हत्या, डकैती और लूट की वारदातों के निराकरण में निभाई है अहम भूमिका
भोपाल। पुलिस फ़ोर्स में श्वानों की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। पुलिस में इनके कामकाज की भी समय सीमा तय होती है। पुलिस के जवानों की तरह इन्हें भी एक समय के बाद अपने काम सेवानिवृत्ति दी जाती है। आज 23वीं वाहिनी में पुलिस के 10 श्वानों की सेवानिवृत्ति का अनूठा एवं रोचक आयोजन किया गया।
इस अनूठे कार्यक्रम के मुख्य अतिथि अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक विशेष सशस्त्र बल साजिद फरीद सापू थे। जबकि, अध्यक्षता डीआईजी (मध्य क्षेत्र) नवनीत भसीन ने की। इस प्रकार के आयोजन नवाचार पुलिस महकमे में पहली बार देखने को मिला। प्रारंभ में 23वी वाहिनी के सभाकक्ष में आयोजित इस कार्यक्रम में अतिथियों द्वारा सेवानिवृत्त हुए डॉग्स को विदाई दी गई जिन्होंने हत्या, लूट, डकैती और नारकोटिक्स जैसे मामलों के निराकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इस अवसर पर फरीद सापू ने कहा कि इन श्वानों की भूमिका को कभी भुलाया नहीं जा सकता। क्योंकि, पुलिस की सक्रियता और सफलता इन श्वानों के बिना असंभव है। पुलिस की सफलता में इन श्वानों का योगदान किसी से छिपा हुआ नहीं है। महत्वपूर्ण और पैचीदे मामले में इनकी मेहनत वंदनीय और अभिनंदनीय है।
1959 में हुआ था श्वान दल का गठन
मध्यप्रदेश पुलिस श्वान दल का गठन दो फरवरी 1959 को किया गया जिसका संचालन सेनानी 7वीं वाहिनी विसबल भोपाल के अधीन था। इसके उपरांत दिनांक 30 अप्रैल 1984 को श्वानदल को 7वीं वाहिनी भोपाल से स्थानांतरित कर 23वीं बटालियन भोपाल के अधीन किया गया। वर्ष 2013 में पुलिस ट्रेनिंग स्कूल (डॉग) के रूप में घोषित किया गया जो मध्यप्रदेश का एक मात्र पुलिस ट्रेनिंग स्कूल है। इस पुलिस ट्रेनिंग स्कूल (डॉग) में पुलिस एवं सशस्त्र बल के श्वान बुनियादी प्रशिक्षण प्राप्त कर पुलिस अनुसंधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

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