगामें के बीच निपटाए, मगर कांग्रेस द्वारा लाया गया, अविश्वास प्रस्ताव प्रस्तुत ही नहीं हुआ. इसे लेकर हंगामा भी हुआ. इस दौरान सरकार ने 17 विधेयकों के साथ अनुपूरक बजट भी बिना चर्चा के पारित कर लिया.
राज्य विधानसभा का पांच दिवसीय मानसून सत्र आज हंगामें की बीच समाप्त हो गया. 5 दिन के सत्र का समापन 29 जून को होना था, मगर डेढ़ दिन में ही सत्र का समापन कर दिया गया. सदन की आज की कार्यवाही शुरु होने के साथ ही मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस के सदस्यों ने हंगामा शुरु किया, और अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा की मांग को लेकर हंगामा करने लगे. वहीं सत्ता पक्ष ने कांग्रेस विधायकों के हंगामें को दबाने के लिए आपातकाल को मुद्दा बनाया. विधायकों के साथ मंत्रियों ने मोर्चा संभाला और आपातकाल को काला दिवस बना दिया.
संसदीय कार्यमंत्री डा. नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि आज आपातकाल की बरसी है. आज ही के दिन 26 जून 1975 तो तानाशाह इंदिरा गांधी ने लोकतंत्र और पत्रकारिता की हत्या कर पूरे देश को आपातकाल की जद में ला दिया था. जनता को कई तरह की यातनाएं भोगनी पड़ीं थीं. कमलनाथ भी इंदिरा गांधी के अनुयायी हैं क्या प्रदेश की जनता उन्हें भोगेगी. गृह मंत्री भूपेंद्र सिंह, राजस्व मंत्री उमाशंकर गुप्ता, राज्यमंत्री लाल सिंह आर्य और विश्वास सारंग समेत मंत्रियों ने कहा कि विपक्ष को इसके लिए माफी मांगनी चाहिए और गांधी परिवार की भर्त्सना होनी चाहिए. विपक्ष ने आरोप लगाया कि अविश्वास प्रस्ताव से डर कर सरकार सदन को विषय से भटका रही है. हंगामा बढ़ा तो दस मिनट के लिए कार्यवाही स्थगित की गई. सदन में फिर शुरू हुआ तो सत्ता पक्ष आपातकाल पर निंदा प्रस्ताव लाने की जिद करने लगा.
नरोत्तम मिश्रा का कहना था कि आज की कार्यसूची में मीसा बंदियों संबंधी विधेयक है इसलिए आपातकाल पर चर्चा हो सकती है. इस दौरान सत्ता पक्ष द्वारा गांधी नेहरू परिवार और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष को लेकर नारे लगाए तो विपक्ष के रामनिवास रावत ने आरोप लगाया कि भाजपा महात्मा गांधी की हत्या करने वालों की पार्टी है गोडसे की विचारधारा पर चल रही है. नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने कहा कि आरएसएस के एक नेता ने भी इमरजेंसी को तत्कालीन परिस्थितियों में सही ठहराया था. इस दौरान विरोध होता रहा और विधानसभा अध्यक्ष डा. सीताशरण शर्मा ने आज की कार्यसूची में शामिल विषयों को लिया और कार्यवाही हंगामें के बीच पूरी करा ली. इसके बाद सदन को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया. सदन के स्थगित किए जाने का कांग्रेस ने विरोध किया.
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