मध्यप्रदेश संविदा कर्मचारी संघ ने फैसला लिया है कि अगर सरकार ने उनकी मांगों को नहीं माना तो प्रदेश के कोलारस और मुंगावली उपचुनाव के दौरान वे विधानसभा क्षेत्रों में पहुंचकर भीख मांगेंगे और मतदाता के सामने सरकार द्वारा वादा करके मुकर जाने की बात बताएंगे.
पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के वाटरशेड मिशन में 6 हजार वाटरशेड सचिव जो कि संविदा पर कार्यरत थे को 16 दिसम्बर 2016 में संविदा से हटा दिया गया था. वाटरशेड सचिवों की सेवा बहाली के लिए अनेक बार मुख्यमंत्री, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग मंत्री सहित शासन एवं प्रशासन को अनेक बार ज्ञापन देने के पश्चात भी अभी तक सेवा में वापस नहीं लिया गया है. सेवा वापसी को लेकर वाटरशेड सचिवों की बैठक आज सोमवार को राजधानी भोपाल के चिनार पार्क में आयोजित की गई, जिसमें निर्णय लिया गया कि हटाऐ गये संविदा कर्मचारियों की स्थिति बहुत दयनीय हो गई है परिवार पालना मुश्किल हो रहा है. बच्चों को पढ़ाना और घर चलाने में बहुत उधारी हो चुकी है. हटाए गये संविदा कर्मचारियों की भीख मांगने की नौबत आ चुकी है इसलिए, यदि मध्यप्रदेश सरकार ने दस दिवस के अंदर हटाये गये संविदा कर्मचारियों की सेवा बहाल नहीं की तो मुंगावली और कोलारस में सभी हटाये गये संविदा कर्मचारी अधिकारी अपने परिवार सहित जाकर भीख मांगेंगें. वाटरशेड मिशन से अन्य संविदा कर्मचारी अधिकारी जैसे टीम लीडर, टीम सदस्य को भी हटाया गया था, जिनको की पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की अन्य योजनाओं में संविलयन कर दिया गया लेकिन वाटरशेड सचिवों को अभी तक सेवा में नहीं लिया गया है.
मध्यप्रदेश संविदा कर्मचारी अधिकारी महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष रमेश राठौर ने बताया कि केवल पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग वाटरशेड योजना के 6000 हजार वाटरशेड सचिवों को ही नहीं हटाया गया है बल्कि, साक्षरता के 24000 हजार प्रेरक, स्वास्थ्य विभाग के 773 मलेरिया कर्मचारी, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन से 1500 संविदा बीमाक एकाउन्टेंट, अर्श काउन्सलर, जननी काल सेंटर के कर्मचारियों, योजना आर्थिक सांख्यिकी विभाग के 1510 प्रगणकों, 450 डाटा एन्ट्री आपरेटरों को कौशल विकास केन्द्र तथा आईटीआई से 600 प्रशिक्षकों, प्रबंधकों, लेखापालों को, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग 200 तकनीकी सहायकों को, बीआरजीएफ के 300 कम्पयूटर आपरेटर व इंजीनियरर्स को. महिला बाल विकास विभाग से 450 ईसीसीई समन्वयकों को, कुम्भ मेले में कार्य कर चुके 3000 होम गार्ड जवानों को, विद्युत वितरण कम्पनी के 50 इंजीनियरों व कर्मचारियों सहित कुल 39 हजार 600 सौं संविदा कर्मचारियों को हटा दिया गया है, जिनके सामने रोजी-रोटी का संकट पैदा हो गया है. यदि प्रदेश सरकार ने हटाये गये संविदा कर्मचारियों को 10 दिन में बहाल करने के आदेश जारी नहीं किए तो सभी हटाए गऐ संविदा कर्मचारी अधिकारी मुंगावली और कोलारस में जाकर भीख मांगगें.
पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के वाटरशेड मिशन में 6 हजार वाटरशेड सचिव जो कि संविदा पर कार्यरत थे को 16 दिसम्बर 2016 में संविदा से हटा दिया गया था. वाटरशेड सचिवों की सेवा बहाली के लिए अनेक बार मुख्यमंत्री, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग मंत्री सहित शासन एवं प्रशासन को अनेक बार ज्ञापन देने के पश्चात भी अभी तक सेवा में वापस नहीं लिया गया है. सेवा वापसी को लेकर वाटरशेड सचिवों की बैठक आज सोमवार को राजधानी भोपाल के चिनार पार्क में आयोजित की गई, जिसमें निर्णय लिया गया कि हटाऐ गये संविदा कर्मचारियों की स्थिति बहुत दयनीय हो गई है परिवार पालना मुश्किल हो रहा है. बच्चों को पढ़ाना और घर चलाने में बहुत उधारी हो चुकी है. हटाए गये संविदा कर्मचारियों की भीख मांगने की नौबत आ चुकी है इसलिए, यदि मध्यप्रदेश सरकार ने दस दिवस के अंदर हटाये गये संविदा कर्मचारियों की सेवा बहाल नहीं की तो मुंगावली और कोलारस में सभी हटाये गये संविदा कर्मचारी अधिकारी अपने परिवार सहित जाकर भीख मांगेंगें. वाटरशेड मिशन से अन्य संविदा कर्मचारी अधिकारी जैसे टीम लीडर, टीम सदस्य को भी हटाया गया था, जिनको की पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की अन्य योजनाओं में संविलयन कर दिया गया लेकिन वाटरशेड सचिवों को अभी तक सेवा में नहीं लिया गया है.
मध्यप्रदेश संविदा कर्मचारी अधिकारी महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष रमेश राठौर ने बताया कि केवल पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग वाटरशेड योजना के 6000 हजार वाटरशेड सचिवों को ही नहीं हटाया गया है बल्कि, साक्षरता के 24000 हजार प्रेरक, स्वास्थ्य विभाग के 773 मलेरिया कर्मचारी, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन से 1500 संविदा बीमाक एकाउन्टेंट, अर्श काउन्सलर, जननी काल सेंटर के कर्मचारियों, योजना आर्थिक सांख्यिकी विभाग के 1510 प्रगणकों, 450 डाटा एन्ट्री आपरेटरों को कौशल विकास केन्द्र तथा आईटीआई से 600 प्रशिक्षकों, प्रबंधकों, लेखापालों को, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग 200 तकनीकी सहायकों को, बीआरजीएफ के 300 कम्पयूटर आपरेटर व इंजीनियरर्स को. महिला बाल विकास विभाग से 450 ईसीसीई समन्वयकों को, कुम्भ मेले में कार्य कर चुके 3000 होम गार्ड जवानों को, विद्युत वितरण कम्पनी के 50 इंजीनियरों व कर्मचारियों सहित कुल 39 हजार 600 सौं संविदा कर्मचारियों को हटा दिया गया है, जिनके सामने रोजी-रोटी का संकट पैदा हो गया है. यदि प्रदेश सरकार ने हटाये गये संविदा कर्मचारियों को 10 दिन में बहाल करने के आदेश जारी नहीं किए तो सभी हटाए गऐ संविदा कर्मचारी अधिकारी मुंगावली और कोलारस में जाकर भीख मांगगें.

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