शनिवार, 20 जनवरी 2018

मध्यप्रदेश के 927 वन ग्रामों को राजस्व ग्राम में तब्दील करने का प्रस्ताव

    केन्द्रीय जनजातीय कार्य राज्य मंत्री जसवंत सिंह भाबर की अध्यक्षता में  इंदौर संभाग जनजातीय कल्याण विभाग के अधिकारियों की रेसीडेंसी सभाकक्ष में बैठक सम्पन्न हुई. इस अवसर पर भाबर ने कहा कि मध्यप्रदेश विशेषकर इंदौर संभाग में जनजातीय कल्याण के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि इंदौर संभाग के बड़वानी और कुक्षी एकलव्य विद्यालय के खिलाड़ियों का राष्ट्रीय स्तर पर चयन होना इस बात का द्योतक है. उन्होंने कहा कि पूरे देश में जनजातीय कल्याण के लिए धन की कमी नहीं आने दी जाएगी.  उन्होंने कहा कि जनजातीय लोगों के शिक्षा और स्वास्थ्य के लिए विशेष प्रयास किये जा रहे हैं. केन्द्र सरकार की मंशा है कि प्रत्येक आदिवासी बहुल विकासखण्ड में एकलव्य विद्यालय खोले जाएं. भारत सरकार की मंशा है कि जनजातीय लोगों को राष्ट्र की मुख्य धारा से जोड़ा जाये. राज्य और केन्द्र सरकार जनजातियों के आर्थिक और सामाजिक उत्थान के लिए कृतसंकल्पित है. उन्होंने कहा कि भारत सरकार इस बात के लिए विचार कर रही है कि स्वयंसेवी संगठनों के सहयोग से जनजातियों का कल्याण किया जाए. भारत सरकार की मंशा है कि सबका साथ-सबका विकास हो. अनुसूचित जनजातीय वर्ग के कल्याण के लिए मध्यप्रदेश शासन द्वारा प्रस्ताव तैयार किये जाये और उसे केन्द्र सरकार को भेजा जाये. परीक्षण उपरान्त उन प्रस्तावों की स्वीकृति दी जायेगी. केन्द्र सरकार चाहती है कि सभी आदिवासी बहुल क्षेत्र में औद्योगिक प्रशिक्षण केन्द्र खोला जाये. केन्द्र सरकार इस प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार कर रही है. मध्यप्रदेश के 927 वन ग्रामों को राजस्व ग्राम में बदलने की कार्यवाही चल रही है. संभागीय मुख्यालय पर आदिवासियों के लिये और अधिक पोस्ट मैट्रिक छात्रावास खोले जाने का प्रस्ताव है. भारत सरकार इस बात पर गंभीरतापूर्वक विचार कर ही है कि स्वयंसेवी संगठनों के सहयोग से प्रत्येक आदिवासी बहुल जिले में अंग्रेजी माध्यम के स्कूल संचालित किये जायें.  

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