रविवार, 2 जुलाई 2023

कीमत नहीं मिली तो फेंक दिया, अब बिक रहा 160 रूपए किलो टमाटर

दलाल, व्यापारी को फर्क नहीं, उत्पादक किसान बना हुआ है कर्जदार

कहते हैं कि कोई बहुमूल्य वस्तु आसानी से मिल जाए तो उसकी कीमत नहीं होती है। इंसाद उनकी कदर नहीं करता है। ठीक उसी तरह से मध्यप्रदेश में टमाटर के हाल हुए हैं। एक महीने पहले टमाटर उत्पादक जिले रायसेन में किसानों को टमाटर की कीमत नहीं मिल रही थी, व्यापारी एक रूपए किलो टमाटर खरीद रहे थे। जब उपज की लागत नहीं मिली तो नाराज किसानों ने खेत में ही टमाटर को दबाकर नश्ट कर दिया। इसके बाद हालात कुछ ऐसे बने कि एक माह का समय ही बीता की उसी रायसेन में अब टमाटर की कीमत 160 रूपए किलो हो गई। इससे आम नागरिक परेशान है, किसान का कर्ज बरकरार है। मगर व्यापारी और दलाल पर इसका कोई फर्क नहीं पढ़ा। उनका कमीशन और फायदा तो अब भी हो रहा है। परेशान हो रहा तो टमाटर उत्पादक किसान। 

टमाटर ही नहीं प्रदेश में कई बार ऐसा हुआ है जब फसल का दाम न मिलने को लेकर किसानों को परेशान होता देखा है। मामला आंदोलन तक पहुंचता है, फिर शांत हो जाता है और किसान भी घर बैठ जाता है। सालों से ऐसा ही चलता आ रहा है। अब हाल ही में टमाटर को लेकर किसान सुर्खियों में आया है। दरअसल मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल से सटे जिले रायसेन में टमाटर की खासा फसल हुआ करती है। इस जिले को एक उत्पादक, एक जिले में भी शामिल किया गया है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार रायसेन जिले में लगभग 5,500 हेक्टेयर में टमाटर की खेती की जाती है व औसत उत्पादकता 300 से 350 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है। इस साल किसानों ने जिले में 58 सौ हेक्टेयर में टमाटर की खेती की थी। जबकि पिछले साल 55 सौ हेक्टेयर में टमाटर का उत्पादन किया गया था। इस साल जब किसान की फसल पकी और वह अपनी फसल को लेकर बाजार पहुंचा तो टमाटर के दाम कम हो गए। व्यापारियों ने जो दाम चुकाए वे करीब एक रूपए किलो पड़ रहे थे। इसे लेकर किसान दुखी था। किसानों का कहना है कि उसे टमाटर की तुड़वाई ही 20 रूपए कैरेट लग रही है। एक कैरेट में 25 से 30 किलो टमाटर आता है। ऐसे में मजदूरी देने के बाद उसके पास मात्र आठ से दस रूपए की फसल के मिल रहे थे। इसमें भी ष्शहर तक लाने का भाड़ा और फसल की लागत नहीं निकल रही थी। इस स्थिति से परेशान किसान ने टमाटर नश्ट करना ष्शुरू कर दिए। कुछ ने तुड़वाकर फेंक दिए तो किसी ने खेतों में दबा दिए। वहीं कुछ ने अपनी फसल को खेत में खड़े रहकर बर्बाद कर दी। बाद में कुछ किसानों ने खेत में धान की फसल रोंप दी। 

एक माह बाद बदल गया परिदृश्य

फसल नश्ट करने के एक माह बाद ही इसी ष्शहर में आज टमाटर के दाम 160 रूपए किलो हो गया है। अधिक कीमत के चलते नागरिक परेशान है। वहीं किसान नश्ट हुई फसल को लेकर चिंतित है। मगर व्यापारी और दलाल पर इसका कोई फर्क नहीं पड़ा। उन्हें उल्टा मुनाफा ही हो रहा है। देश के अन्य राज्यों में टमाटर भेजने वाले इस रायसेन जिले के हालात यह हो गए हैं कि यहां पर अब दूसरे राज्य से टमाटर लाकर बेचा जा रहा है।  


टमाटर उत्पादन के लिए अनुकूल है क्षेत्र

रायसेन जिले के बाड़ी, बरेली, उदयपुरा, अलीगंज, भारकच्छ और औबेदुल्लागंज क्षेत्र टमाटर की पैदावार के लिए अनुकूल मानी गई है। यहां की जलवायु व मिट्टी की अनुकूलता के कारण कई वर्षों से टमाटर की पैदावार हो रही है। सीजन पर यहां से कई ट्रक टमाटर रोजाना प्रदेश के अन्य जिलों व देशभर में बिक्री के लिए पहुंचाए जाते हैं।


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