भोपाल जिले की बैरसिया तहसील के परसोरिया घाटखेड़ी गांव में भाजपा के दबंगों द्वारा दलित किसान को उसकी पत्नी के सामने जिंदा जलाकर मार डालने के संबंध में गठित समिति ने अपनी रिपोर्ट प्रदेश कांगे्रस अध्यक्ष कमलनाथ को सौंप दी है.
समिति ने निष्कर्ष दिया है कि प्रकरण को देखकर लगता है कि यदि शिवराज सरकार और क्षेत्रीय भाजपा विधायक समय रहते दलित परिवार की शिकायत सुन लेते तो यह दर्दनाक और शर्मनाक घटना नहीं घटती. घटना से भाजपा की दलित विरोधी नीति और लापरवाही उजागर होती है. समिति में जिला (शहर) कांगे्रस अध्यक्ष कैलाश मिश्रा, कार्यकारी अध्यक्ष आसिफ जकी और राम मेहर शामिल थे.
कमेटी के सदस्यगण 22 जून को ही स्वर्गीय किशोरीलाल जाटव के घर पहुंचे और परिजनों को प्रदेश कांगे्रस अध्यक्ष कमलनाथ की ओर से शोक संवेदना व्यक्त की. मृतक किसान की पत्नी पंखिया देवी ने सदस्यों को बताया कि कांगे्रस सरकार द्वारा दिये गये साढ़े तीन एकड़ जमीन के पट्टे पर पिछले सोलह- सत्रह वर्ष से हम लोग खेती करते आ रहे हैं. उससे लगी भूमि भाजपा पिछड़ा वर्ग के जिला मंत्री तीरन यादव और उनके परिवार की है. पूरे गांव और आसपास में इस भाजपा नेता का दबदबा है. वह कई वर्षों से मृतक को परेशान कर रहा था, जिसकी लिखित और मौखिक शिकायत क्षेत्रीय विधायक और बैरसिया थाने में की गई थी. लेकिन तीरन की नेतागिरी के आगे किसी ने नहीं सुना और डांट-डपट कर भगा दिया.
पंखिया देवी ने बताया कि जब हमें पता चला कि तीरन हमारी जमीन पर टेज्क्टर चला रहा है तो हम पति के साथ वहां पहुंचे और विरोध किया. तीरन ने पति पर पेट्रोल डालकर आग लगा दी. वहां मौजूद प्रकाश यादव, संजू यादव और बलवीर यादव तीरन के साथ भाग गये. मैं खेत की मिट्टी डाल-डालकर आग बुझाने का प्रयास करती रही, लेकिन मेरे पति मेरी आंखों के सामने जलकर मर गये.
समिति ने रिपोर्ट में कहा कि पुलिस मृतक के पुत्र कैलाश जाटव की रिपोर्ट नहीं लिख रही थी. वह आत्महत्या का प्रकरण बताकर मामले को दबा देना चाहती थी, लेकिन मीडिया के पहुंचने और परिजनों द्वारा हंगामा करने के बाद अनुसूचित जाति-जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज कर लिया गया. समिति के पहुंचने के पूर्व तक कोई सरकारी अधिकारी वहां नहीं पहुंचा था. कांगे्रस की ओर से दस हजार रुपए की तात्कालिक सहायता राशि पीड़ित परिवार को दी गई.
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें