शनिवार, 20 जनवरी 2018

दिव्यांग धीरज बना नायब तहसीलदार

धीरज कुमार गौतम 
मध्यप्रदेश के  सतना जिले के बिरसिंहपुर के पास ग्राम गुझवा निवासी दिव्यांग धीरज कुमार गौतम बडे और संयुक्त परिवार मे पिता की छोटी-मोटी आजीविका के फलस्वरूप मध्यप्रदेश सिविल सेवा परीक्षा मे बिना कोचिंग और तैयारी के सफल होने की बात सोच भी नही सकते थे. ऐसे मे मध्यप्रदेश सरकार की सामाजिक न्याय विभाग की नि:शक्त अभ्यर्थियो के लिए संचालित सिविल सेवा प्रोत्साहन योजना ने उन्हे सहारा दिया. दिव्यांग धीरज गौतम वर्ष 2017 की म.प्र. राज्य सेवा आयोग की परीक्षा उत्तीर्ण कर नायब तहसीलदार भी बन चुके है. अब उनकी मंजिल एक बार फिर प्रयास कर डिप्टी कलेक्टर बनने की है.  धीरज कुमार गौतम बताते है कि भोपाल से बी.काम. और एम.काम की डिग्री लेने के बाद घर की सीमित आमदनी मे 4 भाई और 2 बहिन वाले संयुक्त परिवार को मेरी आगे की प्रतियोगिता परीक्षा की तैयारी और कोचिंग के लिए धनाभाव सामने आ गया है. फिर उन्हें शासन द्वारा दिव्यांगो को दी जाने वाली सहायता के बारे मे जानकारी हुई और एम.पी.पी.एस.सी. प्रारंभिक परीक्षा का फार्म भर दिया. प्रारंभिक परीक्षा उत्तीर्ण करने पर मुझे सिविल सेवा प्रोत्साहन योजना मे 20 हजार की राशि भी मिल गई. सरकारी सहायता से प्रतियोगिता की तैयारी के लिये पुस्तकें खरीदी और ढ़ाई महीने की कोचिंग भी ले ली. जून 2017 मे हुई मुख्य परीक्षा मे भी उत्तीर्ण होने पर योजना के तहत मुझे 20 हजार रुपए की सहायता और मिल गई. एम.पी.पी.एस.सी. की परीक्षा मे मेरिट लिस्ट मे 1174 वां स्थान मिलने और नियुक्ति नायब तहसीलदार के पद पर होने के फलस्वरूप योजना के तहत 30 हजार रुपए और मिलने वाले है. इस शासन की सहायता से दिव्यांग धीरज गौतम परिवार पर बोझ नही बनते हुये अपने पैरो पर खडे होकर पूरे आत्मविश्वास से परीक्षा मे सफल हुए. 

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