राज्य शासन द्वारा सूखा घोषणा एवं प्रबंधन के लिए पूर्व के निर्देशों को अधिक्रमित करते हुए नये निर्देश जारी किये गये हैं. अब रबी सीजन में भी सूखा घोषित करने का प्रावधान किया गया है. पहले सिर्फ खरीफ सीजन में ही सूखा घोषित करने का प्रावधान था. खरीफ में अगस्त तथा रबी में दिसंबर तक अग्रिम सूखा घोषित किया जा सकेगा.
राजस्व,विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री उमाशंकर गुप्ता ने जानकारी दी है कि सामान्य स्थिति में 30 दिन और सूखा में 90 दिन पेयजल परिवहन के अधिकार कलेक्टर को दिये गये हैं. 90 दिन से अधिक के लिये राज्य शासन की अनुमति लेनी होगी. पहले सभी अनुमतियाँ राज्य शासन द्वारा जारी की जाती थीं. अब सूखा राहत मद से पेयजल स्त्रोतों की मरम्मत भी करायी जा सकेगी.
सूखा की घोषणा वैज्ञानिक मापदण्डों के आधार पर भारत सरकार के सूखा प्रबंधन मैनुएल-2016 के आधार पर की जायेगी. पहले चरण में वर्षा के आंकड़ो का परीक्षण होगा. फिर बोनी के क्षेत्र, जल विज्ञान संबंधी सूचकांकों, सुदूर संवेदन के सूचकांकों और मृदा नमी के सूचकांको को जांचा जायेगा. तीसरे चरण में मौका सत्यापन करवाया जाएगा, जिसमें पहले और दूसरे चरण के निष्कर्षो की पुष्टि की जायेगी. मौका सत्यापन में अगर 33 प्रतिशत या अधिक की क्षति पायी जाती है, तो मध्यम सूखा और 50 प्रतिशत से अधिक की फसल क्षति पर क्षेत्र गंभीर सूखा की पात्रता में आयेगा.
सूखा क्षेत्र की भौगोलिक एवं प्रशासकीय इकाई ग्राम पंचायत, तहसील अथवा जिला हो सकती है. सूखा की अधिसूचना अधिकतम 6 माह तक प्रभावी रहेगी. खरीफ के सूखे की अधिसूचना अधिकतम 30 अक्टूबर और रबी के सूखे की अधिसूचना अधिकतम 31 मार्च तक जारी की जाएगी. महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना(मनरेगा) में 100 कार्य दिवस का रोजगार प्रत्येक जाबकार्ड धारक परिवार को उपलब्ध कराया जाता है. सूखे की स्थिति में 50 दिन का अतिरिक्त रोजगार उपलब्ध करवाने का प्रावधान किया गया है. राहत कार्यों में अधिकांश कार्य जल संरक्षण के कराए जाएंगे.
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