शनिवार, 23 जून 2018

विद्यार्थियों को पढ़ाने की पद्धति और तरीके में बदलाव जरुरी


राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने आई.ई.एस. शिक्षण संस्थान द्वारा सीहोर जिले में नव निर्मित स्कूल भवन का उदघाटन करते हुए कहा कि शिक्षकों को छात्र-छात्राओं को पढ़ाने की पद्धति और तोर-तरीके को बदलना चाहिए. पुरानी पद्धति और तरीके से विद्यार्थियों को परीक्षा और प्रतियोगिताओं में आने वाले प्रश्नों को हल करने में कठिनाई आती है. इसलिए छात्र-छात्राओं से क्रमानुसार प्रश्न पूछने के बजाये बीच- बीच में से भी अंक और प्रश्न पूछते रहना चाहिए. 
आनंदीबेन पटेल ने कहा कि छात्र-छात्राओं को सर्वसुविधा सम्पन्न विद्यालय उपलब्ध कराने के साथ ही उनके सर्वांगीण विकास का भी प्रयास करना चाहिए. छात्रों के रूचि के विषयों पर विशेष ध्यान देना चाहिए. विद्यालय न्याय और ईश्वर का मंदिर होते हैं. इनसे ज्ञान, शांति, सदभाव की शिक्षा मिलती है,वहीं परम्पराओं, संस्कृति और अध्यात्म से जुड़ने का अवसर प्राप्त होता है. राज्यपाल ने कहा कि देश में अलगववाद की प्रवृत्ति बढ़ती जा रही है. इसको खत्म करने के लिए विद्यालयों तथा छात्रावासों में छुआ-छूत, जाति, धर्म से ऊपर उठकर एकता के साथ रहने की सीख देना होगी. उन्होंने कहा कि बच्चों में स्वच्छता की आदत डालने के लिए केजी कक्षा से बच्चों को स्वच्छता की सीख देना चाहिए. राज्यपाल ने अभिभावकों से बच्चों के स्वास्थ की ओर विशेष ध्यान देने पर जोर देते हुए कहा कि उन्हें पौष्टिक आहार देना चाहिए.
सांसद आलोक संजर ने कहा कि हमारे देश की प्रचीन शिक्षा पद्धति में बहुत बदलाव किया गया है. अब शिक्षण संस्थानों को वर्तमान शिक्षा पद्धति को बदलते हुए प्राचीन शिक्षा पद्धति के साथ-साथ आधुनिक शिक्षा को भी लागू करना होगा. प्रधानमंत्री ने योग को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सर्वोच्च स्थान दिलाया है. संजर ने कहा कि योग का हमारे जीवन में बहुत महत्व है. इसको देखते हुए राजभवन में पहली बार योग का कार्यक्रम कर राज्यपाल ने योग को प्रदेश में नई पहचान दी है. संस्थान के चेयनमेन बी.एस. यादव ने स्वागत भाषण दिया. इस अवसर पर संस्थान की चेयरमेन सुनीता सिंह, विधायक सुरेश राय और गणमान्य नागरिक तथा छात्र-छात्राएं उपस्थित थे. कार्यक्रम का संचालन विद्यालय के छात्र-छात्राओं ने किया.

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें