मजेदार बात यह भी है कि जब भी बदलाव की खबरें तेज होती है भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय की सक्रियता तेज होती रही है। पिछली बार भी जब इस तरह की खबरें सामने आई तो मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के साथ हुई बैठक में विजयवर्गीय भी शामिल हुए थे। हालांकि इस बैठक में केन्द्रीय मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर और प्रहलाद पटेल भी शामिल थे। तब प्रहलाद पटेल का नाम तेजी से नए अध्यक्ष को लेकर सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। मगर बाद में मामला ठंडा पड़ गया। अब फिर चार नामों को लेकर चर्चा गर्म है। इन चार नामों में नरेन्द्र सिंह तोमर, प्रहलाद पटेल, कैलाश विजवर्गीय और सुमेर सिंह सोलंकी के नाम है। इनमें सबसे ज्यादा चर्चा में कैलाश विजयवर्गीय का नाम सामने आ रहा है। हालांकि भाजपा नेता अभी किसी तरह की कोई पुष्टि नहीं कर रहे हैं और न ही यह कह रहे हैं कि बदलाव हो रहा है। ये खबरें केवल मीडिया तक सीमित है।
राजनीति के जानकारों की माने तो नरेन्द्र सिंह तोमर पर दिल्ली के नेता ज्यादा भरोसा जता रहे हैं। वहीं भाजपा के अंदरखानों से खबर भी आ रही है कि तोमर अध्यक्ष पद से दूरी बनाकर रखना चाह रहे हैं। वे केन्द्रीय मंत्री का पद नहीं छोड़ना चाहते। वहीं प्रहलाद पटेल ओबीसी वर्ग से आते हैं। और प्रदेश में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भी इसी वर्ग का नेतृत्व करते हैं। इस लिहाज से दोनों पदों पर एक ही जाति के व्यक्तियों को भाजपा नहीं देना चाहती है। इसके बाद कैलाश विजय वर्गीय और सुमेर सिंह सोलंकी का नाम शेश रह जाता है। विजयवर्गीय पार्टी का मध्य प्रदेश का बड़ा चेहरा है। राष्ट्रीय राजनीति में जाने के बाद सूबे की राजनीति से हाशिए पर चले गए थे। उनके सांगठनिक कौशल को देखते हुए पार्टी अगले विधानसभा और लोकसभा चुनाव के लिए उन्हें प्रदेश अध्यक्ष बना सकती है। कैलाश विजयवर्गीय मालवा निमाड़ में खासा प्रभाव भी रखते हैं। वहीं इसी अंचल से आने वाले सांसद सुमेर सिंह का नाम भी तेजी से इस पद के लिए उभर रहा है। हालांकि सुमेर सिंह का कद प्रदेश स्तर का नहीं है। उनके खाते में केवल आदिवासी वर्ग का प्रतिनिधित्व करना ही आता है। इसके चलते उनके नाम की चर्चा तेज है। फिर भाजपा का पूरा फोकस आदिवासी मतदाता पर है, ऐसे में पार्टी उनके नाम पर मंथन कर सकती है, लेकिन उन्हें पद मिले इसकी संभावना नजर नहीं आती है।
इसलिए उठी बदलाव की लहरें
दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में एक बैठक हुई है। इस बैठक में राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा, गृहमंत्री अमित शाह और संगठन महामंत्री बीएल संतोष मौजूद रहे। इसमें आगामी विधानसभा चुनाव, लोकसभा चुनाव के अलावा संगठन और सरकार में फेरबदल को लेकर मंथन किया गया। इसके बाद से ही मध्य प्रदेश में भी पार्टी नेतृत्व में परिवर्तन की चर्चा चल पड़ी लेकिन यह देखने वाली बात है कि भाजपा का इतिहास रहा है कि वह हमेशा चौंकाने वाले फैसले करती है। इस विषय पर अभी भी कुछ कहना जल्दबाजी होगी।
मैदान सजने के बाद नहीं बदलते घोड़े
राजनीति के जानकार मानते हैं कि जब युद्ध का मैदान जब सज जाता है तब कोई भी यौद्धा अपने घोड़े नहीं बदला करता है। लेकिन समझ नहीं आ रहा है कि प्रदेश में पांच माह बाद विधानसभा चुनाव होने है। मैदानी तैयारियां भी तेज है। दिल्ली के नेताओं के दौरे और सभाएं भी हो रही है। फिर ऐसी स्थिति में इस तरह की खबरें बार-बार आना क्या संदेश देगी। वर्तमान संगठन पर भी इस असर पड़ेगा। इसके बाद भी लगातार इस तरह की खबरें तेजी से मीडिया में आ रही है। अगर ये खबरें सही है तो यह भाजपा की आत्मघाती राजनीति भी हो सकती है।

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