राजधानी में प्रदेशभर से आए अध्यापकों ने आज से अपना आमरण अनशन शुरु कर दिया है. यादगारे शाहजहांनी पार्क में शुरु किए इस आमरण अनशन पर अध्यापक संघ के जगदीश यादव, शिवराज वर्मा, गोपीचंद सरीते, सुषमा खेमराज, गिरीश दुबे और हिम्मत सिंह यादव बैठे हैं.
शिक्षा विभाग में आधे अधूरे संविलियन की प्रक्रिया से नाराज अध्यापकों ने आज से राजधानी के यादगारे शाहजहानी पार्क में आमरण अनशन शुरु कर दिया है. आज अनशन के पहले दिन अध्यापक संध के जगदीश यादव, शिवराज वर्मा, गोपीचंद सरीते, सुषमा खेमराज, गिरीश दुबे और हिम्मत सिंह यादव बैठे हैं. धरना स्थल पर बड़ी संख्या में अध्यापक मौजूद थे, जिन्होंने आमरण अनशन पर बैठने वालों की हौसला अफजाई की. अध्यापकों का कहना है सरकार द्वारा कैबिनेट में पारित संविलियन के मसौदे में संशोधन नहीं किया जाता, आमरण अनशन जारी रहेगा. पदाधिकारियों का कहना मुख्यमंत्री ने अध्यापकों के शिक्षा विभाग में संविलियन की घोषणा की थी, लेकिन अधिकारियों ने नया कैडर गठित कर दिया और नई सेवा शर्तें इसमें जोड़ दी, जिसके कारण संविलियन अर्थहीन होकर रह गया है. पदाधिकारियों का कहना है कि नए कैडर के भर्ती नियम में जुलाई 2018 से नया कैडर बनाकर अध्यापकों को उसमें नियुक्ति किए जाने स्वीकृति दी गई है. इस निर्णय के चलते उनकी 20 वर्ष की वरिष्ठता समाप्त हो जाएगी. जनवरी 2016 से मिलने वाले सातवें वेतनमान को जुलाई 2018 से दिया जाएगा, इससे प्रत्येक अध्यापक को एरियर के 2 से 3 लाख रुपए का नुकसान होगा. सितंबर 2013 से मिलने वाला छठवां वेतनमान अब तक नहीं मिला है, जिससे भी अध्यापक लाखों के आर्थिक नुकसान में हैं, इस तरह सरकार ने संविलियन के बहाने नया कैडर बनाकर अध्यापकों का आर्थिक नुकसान किया है तथा उनकी वरिष्ठता को भी समाप्त किया जा रहा है, इसीलिए ही संविलियन आधा अधूरा है. अनशनकारियों का कहना है कि जब तक समान काम समान वेतन की भावना के अनुरूप संविलिय नहीं किया जाता, उनका अनशन जारी रहेगा.
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