गुरुवार, 6 जुलाई 2023

पूर्व मंत्रियों, उम्रदराज नेताओं से दूरी बना सकती है भाजपा

मध्यप्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर भाजपा टिकट वितरण को लेकर गंभीरता से काम कर रही है। इस बार दो सौ पार और 51 फीसदी वोट हासिल करने के लक्ष्य को पाने के लिए वह किसी भी कमजोरी के साथ मैदान में नहीं उतरना चाहती है। इसके चलते भाजपा संगठन ने टिकट वितरण में सर्वे और जिताउ प्रत्याशी पर फोकस किया है। हालांकि टिकट के दावेदारों की बढ़ती संख्या उसे परेशान भी कर रही है। इनमें पूर्व मंत्रियों की दावेदारी भाजपा के लिए चिंता बनी हुई है। हालांकि माना यह जा रहा है कि  इस बार राष्टीय नेतृत्व के संदेश के चलते अधिकांश पूर्व मंत्रियों की चुनाव
लड़ने की मंशा पर पानी फिर सकता है। 

मध्यप्रदेश भाजपा के लिए चुनाव के पहले उसके अपने ही चुनौती खड़ी करते नजर आ रहे हैं। लगातार प्रदेश में जीतती आ रही भाजपा में इस बार टिकट की दावेदारी करने वालों की संख्या कुछ ज्यादा है। वहीं पिछला चुनाव हारे पूर्व मंत्रियों की दावेदारी भी कुछ अधिक हो गई है। इसके चलते प्रदेश संगठन के लिए इस बार चुनाव में टिकट वितरण की चिंता बढ़ने लगी है। हालांकि संगठन ने फिलहाल तो संकेत दिए हैं कि टिकट का वितरण सर्वे और जिताउ प्रत्याशी के आधार पर ही होगा। प्रदेश भाजपा संगठन के सर्वे पर यह फैसला नहीं लिया जाएगा। भाजपा में वर्तमान में तीन अलग-अलग सर्वे की बातें सामने आ रही है। संघ, भाजपा के राष्टीय नेतृत्व और प्रदेश संगठन द्वारा सर्वे कराए जाने की बातें सामने आई है। इसके अलावा मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का अपना सर्वे भी इस मामले में पेंच खड़ा करेगा। सूत्रों की माने तो भाजपा में अलग-अलग तरह से सर्वे हो रहे हैं, जिसके चलते प्रत्याशी चयन में इस बार काफी मशक्कत करनी पड़ सकती है। फिलहाल संगठन की बैठकों में पूर्व मंत्रियों द्वारा टिकट के लिए बनाए जा रहे दबाव को लेकर चिंता खड़ी हुई है। इन पूर्व मंत्रियों में कुछ चुनाव हारे हुए हैं, और कुछ वर्तमान में विधायक हैं, मगर क्षेत्र में उनकी स्थिति कमजोर आंकी जा रही है। 

इन के नामों पर बना हुआ है असमंजस

पूर्व मंत्री अंतर सिंह आर्य, ललिता यादव, ओमप्रकाश धुर्वे, नारायण सिंह कुशवाहा, जयभान सिह पवैया, रुस्तम सिंह, उमा शंकर गुप्ता , अर्चना चिटनिस, हरेन्द्रसिंह बब्बू, कुसुम महदेले, शरद जैन , जयंत मलैया , बालकृष्ण पाटीदार, अपूनप मिश्रा और लाल सिंह आर्य शामिल हैं। इनमें से अधिकांश नेता उम्रदराज हो चुके हैं, तो कई पूर्व मंत्रियों के क्षेत्र में सिंधिया समर्थक विधायक अब भाजपा की तरफ से दावेदार हैं। ऐसे में इन नेताओं के टिकट को लेकर तो पहले से ही असमंजस की स्थिति बनी हुई थी। भाजपा इस बार पूर्व मंत्रियों और पूर्व विधायकों के स्थान पर नए चेहरों को मैदान में उतारना चाह रही है। 

सिंधिया समर्थक विधायक, मंत्री भी बढ़ा रहे परेशानी

भाजपा के लिए केन्द्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया समर्थक मंत्री और विधायक भी चिंता बढ़ा रहे हैं। पूर्व विधायक जो पिछला चुनाव हारे थे, वे इनके खिलाफ मोर्चा खोले हुए हैं। पार्टी के कर्मठ कार्यकर्ता का हवाला देते हुए कई नेताओं ने दावेदारी पेश करते हुए बगावत करने तक का बात कहकर संगठन की चिंता को बढ़ा दिया है। भाजपा सिंधिया समर्थकों को लेकर संजीदा भी है और मंथन कर रही है कि किस तरह से अपने रूठे कार्यकर्ता को मनाया जाए। हालांकि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान खुद सक्रियता दिखा कर नाराज लोगों को मनाने का काम कर रहे हैं, मगर अब तक फायदा होता नजर नहीं आया है। भाजपा कार्यकर्ता अब भी सिंधिया समर्थकों के खिलाफ मोर्चा खोले हुए हैं। 

पीढ़ी परिवर्तन का दिखेगा असर

भाजपा ने जिस तरह से संगठन में पीढ़ी का बदलाव किया गया है, उसका असर इस बार भाजपा के प्रत्याशी चयन में भी दिख सकता है। माना जा रहा है कि पार्टी इस बार युवा और अधिक ऊर्जावान नेताओं पर दांव लगा सकती है। यह वे चेहरे होंगे जो, बीते दो तीन चुनावों से इलाके में न केवल बेहद सक्रिय हैं, बल्कि लगातार दावेदारी के बाद भी टिकट नहीं पा सके हैं। नए चेहरों को मैदान में उतारकर जीत हासिल करने की तैयारी की है।  भाजपा ने छह-सात बार या इससे अधिक चुनाव लड़ चुके नेताओं को टिकट नहीं देने की रणनीति पर काम कर रही है। ऐसे विधानसभा क्षेत्रों में ज्यादातर सीटों पर नए और युवा चेहरों की तलाश की जा रही है। 



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