शुक्रवार, 29 जून 2018

मध्यप्रदेश न्यायिक सेवा देश में अग्रणी


मध्यप्रदेश की न्यायिक सेवा देश में अग्रणी है. हमारे यहां न्याय को विज्ञान की कसौटियों पर रखने की परंपरा आदिकाल से रही है.
मध्यप्रदेश राज्य न्यायिक अकादमी एवं एफएसएल के संयुक्त तत्वाधान में प्रशिक्षण एवं विचार आदान प्रदान हेतु तीन दिवसीय कार्यशाला को संबोधित करते हुए अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक  दिनेश चंद्र सागर ने कहा कि न्याय को विज्ञान की कसौटियों पर परखने की परंपरा आदि काल से प्रचलित है, हालांकि उस समय के तौर तरीके उतने सटीक नहीं थे. वर्तमान भौतिक और तकनीकी युग के समाज में अपराधियों द्वारा सुनियोजित और योजनाबद्ध तरीके से ऐसे अपराध किये जा रहे है, जिससे कि बिना तकनीक और विज्ञान का सहारा लिये ऐसे अपराधों का ना तो उचित अनवेषण संभव और ना ही पीड़ित को उचित न्याय दिलाने और अपराधों की रोकधाम में समाज को संदेश देने की मंशा ही पूरी हो सकती है. ऐसी परिस्थिति में उचित और वैज्ञानिक तरीके से किए जाने वाले अनुसंधान में एफएसएल वैज्ञानिकों की महत्वपूर्ण भूमिका है और उनके द्वारा किये गये वैज्ञानिक तरीके से किये गये अन्वेषण के आधार पर जब न्यायालय किसी उचित निष्कर्ष पर पहुंचता है, तभी हम समाज में साबित कर पाते है कि कोई भी निर्दोष सजा का भागीदार नहीं होगा और कोई भी दोषी जेल की सलाखों से बाहर नहीं रह पाएगा. इस वैज्ञानिक और उचित अन्वेषण के संक्रिया में एक छोटे से छोटे कर्मचारी से लेकर एक बडेÞ से बड़े दायित्ववान प्राधिकारी के सदप्रयासों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. 
कार्यशाला में जिला न्यायाधीश एस.के. शर्मा ने अभिव्यक्त किया कि तीन दिन की कार्यशाला में एफएसएल सागर के विशेषज्ञों द्वारा दी गई जानकारी से निश्चित तौर पर प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे न्यायिक अधिकारीगण लाभांवित होंगे और वर्तमान में बढ़ती हुई तकनीकी एवं वैज्ञानिक सहभागिता के वातावरण में उससे संबंधित तकनीक के आधार पर निष्कर्षित साक्ष्य सामग्री का आश्रय लेकर न्यायिक अधिकारी उचित निर्णय पारित कर सकेंगें जिससे कि समाज में जो न्यायिक संस्थाओं के प्रति लोगों का भरोसा और विश्वास है वह कायम रहेगा. उन्होंने सही समय पर न्याय देने के लिये पुलिस और वैज्ञानिकों से इस सहयोग की अपेक्षा की है कि अन्वेषण के साथ तैयार किये गये प्रतिवेदन अविलंब न्यायालयों को प्रेषित हों. 

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