सोमवार, 1 जनवरी 2018

मध्यप्रदेश में 7 हजार गिद्ध

मध्यप्रदेश के 35 जिलों में 7 प्रजातियों के 7 हजार गिद्ध हैं. यह जानकारी वन विभागद्वारा की गई गिद्धों की गणना के बाद सामने आई है.वन विभाग द्वारा दी जानकारी के अनुसार लगभग समाप्त प्राय हो चले गिद्ध की आबादी को बढ़ाने के लिए भी मध्यप्रदेश में उल्लेखनीय प्रयास किये गये हैं. प्रदेश में पहली बार वर्ष में दो बार गिद्धों की गणना की गई. इसमें 35 जिलों में 7 प्रजातियों के 7 हजार से अधिक गिद्ध मिले. भोपाल के समीप केरवा में गिद्ध प्रजनन केन्द्र स्थापित किया गया है. वन्य प्राणी नियंत्रण के लिये अलग से टीम और डॉग स्क्वॉड का गठन किया गया है. प्रदेश में 16 क्षेत्रीय वन्य प्राणी रेस्क्यू स्क्वॉड हैं. वर्ष 2009 से अब तक 30 बाघ और 22 तेंदुए रेस्क्यू किये गये हैं. वन्य प्राणी प्रबंध में वन्य अनुसंधान संस्थान, कैमरा ट्रेप, सोलर लाइट का भी भरपूर उपयोग किया जा रहा है. बाघों की बढ़ती संख्या के मद्देनजर भोपाल की सीमा पर स्थित मेंडोरा नामक स्थान पर ईआई सर्विलेंस सिस्टम लगाया गया है. स्थानीय ग्रामीणों में से 50-60 वालेंटियर का चयन कर उन्हें बाघ मित्र के रूप में प्रशिक्षित किया जा रहा है. इससे मनुष्य एवं बाघ की बेहतर सुरक्षा होगी. वन्य प्राणियों द्वारा जन हानि, जन घायल और पशु हानि किये जाने पर मुआवजा दिया जाता है. फसल हानि करने पर भी क्षतिपूर्ति भुगतान की व्यवस्था है. वन अपराध रोकने के लिये मुखबिर तंत्र का विकास किया गया है. संवेदनशील वन क्षेत्रों में पेट्रोलिंग कैम्प की व्यवस्था है.

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