सरकार के खिलाफ की नारेबाजी, कहा अविश्वास प्रस्ताव लेकर जाएंगे जनता के बीचमध्यप्रदेश विधानसभा का सत्र भले ही मंगलवार को खत्म हो गया, मगर कांग्रेस ने आज भी विधानसभा परिसर में समानांतर सत्र चलाया. इस दौरान कांगे्रस विधायकों ने सरकार पर जमकर हमला बोला और लोकतंत्र की हत्या करने का आरोप भी लगाया. कांग्रेस विधायकों के इस रुख को देखते हुए विधानसभा परिसर के आसपास सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे.
अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा न कराए जाने और डेढ़ दिन में सदन की कार्यवाही समाप्त कर दिए जाने के विरोध में कांगे्रस विधायकों ने आज समानांतर विधानसभा चलाई. सुबह 11 बजे नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह के साथ कांग्रेस विधायक विधानसभा परिसर पहुंचे. वहां पर सीढ़ियों पर वे बैठ गए. इस दौरान विधायकों ने हाथों में काली पट्टी बांधे रखी और सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर पांच साल का हिसाब भी मांगा. कांग्रेस विधायकों ने खुलकर सरकार पर आरोप लगाए और कहा कि आने वाले विधानसभा चुनाव में सरकार को हकीकत से वाकिफ करा देगा. नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने कहा कि प्रदेशभर में जनता के बीच जनसभा कर सरकार के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा कर उनके घपले और घोटालों को उजाकर किया जाएगा. 29 जून के बाद सभी कांग्रेस विधायक, कांग्रेस नेता जनता के पास जाएंगे और भाजपा के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव को षडयंत्रकारी तरीके से विधानसभा में चर्चा करने से रोकने की कहानी को बताएंगे. उन्होंने कहा कि जनता को यह भी बजाया जाएगा कि अविश्वास प्रस्ताव में क्या था, जिससे सरकार ने डरकर पहले तो मानसून सत्र को छोटा रखा और फिर डेढ़ दिन में उसे समाप्त कर दिया गया.
यादवेन्द्र सिंह को बनाया अध्यक्ष, बांधी आंख पर पट्टी
कांग्रेस के सामानांतर सदन में कांग्रेस विधायक यादवेन्द्र सिंह को अध्यक्ष बनाया गया. उन्हें सबसे ऊंची सीढ़ी पर बैठाया गया और उनके आंख पर पट्टी बांधकर विधायकों ने सरकार पर जमकर हमला बोला. यादवेन्द्र सिंह के मुंह पर कागज लगाकर उनके कानों में ईयर फोन लगा दिया गया था, जिसके चलते समानांतर सदन में वे पूरे समय आकर्षण का केन्द्र भी रहे.
सरकार घोषणा करती है, क्रियांवयन नहीं
मुख्य सचेतक रामनिवास रावत ने कहा कि सरकार केवल घोषणाएं करती है, घोषणाओं का क्रियांवयन वह नहीं करती. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने किसानों के हित में कई घोषणाएं की, मगर उन घोषणाओं का क्रियांवयन नहीं किया, जिसके चलते किसानों को खुदकुशी करनी पड़ी. उन्होंने कहा कि सरकार नहीं चाहती कि विधानसभा में जनहित के मुद्दों पर चर्चा हो. जनहित के मुद्दों पर चर्चा से बचने के लिए सत्रों को लगातार छोटा किया गया, फिर उन्हें जल्द ही समाप्त कर दिया गया.
व्यापमं की तरह ई-टेंडरिंग घोटाले की हो रही लीपापोती
विधायक मुकेश नायक ने ई-टेंडरिंग घोटाले के मुद्दे को कांग्रेस की समानांतर विधानसभा में उठाया. उन्होंने आरोप लगाया कि देश को डिजिटल इंडिया बनाने का अभिमान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का एक जुमला है, जिसकी असलियत क्या है यह हाल ही में प्रदेश में हुए ई-टेंडरिंग घोटाले ने उजागर कर दी है. व्यापमं महाघोटाले के बाद यह दूसरा बड़ा घोटाला है. इस घोटाले को लेकर भी सरकार की नीयत और नीति यह बता रही है कि सरकार इसे दबाने का प्रयास कर रही है. उन्होंने कहा कि इस घोटाले को व्यापमं घोटाले की तरह की दबाया जाएगा. नायक ने आरोप लगाया कि दिलीप बिल्डकान का करोड़ों का एम्पायर ई-टेंडरिंग गड़बड़ी से ही बना है. इस पूरे मामले की जांच सीबीआई से कराई जानी चाहिए. वहीं कांगे्रस विधायक जयवर्धन सिंह ने कहा कि ई-टेंडरिंग घोटाले में मुख्यमंत्री के नजदीकी ठेकेदार को उपकृत किया गया है. उन्होंने कहा कि जिस अधिकारी ने घोटाले को पकड़ा, उसी को छुट्टी पर भेज दिया, जबकि दस टेंडरों में टेंपरिंग के सबूत है.
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